मंदाकिनी में कचरे का संकट एसटीपी व्यवस्था पर उठे सवाल
पवित्र मंदाकिनी में गंदगी का मामला सिस्टम पर सवाल
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड की पवित्र मंदाकिनी नदी में गंदगी और कचरा डाले जाने का मामला सामने आने के बाद अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। केदारघाटी और रुद्रप्रयाग क्षेत्र में नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए किए जा रहे दावों के बीच स्थानीय स्तर पर गंदे पानी और कचरे के सीधे नदी में जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
मंदाकिनी नदी को क्षेत्र की आस्था और जीवनरेखा माना जाता है। केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग से जुड़ी इस नदी में बढ़ता प्रदूषण पर्यावरण के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा मुद्दा बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगहों पर सीवेज और कचरे के निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने से गंदा पानी नदी तक पहुंच रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, सोनप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण यात्रा पड़ावों पर एसटीपी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर बिना पर्याप्त उपचार के गंदा पानी मंदाकिनी में पहुंच रहा है, जिससे नदी की स्वच्छता प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ कचरा प्रबंधन और सीवेज निस्तारण की चुनौती भी बढ़ जाती है। ऐसे में स्थायी और प्रभावी व्यवस्था नहीं होने पर नदी के प्रदूषित होने का खतरा बना रहता है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर नदी की सफाई और प्लास्टिक कचरे पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल सफाई अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सीवेज प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए छोटे-छोटे ट्रीटमेंट प्लांट, कचरा संग्रहण केंद्र और नियमित निगरानी की जरूरत होती है। खासतौर पर तीर्थ क्षेत्रों में सीवेज प्रबंधन को प्राथमिकता देना जरूरी है। मंदाकिनी नदी में कचरा जाने की शिकायतों के बाद अब एसटीपी की कार्यप्रणाली और सीवेज व्यवस्था की जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में नदी की प्राकृतिक सुंदरता और जल गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मंदाकिनी नदी की पवित्रता बनाए रखने के साथ-साथ बढ़ते पर्यटन दबाव को संभालने की है। नदी संरक्षण के लिए प्रभावी योजना और उसका सख्ती से पालन ही इस समस्या का स्थायी समाधान माना जा रहा है।