
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ों पर लगातार वर्षा के कारण काली नदी समेत जिले की कई अन्य नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। काली नदी का जलस्तर 888.30 मीटर के पार पहुंचने से नदी किनारे रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। प्रशासन और स्थानीय लोग नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
मौसम के बदले मिजाज के बीच जिले के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार पानी बरसने के कारण नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ गया है। इससे तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे की चिंता सताने लगी है।
बंगापानी में सबसे अधिक 82 मिमी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, जिले के बंगापानी क्षेत्र में सबसे अधिक 82 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा धारचूला में 43 मिलीमीटर और तेजम में 35 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। अन्य तहसीलों में भी मध्यम बारिश का दौर जारी है।
लगातार बारिश का सबसे ज्यादा असर नदी-नालों के जलस्तर पर देखने को मिल रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई बारिश का पानी तेजी से नीचे आने के कारण नदियों का प्रवाह बढ़ रहा है। काली नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी किनारे बसे गांवों और अन्य संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोग विशेष सतर्कता बरत रहे हैं।
काली नदी के बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता
काली नदी सीमांत जिले के कई क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण जलधारा है। इसके जलस्तर में वृद्धि होने पर नदी किनारे स्थित आबादी और संपर्क मार्गों पर खतरा बढ़ जाता है। 888.30 मीटर से अधिक जलस्तर पहुंचने के बाद तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण नदी का बहाव सामान्य दिनों की तुलना में काफी तेज हो गया है। ऐसे में नदी के किनारे जाने से बचने और विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में नदी के बढ़ते जलस्तर के साथ प्रशासन के सामने सड़कों और संपर्क मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।
अन्य नदियां भी उफान पर
काली नदी के अलावा जिले की अन्य नदियों और गधेरों में भी पानी बढ़ गया है। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश के कारण छोटे नाले भी उफान पर आ सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
बरसाती नालों में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में आसपास के खेतों और आबादी को भी नुकसान हो सकता है। इसलिए ग्रामीणों को नदी, नालों और पुलों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी जा रही है।
निचले इलाकों में रहने वालों की बढ़ी चिंता
लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर नदी के करीब बसे परिवारों को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
स्थानीय लोगों की निगाह अब मौसम के अगले रुख पर टिकी हुई है। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है। इससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ने की संभावना है।
ग्रामीणों का कहना है कि मानसून के दौरान हर साल नदी के जलस्तर में वृद्धि होती है, लेकिन लगातार तेज बारिश की स्थिति में खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से निगरानी और बचाव की तैयारी जरूरी है।
प्रशासन के सामने निगरानी की चुनौती
बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन के सामने संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करने की जरूरत है।
प्रशासन के लिए यह भी जरूरी है कि संभावित भूस्खलन वाले क्षेत्रों, पुलों और ग्रामीण संपर्क मार्गों की स्थिति पर नजर रखी जाए। किसी मार्ग के बाधित होने की स्थिति में लोगों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा।
आपदा की दृष्टि से संवेदनशील पहाड़ी जिले में बारिश के दौरान छोटी घटनाएं भी बड़ी समस्या का रूप ले सकती हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव दलों की तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बारिश थमने पर ही मिलेगी राहत
फिलहाल जिले में बारिश का दौर जारी है और मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कई क्षेत्रों में अच्छी खासी वर्षा हुई है। बंगापानी में 82 मिलीमीटर बारिश दर्ज होना इसकी गंभीरता को दर्शाता है। धारचूला और तेजम में भी उल्लेखनीय बारिश हुई है।
यदि आने वाले समय में बारिश की तीव्रता कम होती है तो नदियों के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद की जा सकती है। लेकिन लगातार बारिश होने पर स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
काली नदी का जलस्तर 888.30 मीटर के पार पहुंचने के बाद अब सबसे बड़ी चिंता नदी किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर है। प्रशासन और स्थानीय लोगों को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। फिलहाल जिले में बारिश, नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित भूस्खलन को देखते हुए सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।





