कुशीनगर: फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का प्रयास करने के मामले में पश्चिम बंगाल के कोलकाता निवासी एक महिला को उसके सहयोगी के साथ पकड़ा गया है। जांच में सामने आया है कि महिला पिछले करीब 15 वर्षों से उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के कप्तानगंज क्षेत्र में रह रही थी और उसने यहां का निवासी प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और राशन कार्ड भी बनवा लिया था।
जानकारी के अनुसार, महिला की पहचान प्रिया गुप्ता के रूप में हुई है। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के कोलकाता की रहने वाली बताई जा रही है। आरोप है कि उसने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की।
पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच में कुछ गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को संदेह हुआ। जांच आगे बढ़ने पर प्रमाण पत्रों की सत्यता पर सवाल खड़े हुए और पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रिया गुप्ता और उसके एक सहयोगी को हिरासत में लिया। दोनों से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रिया गुप्ता लंबे समय से कुशीनगर के कप्तानगंज क्षेत्र में रह रही थी। करीब 15 वर्षों के दौरान उसने स्थानीय स्तर पर कई सरकारी दस्तावेज बनवा लिए थे।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि महिला ने किस आधार पर निवासी प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और राशन कार्ड हासिल किए। इसके लिए संबंधित विभागों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी दस्तावेज बनवाने के लिए सही जानकारी और वैध प्रमाण पत्र देना जरूरी होता है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान स्थापित करना कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है।
पुलिस जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पासपोर्ट बनवाने के पीछे महिला का उद्देश्य क्या था। इसके अलावा उसके पुराने रिकॉर्ड और अन्य गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे सरकारी सुविधाओं और पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर मामला माना जाता है। ऐसे मामलों में एजेंसियां दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करती हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, महिला काफी समय से कप्तानगंज क्षेत्र में रह रही थी। हालांकि, दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद अब मामले की जांच शुरू हो गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि फर्जी प्रमाण पत्र किस तरह तैयार किए गए और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।
जांच एजेंसियां महिला के संपर्कों और दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही हैं। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के मामलों में लापरवाही बरतने वालों पर भी नजर रखी जाएगी।
फिलहाल पुलिस ने महिला और उसके सहयोगी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।