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दिल्ली-एनसीआर
आठ राज्यों में डीएम को मिला नागरिकता देने का अधिकार नियम हुए सख्त
nidhi
21 Aug 2026 6:42 AM IST

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CAA के तहत नागरिकता प्रक्रिया बदली डीएम को मिली बड़ी शक्ति
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने नागरिकता देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिलाधिकारियों (डीएम) को पात्र आवेदकों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया गया है। गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियमों में संशोधन करते हुए यह व्यवस्था लागू की है।
नए नियमों के तहत गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जिलाधिकारी नागरिकता से जुड़े आवेदनों पर फैसला कर सकेंगे। इससे पहले यह अधिकार अधिकार प्राप्त समितियों और जिला स्तरीय समितियों के पास था। अब इन समितियों के पास लंबित मामलों को संबंधित जिलाधिकारियों को भेजा जाएगा।
गृह मंत्रालय के इस फैसले का उद्देश्य नागरिकता आवेदन प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना बताया जा रहा है। जिलाधिकारी अब आवेदन प्राप्त करने, दस्तावेजों की जांच करने, पात्रता का सत्यापन करने और जरूरी जांच के बाद नागरिकता देने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
हालांकि नए नियमों में आवेदकों के लिए कई सख्त प्रावधान भी रखे गए हैं। नागरिकता पाने वाले व्यक्ति को दस्तावेजों की जांच के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी पहचान और पात्रता साबित करनी होगी। इसके अलावा भारत के प्रति निष्ठा की शपथ लेना भी अनिवार्य होगा। अधिकारियों के अनुसार, केवल ऑनलाइन आवेदन कर देने से नागरिकता नहीं मिलेगी। आवेदनकर्ता की पृष्ठभूमि, दस्तावेजों और अन्य जरूरी जानकारियों की विस्तृत जांच की जाएगी। किसी भी तरह की कमी या संदेह पाए जाने पर आवेदन पर आगे की कार्रवाई रोकी जा सकती है।
यह बदलाव खास तौर पर उन सीमावर्ती राज्यों में लागू किया गया है जहां दूसरे देशों से आए लोगों के नागरिकता संबंधी मामले लंबे समय से लंबित हैं। सरकार का मानना है कि जिला स्तर पर अधिकार मिलने से प्रक्रिया अधिक प्रभावी तरीके से पूरी हो सकेगी। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से जुड़े मामलों में भी यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत पात्र आवेदकों को स्थानीय स्तर पर आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा मिलेगी। हालांकि नियमों के अनुसार पात्रता और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिलाधिकारियों को अधिकार मिलने से प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने की गति बढ़ सकती है, लेकिन साथ ही दस्तावेजों की जांच और सुरक्षा पहलुओं को लेकर जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद अब इन आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नागरिकता से जुड़े मामलों का निपटारा जिला प्रशासन के स्तर पर किया जाएगा। आने वाले समय में यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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