Uttarakhand उत्तराखंड: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिल्क्यारा सुरंग हादसे की तरह ही शनिवार को पिथौरागढ़ के ऐलागढ़ में भी एक ऐसी ही घटना घटी। राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनएचपीसी) के धौलीगंगा पावर स्टेशन की सुरंग में शनिवार को अचानक भूस्खलन हुआ और 19 कर्मी 24 घंटे तक फंसे रहे। आज, रविवार को एनएचपीसी, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और सीआईएसएफ व अन्य बचाव दलों के संयुक्त अभियान द्वारा सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया।
आपको बता दें कि एनएचपीसी का धौलीगंगा बांध और साथ ही धौलीगंगा पावर स्टेशन पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील के उच्च हिमालयी क्षेत्र ऐलागढ़ में स्थित है। बताया जा रहा है कि शनिवार को पावर स्टेशन पर अचानक भूस्खलन हुआ। जिसके कारण स्टेशन की मुख्य सुरंग के साथ-साथ आपातकालीन सुरंग भी प्रभावित हुई और इससे आवाजाही बंद कर दी गई। बताया जा रहा है कि इस हादसे में आपातकालीन सुरंग को काफी नुकसान पहुंचा है। इस दौरान सुरंग में 19 कर्मी और श्रमिक काम कर रहे थे। सभी फंस गए।
रविवार दोपहर तक कड़ी मशक्कत के बाद बमुश्किल 8 कर्मियों को ही सुरंग से बाहर निकाला जा सका। इसके बावजूद 11 कर्मी सुरंग में फंसे रहे। देर शाम तक एनएचपीसी, एनडीआरएफ और सीआईएसएफ ने बड़ी मुश्किल से सभी 11 कर्मियों को सुरंग से बाहर निकाला। सुरंग से निकाले गए कर्मियों में चंदर सोनल, शंकर सिंह, पूरन बिष्ट, नवीन कुमार, प्रेम दुग्ताल, धनराज बहादुर, गगन सिंह धामी, ललित मोहन बिष्ट, सूरज गुरुरानी, विष्णु गुप्ता, जितेंद्र सोनल, प्रकाश दुग्ताल, कमलेश धामी, सुनील धामी, जी ऑगस्टीन बाबू, अपूर्व राय, इंदर गुंजियाल और बिशन धामी शामिल हैं।
सूत्रों से पता चला है कि जिला प्रशासन द्वारा सभी कर्मचारियों को उनके गंतव्य और घरों तक पहुँचा दिया गया है। गौरतलब है कि पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने पूरे दिन इस मामले को दबाए रखा। जिला मजिस्ट्रेट विनोद गोस्वामी ने पूरे दिन इस मामले से दूरी बनाए रखी, जबकि धारचूला के उप-जिला मजिस्ट्रेट जितेंद्र वर्मा ने संपर्क करने पर कहा कि इस घटना में कोई भी कर्मचारी प्रभावित नहीं हुआ है।