नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर छात्रसंघ चुनाव में इस बार अध्यक्ष पद की जीत से ज्यादा चर्चा एक मां की भूमिका को लेकर रही। हल्द्वानी नगर निगम की पार्षद बीना चौहान ने अपने बेटे भानु प्रताप सिंह चौहान के चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए खुद डीएसबी परिसर में एमए राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया। मंगलवार को घोषित चुनाव परिणाम में निर्दलीय उम्मीदवार भानु प्रताप सिंह चौहान ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
भानु प्रताप को कुल 1,355 वोट मिले। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद समर्थित उम्मीदवार शुभम कुमार को 873 वोट मिले। इस तरह भानु ने 482 मतों के अंतर से जीत हासिल की। अध्यक्ष पद के तीसरे उम्मीदवार हिमांशु आर्या को 283 वोट मिले।
इस चुनाव में बीना चौहान की भूमिका शुरुआत से ही चर्चा में रही। वह हल्द्वानी नगर निगम की पार्षद हैं, लेकिन बेटे के छात्रसंघ चुनाव में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के लिए उन्होंने स्वयं भी छात्रा के रूप में दाखिला ले लिया। उन्होंने डीएसबी परिसर में राजनीति विज्ञान से एमए में प्रवेश लिया और चुनाव प्रचार के दौरान छात्रों से संपर्क कर बेटे के लिए समर्थन मांगा।
चुनावी प्रचार के दौरान बीना चौहान परिसर में लगातार सक्रिय रहीं। उन्होंने छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और सोशल मीडिया के माध्यम से भी समर्थन जुटाया। चुनावी रणनीति तैयार करने से लेकर छात्रों तक अपनी बात पहुंचाने तक वह बेटे के साथ नजर आईं। उनकी सक्रियता के कारण यह चुनाव सामान्य छात्रसंघ मुकाबले से अलग चर्चा का विषय बन गया।
भानु प्रताप सिंह चौहान ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया था। अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला तीन उम्मीदवारों के बीच था। मतदान के बाद जब मतगणना शुरू हुई तो शुरुआत से ही अध्यक्ष पद पर मुकाबले को लेकर उत्सुकता बनी रही। परिणाम घोषित होने पर भानु ने स्पष्ट अंतर से जीत दर्ज की।
डीएसबी परिसर में कुल 5,410 छात्र-छात्राओं में से 2,535 ने मतदान किया। मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक चला। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना की गई और परिणाम घोषित किए गए।
परिणाम सामने आने के बाद समर्थकों ने परिसर में जश्न मनाया। भानु प्रताप को जीत का प्रमाणपत्र दिया गया। इस दौरान उनकी मां बीना चौहान भी मौजूद थीं। बेटे की जीत के बाद वह भावुक हो गईं और उन्हें गले लगाया। उन्होंने कहा कि इस जीत ने उन लोगों को जवाब दिया है जो उनके बेटे को बाहरी उम्मीदवार बता रहे थे।
भानु प्रताप ने जीत के बाद कहा कि उनका लक्ष्य अब चुनाव प्रचार के दौरान छात्रों से किए गए वादों को पूरा करना है। उन्होंने परिसर में फ्री वाई-फाई, लाइब्रेरी में पर्याप्त किताबों की उपलब्धता और पानी की समस्या के समाधान जैसे मुद्दे उठाए थे।
छात्रसंघ चुनाव में अन्य पदों के नतीजे भी घोषित किए गए। संयुक्त सचिव पद पर अनुष्का पुरी ने 1,614 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी गौरी को 619 वोट मिले। कोषाध्यक्ष पद पर मुकाबला बेहद करीबी रहा। सृष्टि रावत ने 1,165 वोट हासिल किए, जबकि विदुषी वर्मा को 1,147 वोट मिले। दोनों के बीच केवल 18 मतों का अंतर रहा।
महासचिव पद पर कमल कार्की, छात्र उपाध्यक्ष पद पर अभिषेक रैकुनी, छात्रा उपाध्यक्ष पद पर कुमकुम जोशी और सांस्कृतिक सचिव पद पर हर्षित जोशी निर्विरोध निर्वाचित हुए। विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के पद पर तन्मय भंडारी भी निर्विरोध चुने गए।
भानु प्रताप की जीत इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और एबीवीपी समर्थित उम्मीदवार को हराया। राज्य के अन्य कॉलेजों और परिसरों में छात्रसंघ चुनाव के परिणाम अलग-अलग रहे और कई जगह एबीवीपी ने भी महत्वपूर्ण पदों पर जीत दर्ज की। इसलिए डीएसबी परिसर का यह परिणाम स्थानीय स्तर पर अलग राजनीतिक तस्वीर पेश करता है।
हालांकि इस चुनाव की सबसे अलग कहानी बीना चौहान की रही। आमतौर पर छात्रसंघ चुनाव में उम्मीदवारों के परिवार पर्दे के पीछे समर्थन करते हैं, लेकिन यहां एक मां ने स्वयं छात्रा बनकर चुनावी माहौल का हिस्सा बनने का रास्ता चुना।
करीब 60 वर्ष की उम्र में एमए राजनीति विज्ञान में दाखिला लेने वाली बीना चौहान ने बेटे के प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके कैंपस पहुंचने, छात्रों से संपर्क करने और चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।
परिणाम घोषित होने के बाद भानु प्रताप ने छात्रों के समर्थन के लिए आभार जताया और कहा कि अब जिम्मेदारी चुनाव जीतने से आगे बढ़कर छात्रों की समस्याओं को हल करने की है। उन्होंने चुनाव के दौरान उठाए गए मुद्दों पर काम करने का भरोसा दिलाया।
डीएसबी परिसर के इस छात्रसंघ चुनाव ने जहां नए पदाधिकारियों को चुना, वहीं मां-बेटे की चुनावी भागीदारी ने इसे खास बना दिया। बीना चौहान का खुद कॉलेज में दाखिला लेना और बेटे के प्रचार में सक्रिय होना इस चुनाव की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल रहा।
अंततः भानु प्रताप सिंह चौहान ने 1,355 वोट हासिल कर अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की और 482 मतों के अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शुभम कुमार को पीछे छोड़ा। अब उनकी अगली परीक्षा चुनाव प्रचार के दौरान छात्रों से किए गए वादों और परिसर से जुड़े मुद्दों पर काम करने की होगी।