चित्रदुर्ग। कर्नाटक में कडुगोल्ला समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि केंद्र सरकार ने कडुगोल्ला समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने संबंधी कर्नाटक सरकार की सिफारिश को खारिज कर दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने नृजातीय अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रस्ताव अस्वीकार होने से प्रदेश में रहने वाले लगभग 2.5 लाख कडुगोल्ला समुदाय के लोगों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के प्रयासों को झटका लगा है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को चित्रदुर्ग जिले के हिरियूर कस्बे के नंजैयानाकोटीगे स्थित वोक्कालिगारा कम्युनिटी हॉल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कडुगोल्ला समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहा है। राज्य सरकार ने समुदाय की सामाजिक स्थिति और पारंपरिक जीवनशैली का अध्ययन कराने के बाद केंद्र सरकार से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने की सिफारिश की थी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हिरियूर तालुक में ही कडुगोल्ला समुदाय की आबादी लगभग 60 हजार है। उन्होंने कहा कि समुदाय के लोग शैक्षणिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें सामाजिक न्याय दिलाने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है।
शिवकुमार ने केंद्र सरकार के फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को यहीं समाप्त नहीं होने देगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि कडुगोल्ला समुदाय को न्याय दिलाने के लिए सरकार अपने प्रयास जारी रखेगी।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस विषय को राज्य मंत्रिमंडल की अगली बैठक में दोबारा उठाया जाएगा। बैठक में केंद्र सरकार की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने की परिस्थितियों और आगे उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर कानूनी विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य समुदाय को सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक न्याय दिलाना है। इसके लिए केंद्र सरकार के समक्ष नए सिरे से मामला उठाने और प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह करने की योजना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कडुगोल्ला समुदाय की स्थिति को लेकर तैयार की गई नृजातीय अध्ययन रिपोर्ट राज्य सरकार की सिफारिश का महत्वपूर्ण आधार रही है। इस प्रकार के अध्ययन में किसी समुदाय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक परंपराओं, आजीविका, सांस्कृतिक पहचान और अन्य विशेषताओं का विश्लेषण किया जाता है।
कडुगोल्ला समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग नई नहीं है। समुदाय के प्रतिनिधि लंबे समय से इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। पहले भी राज्य स्तर पर अध्ययन और सिफारिशों की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने से किसी पात्र समुदाय को संविधान और संबंधित कानूनों के अंतर्गत निर्धारित सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सकता है। इनमें शिक्षा और सरकारी रोजगार में आरक्षण सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच शामिल हो सकती है। हालांकि, ऐसे किसी समुदाय को सूची में शामिल करने के लिए निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न समुदायों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।
शिवकुमार ने इस मुद्दे पर राज्य के विपक्षी नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के कुछ नेताओं ने पहले आश्वासन दिया था कि वे कडुगोल्ला समुदाय को एसटी सूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार से बातचीत करेंगे।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के स्तर पर प्रस्ताव को समर्थन दिलाने के मामले में विपक्षी नेताओं ने अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि समुदाय की मांग को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है।
हालांकि, मुख्यमंत्री के इन आरोपों पर संबंधित विपक्षी नेताओं का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। प्रस्ताव खारिज किए जाने के संबंध में केंद्र सरकार के विस्तृत कारणों और आधिकारिक दस्तावेजों से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कडुगोल्ला समुदाय के विकास का मामला केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है। इसके साथ शिक्षा, रोजगार, आर्थिक अवसर और सामाजिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषय भी जुड़े हुए हैं।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार समुदाय की समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने के लिए प्रयासरत रहेगी। मंत्रिमंडल की अगली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करके आगे की रणनीति निर्धारित की जाएगी।
हिरियूर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में विकास कार्यों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस क्षेत्र में सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी करीब 2,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है।
शिवकुमार ने कहा कि सरकार किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने संबंधित विकास परियोजनाओं को जल्द पूरा करने का भरोसा भी दिलाया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के गरीब और आवासहीन परिवारों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने लगभग पांच लाख आवासीय भूखंडों की पहचान और वितरण से संबंधित जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को आवासीय सुविधाओं से जोड़ना है।
कडुगोल्ला समुदाय को एसटी दर्जा देने का मुद्दा ऐसे समय में फिर चर्चा में आया है, जब हिरियूर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव प्रस्तावित है। इस क्षेत्र में समुदाय की उल्लेखनीय आबादी होने के कारण उसकी मांगों को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल राज्य सरकार ने केंद्र के फैसले के बावजूद समुदाय की मांग को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद अब सबकी निगाहें मंत्रिमंडल की आगामी बैठक और केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले संभावित नए प्रस्ताव पर टिकी हैं।
कडुगोल्ला समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलेगा या नहीं, यह आगे की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार इस मुद्दे को दोबारा उठाएगी और समुदाय को न्याय दिलाने के लिए प्रयास जारी रखेगी।