देहरादून: उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने पहाड़ से लेकर मैदान तक जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क धंसने और नदियों के उफान जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। कहीं पहाड़ दरकने से मलबा सड़कों और बस्तियों की ओर पहुंच रहा है तो कहीं नदियां किनारों की जमीन का कटाव कर रही हैं। लगातार बिगड़ते हालात के बीच बारिश से आई आपदा में प्रदेश को अब तक करीब 215 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
हरिद्वार में बुधवार को मनसा देवी क्षेत्र में पहाड़ी से मलबा दरकने की घटना से हड़कंप मच गया। बारिश के बीच पहाड़ी से अचानक मलबा नीचे की ओर आने लगा। घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में जमीन के कमजोर होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
प्रदेश के पर्वतीय जिलों में बारिश का असर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर पहाड़ों से पत्थर और मलबा गिरने के कारण सड़कें बाधित हो रही हैं। लगातार बारिश के कारण कई जगह सड़कें धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क भी प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील मार्गों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है और मलबा हटाने के लिए संबंधित विभागों को सक्रिय रखा गया है।
बारिश के कारण नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर भी बढ़ रहा है। कई क्षेत्रों में नदियों के किनारों पर कटाव तेज हो गया है। हरिद्वार समेत मैदानी क्षेत्रों में भी लगातार बारिश के कारण जलभराव और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। पहाड़ों से आने वाले पानी का असर मैदानी इलाकों में भी दिखाई देता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की जा रही है।
215 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान
मानसून के दौरान प्रदेश में बारिश और इससे जुड़ी आपदाओं के कारण अब तक करीब 215 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें सड़क, पुल, सिंचाई, पेयजल, कृषि और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों को हुए नुकसान के साथ स्थानीय स्तर पर हुए नुकसान को भी शामिल किया जा रहा है। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त होने और भूस्खलन के कारण आवाजाही प्रभावित हुई है।
बारिश से कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ रहा है। नदियों के कटाव के कारण खेतों की जमीन प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन से ग्रामीणों के रास्ते और संपर्क मार्ग बाधित होने का खतरा बना हुआ है। लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर लोगों को अपने दैनिक कामकाज में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन संभावित स्थानों और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव वाले इलाकों पर नजर रखी जा रही है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद स्थानीय प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। भारी बारिश की स्थिति में नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों के साथ-साथ यात्रियों को भी अनावश्यक जोखिम न लेने की सलाह दी जा रही है।
संवेदनशील इलाकों में बढ़ी चिंता
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए भारी बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क धंसने का खतरा बढ़ जाता है। पहाड़ों में लगातार बारिश होने पर चट्टानों और मिट्टी के कमजोर होने से अचानक मलबा गिर सकता है। यही वजह है कि बारिश के दौरान पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
मनसा देवी क्षेत्र में मलबा दरकने की घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी लोगों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से संवेदनशील स्थानों पर नजर रखी जा रही है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और नदी-नालों के आसपास जाने से बचें।
आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट
लगातार बारिश और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड पर है। किसी भी स्थान पर सड़क बाधित होने या मलबा आने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द हटाने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ जरूरी सेवाओं और संपर्क मार्गों को सुचारु बनाए रखना है।
फिलहाल बारिश का दौर जारी है और आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है। 215 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान के बीच यदि भारी बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो नुकसान और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बारिश से प्रभावित बुनियादी ढांचे को जल्द बहाल करने की है