प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संत कबीर नगर जिले में तैनात सहायक अध्यापक अनिल कुमार को बड़ी राहत देते हुए उनकी बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी पिछली नियुक्ति को फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर निरस्त किया जाना अपने आप में वर्तमान सेवा से बर्खास्तगी का आधार नहीं बन सकता।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान नियुक्ति के समय अभ्यर्थी ने वास्तविक और वैध शैक्षिक प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया है, तो केवल इस आधार पर उसकी नियुक्ति समाप्त नहीं की जा सकती कि उसने अपनी पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी नहीं दी थी।
यह फैसला न्यायमूर्ति की पीठ ने अनिल कुमार की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने अपनी बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि विभाग ने बिना उचित आधार के उनकी सेवा समाप्त कर दी।
मामले के अनुसार, अनिल कुमार की एक पूर्व नियुक्ति को कथित रूप से फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर रद्द किया गया था। इसके बाद उनकी वर्तमान नियुक्ति को लेकर विभाग ने कार्रवाई शुरू की। विभाग का आरोप था कि उन्होंने पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी छिपाई थी, जिसके आधार पर उनकी वर्तमान सेवा समाप्त कर दी गई।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि वर्तमान नियुक्ति के लिए उन्होंने सभी वास्तविक और वैध प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे। उनकी वर्तमान नियुक्ति किसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर नहीं हुई थी। इसलिए पिछली नियुक्ति से जुड़े मामले को आधार बनाकर वर्तमान सेवा समाप्त करना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया, प्रस्तुत दस्तावेजों और विभागीय कार्रवाई का परीक्षण किया। कोर्ट ने कहा कि सेवा समाप्ति जैसे गंभीर कदम के लिए ठोस आधार होना जरूरी है। केवल पिछली नियुक्ति के निरस्त होने की जानकारी नहीं देने को वर्तमान नियुक्ति समाप्त करने का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि पिछली नियुक्ति रद्द होने और सेवा से बर्खास्तगी में अंतर है। यदि किसी व्यक्ति की नियुक्ति को किसी कारण से समाप्त किया गया है, तो यह जरूरी नहीं कि वह व्यक्ति भविष्य की दूसरी वैध नियुक्ति के लिए अयोग्य हो जाए।
कोर्ट ने कहा कि वर्तमान नियुक्ति में इस्तेमाल किए गए शैक्षिक प्रमाणपत्र यदि सही और मान्य हैं तो नियुक्ति को केवल पूर्व सेवा रिकॉर्ड के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता। विभाग को यह साबित करना होगा कि वर्तमान नियुक्ति में भी कोई अनियमितता या धोखाधड़ी हुई है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अनिल कुमार को राहत मिली है। अदालत ने बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए विभाग को नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षक भर्ती और सेवा मामलों में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई मामलों में कर्मचारियों की वर्तमान नियुक्ति पर पुराने मामलों के आधार पर कार्रवाई की जाती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक नियुक्ति की वैधता का मूल्यांकन उसके अपने तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए।
जानकारों के अनुसार, हाईकोर्ट के इस निर्णय से उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी वर्तमान नियुक्ति वैध दस्तावेजों के आधार पर हुई है, लेकिन पुराने सेवा मामलों के कारण उनकी नौकरी पर असर पड़ा है।
फिलहाल, संत कबीर नगर के सहायक अध्यापक अनिल कुमार की बर्खास्तगी समाप्त हो गई है। अदालत के आदेश के बाद अब विभाग को आगे की प्रक्रिया हाईकोर्ट के निर्देशों और नियमों के अनुसार पूरी करनी होगी।