लखनऊ। प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों और नए दौर के हुनरमंदों के लिए स्वरोजगार और कारोबार बढ़ाने के अवसर अब और व्यापक होंगे। शासन ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का विस्तार करते हुए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत पहले से शामिल 11 पारंपरिक ट्रेड के अलावा पांच नए पारंपरिक और नौ आधुनिक ट्रेड को भी योजना में शामिल किया गया है। इसके साथ ही अब कुल 25 ट्रेड से जुड़े कारीगर योजना का लाभ उठा सकेंगे।

प्रमुख सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम शशि भूषण लाल सुशील ने छह अगस्त को इस संबंध में शासनादेश जारी किया है। योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले स्थानीय दस्तकारों, पारंपरिक कारीगरों और हुनरमंद लोगों की आजीविका को मजबूत करना तथा उन्हें स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

बदलते समय के अनुसार बढ़ाया दायरा

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का दायरा बढ़ाने के पीछे बदलते समय और रोजगार के बदलते स्वरूप को भी ध्यान में रखा गया है। पहले योजना में मुख्य रूप से पारंपरिक हस्तशिल्प और दस्तकारी से जुड़े कारीगरों को शामिल किया गया था। अब इसमें आधुनिक दौर में मांग वाले कुछ नए ट्रेड भी जोड़े गए हैं।

सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके पास हुनर तो है, लेकिन पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण के अभाव में वे अपने काम को बड़े स्तर पर नहीं ले जा पाते। योजना के विस्तार से ऐसे कारीगरों को अपने कौशल के आधार पर स्वरोजगार शुरू करने और मौजूदा कारोबार को मजबूत करने का अवसर मिल सकेगा।

अब कुल 25 ट्रेड योजना में शामिल

योजना 2.0 के लागू होने के बाद लाभार्थी ट्रेड की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। पहले 11 पारंपरिक ट्रेड इसमें शामिल थे। अब पांच नए पारंपरिक ट्रेड और नौ आधुनिक ट्रेड जोड़ दिए गए हैं।

इस विस्तार का उद्देश्य योजना को अधिक व्यापक बनाना है, ताकि केवल परंपरागत दस्तकारी से जुड़े लोगों तक ही इसका लाभ सीमित न रहे। आधुनिक कौशल वाले युवाओं और अन्य हुनरमंदों को भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के कारीगरों को लाभ

योजना का लाभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के स्थानीय दस्तकारों और पारंपरिक कारीगरों को उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश के गांवों में पीढ़ियों से अपने पारंपरिक हुनर के माध्यम से आजीविका चलाने वाले कारीगरों के सामने अक्सर पूंजी, आधुनिक उपकरण और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां रहती हैं।

वहीं शहरों में छोटे स्तर पर काम करने वाले कारीगर भी संसाधनों की कमी से जूझते हैं। योजना के माध्यम से इन दोनों वर्गों को अपने कौशल को रोजगार और कारोबार में बदलने के लिए सहायता मिलने की उम्मीद है।

स्वरोजगार को बढ़ावा देना लक्ष्य

सरकार की योजना का प्रमुख उद्देश्य स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन करने वाले लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम और आय का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी योजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कारीगर यदि अपने पारंपरिक काम को आधुनिक तकनीक, बेहतर उपकरण और बाजार की मांग के अनुरूप आगे बढ़ाते हैं तो उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बिक्री दोनों में सुधार हो सकता है। इससे उनकी आय बढ़ने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।

पारंपरिक हुनर को संरक्षित करने की कोशिश

प्रदेश में कई ऐसे पारंपरिक व्यवसाय हैं, जिनका संचालन पीढ़ी-दर-पीढ़ी होता आया है। आधुनिक बाजार और बदलती जीवनशैली के कारण इनमें से कई पारंपरिक कामों के सामने अस्तित्व का संकट भी पैदा हुआ है।

विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के विस्तार से ऐसे पारंपरिक हुनर को संरक्षण देने का प्रयास भी किया जा रहा है। कारीगरों को अपने कौशल के साथ आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने से परंपरागत व्यवसायों को नई पहचान मिल सकती है।

आधुनिक ट्रेड जुड़ने से युवाओं को अवसर

योजना 2.0 में नौ आधुनिक ट्रेडों को शामिल किया जाना खास तौर पर युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आधुनिक कौशल से जुड़े लोग अब योजना के दायरे में आ सकेंगे और अपने हुनर को स्वरोजगार में बदलने के लिए सरकारी सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

इससे योजना का स्वरूप केवल पारंपरिक दस्तकारी तक सीमित नहीं रहेगा। आधुनिक कौशल और स्थानीय जरूरतों के बीच तालमेल बनाकर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकेंगे।

कारोबार को विस्तार देने में मिलेगी मदद

कई कारीगर लंबे समय से काम तो कर रहे हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण अपने कारोबार को विस्तार नहीं दे पाते। उनके लिए बेहतर उपकरण, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी सहायता कारोबार बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकती है।

योजना के माध्यम से कारीगरों को अपने काम की क्षमता बढ़ाने और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे छोटे स्तर के काम को व्यवस्थित स्वरोजगार और व्यवसाय में बदलने की संभावना बढ़ेगी।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ

कारीगरों की आय बढ़ने का असर केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार बढ़ने से बाजार में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। कच्चे माल की खरीद से लेकर तैयार उत्पाद की बिक्री तक कई स्तरों पर लोगों को रोजगार और आय के अवसर मिलते हैं।

इस लिहाज से योजना 2.0 को प्रदेश में छोटे कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शासनादेश के बाद लागू हुई नई व्यवस्था

प्रमुख सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम शशि भूषण लाल सुशील ने छह अगस्त को योजना 2.0 से संबंधित शासनादेश जारी किया है। इसके साथ ही योजना का विस्तार औपचारिक रूप से लागू हो गया है।

अब संबंधित विभागों और स्थानीय स्तर के अधिकारियों के सामने नई व्यवस्था के अनुसार पात्र कारीगरों तक योजना का लाभ पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी। 25 ट्रेड को शामिल किए जाने से लाभार्थियों का दायरा बढ़ेगा और अधिक लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि प्रदेश के पारंपरिक हुनर को नई पहचान मिलने के साथ आधुनिक कौशल वाले लोगों को भी अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिलेगा। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 का व्यापक उद्देश्य यही है कि कारीगरों को केवल सहायता का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर कारोबारी के रूप में विकसित किया जाए।

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