लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नजूल संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और सरकारी जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए बड़े स्तर पर नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा। योगी सरकार ने नजूल भूमि और संपत्तियों का सत्यापन कर उनका अद्यतन रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस कवायद के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि नजूल संपत्तियां कहां-कहां स्थित हैं, उनका वर्तमान उपयोग क्या है और उन पर किसी तरह का अवैध कब्जा या रिकॉर्ड संबंधी विवाद तो नहीं है। नजूल भूमि से जुड़े मामलों में लंबे समय से रिकॉर्ड की स्थिति, पट्टे, कब्जे और उपयोग को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में नए सर्वे के जरिए सरकार के पास उपलब्ध पुराने अभिलेखों का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान किया जाएगा। इससे सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने और विवादों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जिलों में खंगाला जाएगा नजूल भूमि का रिकॉर्ड
सर्वे के दौरान जिलों में मौजूद नजूल संपत्तियों का पूरा ब्योरा जुटाया जाएगा। संबंधित विभाग पुराने राजस्व अभिलेख, पट्टों और अन्य दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं। इसके साथ मौके पर जाकर संपत्ति की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल यह जानना नहीं होगा कि सरकारी रिकॉर्ड में कितनी नजूल भूमि दर्ज है बल्कि यह भी देखा जाएगा कि वर्तमान समय में उस जमीन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। कई स्थानों पर दशकों पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति में अंतर होने की संभावना रहती है। सर्वे से ऐसी विसंगतियों को चिह्नित करने में मदद मिलेगी।
अवैध कब्जों की भी हो सकती है पहचान
नए सर्वे का एक महत्वपूर्ण पहलू नजूल संपत्तियों पर संभावित अवैध कब्जों की पहचान करना भी होगा। यदि किसी सरकारी संपत्ति पर नियमों के विपरीत कब्जा या निर्माण पाया जाता है तो उसकी जानकारी अलग से दर्ज की जा सकती है। हालांकि किसी कब्जे को अवैध घोषित करने या कार्रवाई करने से पहले संबंधित दस्तावेजों, पट्टे और अदालत में लंबित मामलों की स्थिति को देखना जरूरी होगा। सर्वे अपने आप में किसी व्यक्ति को बेदखल करने की कार्रवाई नहीं है बल्कि संपत्ति की स्थिति और रिकॉर्ड को स्पष्ट करने की प्रशासनिक प्रक्रिया है।
क्या होती है नजूल भूमि?
नजूल भूमि सामान्य तौर पर ऐसी सरकारी भूमि को कहा जाता है जिसका स्वामित्व सरकार के पास होता है और जिसे अलग-अलग समय पर पट्टे या अन्य निर्धारित व्यवस्था के तहत विभिन्न उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई होती है। उत्तर प्रदेश के कई पुराने शहरों में नजूल भूमि मौजूद है। इनमें आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत उपयोग वाली संपत्तियां भी हो सकती हैं। कई पट्टे काफी पुराने हैं, जिसके कारण उनके नवीनीकरण और हस्तांतरण से जुड़े विवाद भी सामने आते रहे हैं।
पुराने पट्टों की स्थिति होगी महत्वपूर्ण
सर्वे के दौरान नजूल भूमि पर दिए गए पुराने पट्टों की वर्तमान स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। यह देखा जा सकता है कि पट्टे की अवधि समाप्त हो चुकी है या वह अभी वैध है। साथ ही जमीन का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए हो रहा है या नहीं जिसके लिए उसे दिया गया था।
यदि किसी संपत्ति का हस्तांतरण हुआ है तो उससे जुड़े दस्तावेजों का भी परीक्षण किया जा सकता है। इससे भविष्य में नजूल संपत्तियों से जुड़े फैसले लेने के लिए सरकार के पास अधिक स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।
डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर जोर
सरकारी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने के लिए डिजिटलीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सर्वे के दौरान जुटाई गई जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने पर संपत्तियों की निगरानी आसान हो सकती है। भूमि का क्षेत्रफल, स्थान, वर्तमान उपयोग और पट्टे से जुड़ी जानकारी एक जगह उपलब्ध होने से विभागों के बीच रिकॉर्ड संबंधी अंतर भी कम किया जा सकता है।
सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर फोकस
प्रदेश में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और रिकॉर्ड में गड़बड़ी के मामलों को देखते हुए सरकार पहले से विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई करती रही है। नजूल संपत्तियों का नया सर्वे इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर सरकार के लिए यह तय करना आसान होगा कि किस जमीन का इस्तेमाल सार्वजनिक परियोजनाओं में किया जा सकता है और किन संपत्तियों पर कानूनी या प्रशासनिक विवाद मौजूद हैं।
आम लोगों के लिए भी अहम होगा सर्वे
नजूल संपत्तियों पर वर्षों से रह रहे या व्यवसाय कर रहे लोगों के लिए भी यह सर्वे महत्वपूर्ण हो सकता है। जिन लोगों के पास वैध पट्टे या दूसरे दस्तावेज हैं उनके रिकॉर्ड का सरकारी अभिलेखों से मिलान किया जा सकेगा।
वहीं किसी रिकॉर्ड में गलती मिलने पर उसे नियमानुसार सुधारने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सत्यापन के दौरान वैध दस्तावेज रखने वाले लोगों के अधिकार प्रभावित न हों।
सर्वे के बाद साफ होगी वास्तविक तस्वीर
नजूल संपत्तियों का नए सिरे से सर्वे पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश में ऐसी जमीन की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। इससे पता चल सकेगा कि कितनी संपत्तियां सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं, उनका वर्तमान उपयोग क्या है और कहां रिकॉर्ड या कब्जे से जुड़े विवाद मौजूद हैं। योगी सरकार की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य नजूल संपत्तियों का व्यवस्थित और अद्यतन रिकॉर्ड तैयार करना माना जा रहा है। सर्वे की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार इन संपत्तियों के प्रबंधन, पट्टों और संभावित अतिक्रमण के संबंध में आगे क्या कदम उठाती है।
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