कांवड़ यात्रा के बीच दो हादसे, दो कांवड़ियों की मौत

Update: 2026-08-09 07:24 GMT

रुड़की। सावन के दौरान कांवड़ यात्रा के चलते रविवार को रुड़की बाईपास से लेकर नारसन बॉर्डर तक हाईवे पर कांवड़ यात्रियों की भारी भीड़ रही। बड़ी संख्या में कांवड़ियों के पैदल और अन्य साधनों से गुजरने के कारण हाईवे का बड़ा हिस्सा पूरी तरह कांवड़ यात्रियों के हवाले रहा। यातायात व्यवस्था को देखते हुए ग्रामीणों को भी आवागमन के लिए दूसरे संपर्क मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ा।

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच प्रशासन और पुलिस के सामने यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है। हाईवे पर कांवड़ियों की भीड़ के कारण सामान्य वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा।

इसी बीच मंगलौर क्षेत्र में अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में दो कांवड़ियों की अज्ञात वाहनों की चपेट में आने से मौत हो गई। इनमें से एक कांवड़िए की पहचान हो गई है, जबकि दूसरे की पहचान अभी नहीं हो सकी है। दोनों घटनाओं के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

शिव मंदिर के पास कांवड़िए की मौत

पहली घटना मंगलौर कोतवाली की गुरुकुल नारसन पुलिस चौकी क्षेत्र में हुई। बताया गया कि देर रात शिव मंदिर के पास एक कांवड़िया सड़क पर जा रहा था। इसी दौरान वह किसी अज्ञात वाहन की चपेट में आ गया।

हादसे में कांवड़िया गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

मृतक की उम्र करीब 25 से 30 वर्ष बताई जा रही है। फिलहाल उसकी पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतक की पहचान के लिए पुलिस आसपास के क्षेत्रों और कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं से जानकारी जुटा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसा किस वाहन से हुआ। अज्ञात वाहन चालक की तलाश के लिए आसपास के संभावित स्थानों की जानकारी जुटाई जा रही है।

लिब्बरहेड़ी के पास दूसरे कांवड़िए की मौत

दूसरी दुर्घटना रविवार सुबह ग्राम लिब्बरहेड़ी के पास हुई। यहां भी एक कांवड़िया अज्ञात वाहन की चपेट में आ गया। हादसे में उसकी मौत हो गई।

मृतक की पहचान मांगा निवासी बड़ौत, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 45 वर्ष बताई गई है। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जानकारी ली और शव को कब्जे में लिया।

दोनों दुर्घटनाओं में अज्ञात वाहनों की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस अब संबंधित वाहनों की तलाश में जुटी है। कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए पुलिस के लिए ऐसे हादसों को रोकना भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

हाईवे पर कांवड़ियों की भारी भीड़

रविवार को रुड़की बाईपास से नारसन बॉर्डर तक हाईवे पर कांवड़ियों की भारी भीड़ दिखाई दी। कांवड़िए हरिद्वार की ओर से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़क पर होने के कारण सामान्य यातायात व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा है।

कांवड़ यात्रा के दौरान कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित की गई है। इसके चलते ग्रामीण इलाकों के लोगों को भी अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए दूसरे संपर्क मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे पर श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में सामान्य वाहनों और कांवड़ियों की आवाजाही अलग-अलग रखने की जरूरत महसूस होती है, ताकि हादसों की आशंका कम की जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था के बीच हादसों ने बढ़ाई चिंता

कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। इसके बावजूद हाईवे पर वाहनों और कांवड़ियों की आवाजाही के बीच हादसे सामने आ रहे हैं। मंगलौर क्षेत्र में कुछ ही घंटों के अंतराल में दो कांवड़ियों की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पुलिस के सामने एक ओर कांवड़ियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय और अन्य वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।

अज्ञात वाहनों की चपेट में आने से हुई दोनों मौतों के बाद पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है। साथ ही मृतकों की पहचान और परिजनों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया भी की जा रही है।

ग्रामीणों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा

हाईवे पर कांवड़ यात्रियों की भारी भीड़ के कारण आसपास के गांवों के लोगों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण अब दूसरे संपर्क मार्गों से होकर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।

कांवड़ यात्रा के दौरान यह स्थिति हर साल देखने को मिलती है, लेकिन इस बार भीड़ के कारण हाईवे का बड़ा हिस्सा श्रद्धालुओं के लिए समर्पित नजर आया। इससे स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक मार्गों का महत्व बढ़ गया है।

प्रशासन की कोशिश है कि कांवड़ियों की यात्रा सुचारु बनी रहे और स्थानीय लोगों को भी अनावश्यक परेशानी न हो। वहीं, लगातार बढ़ती भीड़ के बीच सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

मंगलौर क्षेत्र में दो कांवड़ियों की मौत के बाद अब पुलिस अज्ञात वाहन चालकों की तलाश में जुटी है। एक मृतक की पहचान हो चुकी है, जबकि दूसरे की पहचान कराने के प्रयास जारी हैं। कांवड़ यात्रा के बीच हुए इन हादसों ने एक बार फिर हाईवे पर पैदल चल रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात नियंत्रण की चुनौती को सामने ला दिया है।

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