देहरादून। उत्तराखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने दिनेश आर्य को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। रविवार को भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने उनके नाम पर मुहर लगाई। नैनीताल से आने वाले आर्य लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय हैं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष हैं और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त है।

दिनेश आर्य का नाम सामने आने के बाद उत्तराखंड भाजपा की राजनीति में इसकी काफी चर्चा हो रही है। इसकी एक वजह यह है कि राज्यसभा टिकट के लिए प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम राजनीतिक चर्चाओं में थे, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने आर्य को उम्मीदवार बनाकर चौंका दिया। कुछ रिपोर्टों में उनके चयन को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पसंद को केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक घोषणा में उम्मीदवार चयन के पीछे ऐसा कोई कारण नहीं बताया है।

दिनेश आर्य और मुख्यमंत्री धामी के बीच पुराना कार्य संबंध रहा है। आर्य वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वह नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष और पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव जैसे पदों पर भी काम कर चुके हैं। वर्तमान में सरकार में दायित्वधारी होने के कारण वह संगठन के साथ सरकार की जिम्मेदारी में भी सक्रिय हैं।

उनका राजनीतिक सफर लंबे समय का है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और करीब चार दशक से संगठन से जुड़े रहे हैं। जिला स्तर से आगे बढ़ते हुए उन्होंने भाजपा संगठन में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियां भी संभाली हैं।

आर्य वर्ष 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान भी चर्चा में आए थे। उन्होंने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नैनीताल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा टिकट की दावेदारी की थी। उस समय पार्टी ने सरिता आर्य को प्रत्याशी बनाया था। टिकट नहीं मिलने के बाद दिनेश आर्य के निर्दलीय चुनाव लड़ने की चर्चा हुई और उन्होंने नामांकन पत्र भी लिया, लेकिन अंततः उन्होंने पार्टी छोड़कर अलग रास्ता नहीं अपनाया। चार साल बाद भाजपा ने उन्हें सीधे राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है।

राज्यसभा प्रत्याशी के रूप में उनका चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले पार्टी के कई फैसलों को मुख्यमंत्री धामी की संगठनात्मक स्थिति से जोड़कर देखा गया है। दिनेश आर्य के चयन को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषण में यही चर्चा है कि मुख्यमंत्री के साथ लंबे समय तक काम कर चुके नेता को केंद्रीय नेतृत्व ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना है। इसे धामी की भूमिका मजबूत होने के संकेत के तौर पर कुछ रिपोर्टों ने पेश किया है, हालांकि यह राजनीतिक विश्लेषण है, पार्टी का आधिकारिक निष्कर्ष नहीं।

उत्तराखंड भाजपा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सरकार और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले हुए हैं। इन्हीं में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने जैसे फैसलों को भी मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल से जोड़कर देखा गया। अब राज्यसभा के लिए आर्य की उम्मीदवारी ने इस चर्चा को एक बार फिर तेज कर दिया है।

आर्य के चयन का एक सामाजिक पहलू भी है। वह अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और पार्टी के एससी मोर्चा में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसलिए उनके नामांकन को भाजपा की दलित प्रतिनिधित्व की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ भाजपा नेताओं ने उनके चयन को अनुसूचित जाति समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के संदेश के रूप में पेश किया है।

दिनेश आर्य की उम्मीदवारी ऐसे समय घोषित हुई है, जब उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां तैयार करने लगे हैं। इस कारण राज्यसभा प्रत्याशी का चयन केवल संसद के उच्च सदन तक सीमित राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा। उम्मीदवार की सामाजिक पृष्ठभूमि, संगठनात्मक अनुभव और मुख्यमंत्री से पुराने संबंधों को लेकर भी राजनीतिक चर्चा हो रही है।

उत्तराखंड से खाली होने वाली राज्यसभा सीट के लिए मतदान 16 अक्टूबर को निर्धारित है। यह सीट मौजूदा राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख छह अक्टूबर है।

उत्तराखंड विधानसभा में भाजपा की संख्या को देखते हुए पार्टी के उम्मीदवार की स्थिति मजबूत है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी होगी। उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

दिनेश आर्य की उम्मीदवारी ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि उनका नाम पहले से राज्यसभा टिकट के प्रमुख दावेदारों की सार्वजनिक चर्चाओं में सबसे आगे नहीं था। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की घोषणा के बाद प्रदेश भाजपा के कई नेताओं के लिए भी उनका नाम अप्रत्याशित बताया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उम्मीदवार घोषित होने के बाद दिनेश आर्य से मुलाकात की। दोनों की मुलाकात की तस्वीर भी सामने आई। आर्य के मुख्यमंत्री के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी होने के कारण इस मुलाकात और उनकी उम्मीदवारी को प्रदेश की राजनीति में विशेष रूप से देखा जा रहा है।

फिलहाल भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने दिनेश आर्य के नाम पर औपचारिक मुहर लगा दी है। उनके चयन को लेकर मुख्यमंत्री धामी के प्रभाव, संगठन के पुराने कार्यकर्ता को अवसर और अनुसूचित जाति प्रतिनिधित्व—इन तीनों पहलुओं पर राजनीतिक चर्चा चल रही है। पार्टी की आधिकारिक घोषणा में हालांकि केवल उनकी उम्मीदवारी की पुष्टि की गई है। अब छह अक्टूबर तक नामांकन प्रक्रिया और इसके बाद 16 अक्टूबर को निर्धारित राज्यसभा चुनाव पर नजर रहेगी।

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