बस्ती : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में थानेदार सूर्यप्रकाश सिंह की मौत ने पुलिस विभाग से लेकर आम लोगों तक को झकझोर दिया है। वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्यप्रकाश सिंह ने सरकारी आवास में फांसी लगाकर जान दे दी। उनकी मौत के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके मोबाइल पर लगाए गए आखिरी स्टेटस की हो रही है। उन्होंने लिखा था- **"धन-संपदा भी आवश्यक है, परंतु शांति और प्रेम से बढ़कर नहीं।
थानेदार के इस आखिरी संदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह स्टेटस उनके मन में चल रही किसी परेशानी का संकेत था? क्या वह किसी मानसिक दबाव से गुजर रहे थे? फिलहाल पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि अभी तक आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
सरकारी आवास में मिला शव
बस्ती के वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्यप्रकाश सिंह शनिवार को अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए। जानकारी के मुताबिक, वह दोपहर में अपने हमराहियों के साथ शहर पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने अपने साथ मौजूद पुलिसकर्मियों को एक जगह रुकने के लिए कहा और खुद सरकारी आवास चले गए।
काफी देर तक जब उन्होंने फोन नहीं उठाया तो साथी पुलिसकर्मियों को चिंता हुई। आवास पर पहुंचने के बाद दरवाजा अंदर से बंद मिला। दरवाजा खोलने के बाद अंदर का दृश्य देखकर पुलिसकर्मी स्तब्ध रह गए।
मौके पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने भी जांच की। अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। फिलहाल पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है।
आखिरी स्टेटस ने बढ़ाई चर्चा
सूर्यप्रकाश सिंह के निधन के बाद उनके मोबाइल पर लगाए गए आखिरी स्टेटस की काफी चर्चा हो रही है। उन्होंने लिखा था कि **धन-संपदा जरूरी है, लेकिन शांति और प्रेम उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
इस संदेश को लोग अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह उनके मन की स्थिति को दर्शाता हो सकता है, जबकि पुलिस का कहना है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी करना जरूरी है।
किसी भी व्यक्ति के अंतिम संदेश या सोशल मीडिया पोस्ट को उसकी मनोदशा का संकेत माना जा सकता है, लेकिन इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था, यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
घटना से पहले सामान्य दिख रहे थे सूर्यप्रकाश सिंह
सबसे हैरानी वाली बात यह है कि घटना से कुछ घंटे पहले तक सूर्यप्रकाश सिंह सामान्य रूप से अपनी ड्यूटी कर रहे थे। पुलिसकर्मियों के मुताबिक, उन्होंने सुबह थाने में स्टाफ मीटिंग भी ली थी और कर्मचारियों को दिशा-निर्देश दिए थे।
उनके व्यवहार में किसी तरह की परेशानी नजर नहीं आई थी। यही वजह है कि उनकी अचानक मौत से साथी पुलिसकर्मी और अधिकारी हैरान हैं।
1988 में पुलिस सेवा में हुए थे भर्ती
सूर्यप्रकाश सिंह लंबे समय से पुलिस विभाग में सेवाएं दे रहे थे। वह साल 1988 में पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद प्रमोशन पाकर हेड कांस्टेबल बने और साल 2016 में दरोगा पद पर पदोन्नत हुए।
अपने लंबे पुलिस करियर में उन्होंने कई जिम्मेदारियां निभाईं। बस्ती जिले में उन्हें पहली बार थाना प्रभारी की जिम्मेदारी मिली थी।
परिवार भी नहीं बता पाया वजह
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग भी बस्ती पहुंचे। हालांकि परिवार की ओर से भी आत्महत्या के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
पुलिस अब उनके हाल के दिनों की गतिविधियों, व्यक्तिगत जीवन, काम के दबाव और अन्य संभावित कारणों की जांच कर रही है।
पुलिस विभाग में शोक का माहौल
एक जिम्मेदार पद पर तैनात अधिकारी की मौत से पुलिस महकमे में शोक का माहौल है। साथी पुलिसकर्मियों का कहना है कि सूर्यप्रकाश सिंह व्यवहार से मिलनसार और जिम्मेदार अधिकारी थे।
थाने में उन्होंने जिस तरह से काम किया, उससे उनकी अलग पहचान बनी थी। उनकी अचानक मौत ने सभी को हैरान कर दिया है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सूर्यप्रकाश सिंह ने इतना बड़ा कदम उठाया। उनका आखिरी स्टेटस लोगों के बीच चर्चा का विषय जरूर बना हुआ है, लेकिन पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
मामले की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि सच्चाई सामने लाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है।