उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन और भारी बर्फबारी के कारण आठ लोग फंस गए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सात ट्रेकर्स तथा एक स्थानीय गाइड शामिल हैं। दल के साथ गए तीन पोर्टर और एक कुक सहित चार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। फंसे लोगों में से एक के सिर पर चोट लगने की सूचना है। रविवार एक नवंबर की सुबह तक प्रकाशित जानकारी के अनुसार प्रशासन शेष लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान में जुटा है। मौसम अनुकूल रहने पर हेलीकॉप्टर की मदद लेने की तैयारी है। 
यह दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था। ट्रेकर्स को 29 अक्टूबर तक वापस लौटना था लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्र में मौसम बिगड़ने और रास्ते पर बर्फ जमा होने से वापसी बाधित हो गई। हिमस्खलन के कारण भोजखड़क से आगे का मार्ग बंद होने की जानकारी सामने आई है। निर्धारित समय पर दल के नहीं लौटने के बाद ट्रेकिंग एजेंसी और प्रशासन की ओर से तलाश तथा बचाव के प्रयास शुरू किए गए। दुर्गम रास्ते और प्रतिकूल मौसम ने राहत दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 
जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक 30 अक्टूबर को दल से फोन पर संपर्क हुआ था। उस समय उन्होंने कच्ची ढांग के पास सुरक्षित होने की जानकारी दी और मदद मांगी। इसके बाद ट्रेकिंग एजेंसी ने पोर्टर तथा गाइड की टीम को मार्ग की स्थिति देखने और फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए भेजा। टीम ने लगभग छह किलोमीटर तक रास्ता खोलने का प्रयास किया। हालांकि आगे की कठिन परिस्थितियों के कारण सभी लोगों को तत्काल वापस लाना संभव नहीं हो सका। 
शनिवार 31 अक्टूबर को बचाव अभियान का दायरा बढ़ाया गया। उत्तरकाशी से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की दस सदस्यीय टीम गंगोत्री के लिए रवाना हुई। राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ के जवानों को भी अभियान में लगाया गया। वन विभाग के कर्मचारी और ट्रेकिंग एजेंसी के सदस्य राहत दलों के साथ शामिल हैं। अलग-अलग टीमों के माध्यम से फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन ने विभागों के बीच समन्वय बनाकर काम करने और बचाव में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। 
बचाव अभियान के दौरान कच्ची ढांग के आसपास तीन पोर्टर और एक कुक सुरक्षित मिले। इन चार लोगों को बाहर निकाले जाने से राहत मिली है। गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों के अनुसार बाकी आठ लोग भोजखड़क से आगे हिमस्खलन प्रभावित हिस्से में फंसे हुए हैं। रास्ते पर बर्फ और अवरोध होने के कारण बचाव दलों की प्रगति धीमी है। प्रशासन का ध्यान शेष सदस्यों तक सुरक्षित पहुंचने पर है। पहले निकाले गए चार लोग दल के सहयोगी कर्मचारी हैं जबकि बचाव का इंतजार कर रहे लोगों में ट्रेकर्स और गाइड शामिल हैं। 
गंगोत्री नेशनल पार्क के रेंज अधिकारी प्रदीप बिष्ट के हवाले से बताया गया है कि फंसे लोगों में एक व्यक्ति के सिर पर चोट आई है। उसकी चोट की गंभीरता को लेकर विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी उपलब्ध नहीं है। आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार हवाई खोज के दौरान समूह के सुरक्षित स्थान पर होने की जानकारी मिली है। हालांकि सुरक्षित स्थान पर रुकना और वहां से बाहर निकल पाना अलग स्थितियां हैं। मार्ग बाधित रहने के कारण समूह को बचाव दलों की सहायता की जरूरत बनी हुई है। 
फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को इसके लिए पत्र भेजा है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के मुताबिक मौसम ठीक रहने पर हवाई बचाव का प्रयास किया जाएगा। उड़ान के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं हुईं तो जमीनी टीमों के माध्यम से अभियान आगे बढ़ाया जाएगा। इस वजह से रविवार का बचाव कार्य मौसम की स्थिति पर निर्भर रहेगा। फिलहाल हेलीकॉप्टर से सभी को निकाल लिए जाने की पुष्टि सामने नहीं आई है। 
दल की शुरुआती संख्या को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में अंतर है। कुछ रिपोर्टों में सात ट्रेकर्स और छह सहयोगी कर्मचारियों सहित 13 लोगों के रवाना होने तथा एक कुक के पहले लौट आने की जानकारी है। दूसरी रिपोर्टों में ट्रेक पर मौजूद दल की संख्या 12 बताई गई है। हालांकि चार सहयोगी कर्मचारियों को सुरक्षित निकाले जाने और सात ट्रेकर्स व एक गाइड सहित आठ लोगों के फंसे होने की जानकारी प्रमुख रिपोर्टों में समान है। इसी आधार पर बचाव अभियान की वर्तमान स्थिति स्पष्ट होती है। 
केदारताल मार्ग पर फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बर्फ से बाधित हिस्से को पार करना और सभी सदस्यों को सुरक्षित वापस लाना है। प्रशासन की ओर से घायल व्यक्ति को उपचार दिलाने की व्यवस्था करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। रविवार सुबह तक की जानकारी में अभियान जारी था। आगे की स्थिति मौसम, हेलीकॉप्टर की उपलब्धता और जमीनी टीमों की पहुंच से स्पष्ट होगी। शेष आठ लोगों की सुरक्षित निकासी की पुष्टि होने तक राहत दलों के प्रयास जारी रखने की तैयारी है।
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