देहरादून। उत्तराखंड के युवाओं को पढ़ाई के साथ रोजगारपरक और आधुनिक तकनीकी कौशल से जोड़ने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। रविवार को चंपावत जिले के बनबसा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया। इनमें सबसे प्रमुख मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 है। इस योजना के तहत राज्य के करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डिजिटल मार्केटिंग जैसे आधुनिक विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। योजना पर अगले पांच वर्षों में करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के लिए जरूरी कौशल उपलब्ध कराना है। योजना का लाभ सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के साथ उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा। सरकार का मानना है कि बदलते रोजगार बाजार में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही नए क्षेत्रों का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है।

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना के पहले वर्ष में करीब 59,500 विद्यार्थियों को शामिल करने की तैयारी है। यह कुल लक्षित विद्यार्थियों का लगभग 50 प्रतिशत है। एक विद्यार्थी एक वर्ष में छह पाठ्यक्रम पूरा कर सकेगा। प्रशिक्षण ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।

कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के साथ वेब डेवलपमेंट, ड्रोन टेक्नोलॉजी, जीआईएस मैपिंग, डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांड डेवलपमेंट जैसे विषय शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा बैंकिंग, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, इको-टूरिज्म, उद्यमिता, सोलर पैनल मेंटेनेंस और वर्कप्लेस इंग्लिश जैसे रोजगारपरक विषय भी प्रशिक्षण का हिस्सा होंगे।

कैबिनेट बैठक में युवाओं के कौशल विकास के साथ सौर ऊर्जा और स्वरोजगार को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला हुआ। सरकार ने मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना को कुछ संशोधनों के साथ आगे बढ़ाने पर सहमति दी है। इसके तहत पर्वतीय क्षेत्रों की खाली और बंजर जमीन का इस्तेमाल सोलर प्लांट लगाने में किया जा सकेगा। योजना में उन पर्वतीय जिलों को अतिरिक्त अवसर देने की तैयारी है, जहां पहले चरण में अपेक्षाकृत कम सोलर प्लांट लगे थे।

सौर स्वरोजगार योजना के पहले चरण में राज्य में कुल 1,132 सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें टिहरी में 369, उत्तरकाशी में 227, चंपावत में 144 और पौड़ी में 88 प्लांट शामिल हैं। पहले चरण में करीब 3,500 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की जानकारी दी गई है। अब चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में भी योजना का विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा है।

जमीन से संबंधित एक महत्वपूर्ण फैसले में कैबिनेट ने वर्ग तीन और वर्ग चार की जमीन के पट्टेदारों को भूमिधरी अधिकार देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसमें लालकुआं नगर पंचायत क्षेत्र और जौनसार-बावर से संबंधित जमीनों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। सरकार के इस निर्णय से लंबे समय से भूमि अधिकार की मांग कर रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी है। नए प्रावधान के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र की आवश्यकता होगी, जबकि मैदानी क्षेत्रों में यह सीमा 20 हजार वर्गमीटर होगी। सरकार का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना को आसान बनाना है।

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और डेमोंस्ट्रेटर के वेतन में बढ़ोतरी से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। इसके अलावा नरेंद्रनगर में सब रजिस्ट्रार कार्यालय स्थापित करने और समूह 'ग' के पदों से संबंधित साक्षात्कार प्रक्रिया की नियमावली पर भी निर्णय लिया गया।

सरकारी कर्मचारियों से संबंधित नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले पांच हजार रुपये से अधिक की कुछ खरीद को लेकर निर्धारित सूचना संबंधी प्रावधान में संशोधन किया गया है। अब निर्धारित कटौतियों के बाद दो महीने के कुल वेतन से अधिक की एकमुश्त खरीद होने पर संबंधित नियम लागू होंगे। इसके साथ कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी के प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है।

कैबिनेट ने उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक-2026 को भी स्वीकृति दी। इसमें एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत तक रखने का प्रावधान किया गया है। इसी अवधि के लिए कुल बकाया ऋण की सीमा जीएसडीपी के 30 प्रतिशत तक निर्धारित करने का प्रस्ताव है।

वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई यानी पीएमयू के गठन को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य वन भूमि से जुड़े प्रस्तावों के तकनीकी परीक्षण और प्रक्रिया में तेजी लाना है। इसके अलावा कुक्कुट आहार सब्सिडी का भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में करने का फैसला भी लिया गया।

बैठक में पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विस्तार से संबंधित कार्यों के लिए भी धनराशि जारी करने को मंजूरी दी गई। इसके तहत उत्तराखंड सिडकुल और तराई विकास निगम से जुड़ी हस्तांतरित परिसंपत्तियों के लिए 66.29 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

धामी कैबिनेट के इन फैसलों में उच्च शिक्षा, रोजगार, सौर ऊर्जा, भूमि अधिकार, चिकित्सा शिक्षा, सरकारी कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है। इनमें 200 करोड़ रुपये की मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना सीधे तौर पर करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों से जुड़ी है। सरकार अब इसके जरिए कॉलेज और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ आधुनिक तकनीकी कौशल देकर रोजगार और उद्यमिता के लिए तैयार करने की योजना पर आगे बढ़ेगी।

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