अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में भव्य दीपोत्सव की तैयारियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे राजर्षि दशरथ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में तैनात इकलौती कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्वाती शर्मा की संविदा सेवा समाप्त होने की जानकारी सामने आई है। वह मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं। उनकी सेवा समाप्त होने से हृदय रोगियों को विशेषज्ञ परामर्श मिलने में परेशानी होने की आशंका है। वहीं दीपोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं और विशिष्ट अतिथियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में पहले से चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में हृदय रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता समाप्त होना अस्पताल प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है। जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने समस्या के समाधान के लिए एसोसिएट प्रोफेसर स्तर पर नए विशेषज्ञ की नियुक्ति की तैयारी शुरू कर दी है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति होने तक हृदय रोगियों को समुचित परामर्श कैसे उपलब्ध कराया जाए। नियमित ओपीडी में आने वाले मरीजों के अलावा आपातकालीन परिस्थितियों में विशेषज्ञ की जरूरत पड़ सकती है।
इकलौती कार्डियोलॉजिस्ट की सेवा समाप्त होने से बढ़ी चिंता
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में कुछ वर्ष पहले कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्वाती शर्मा की संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति हुई थी। उनकी तैनाती से हृदय संबंधी बीमारियों के मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श मिलने लगा था।
मेडिकल कॉलेज में अयोध्या शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें उच्च रक्तचाप, सीने में दर्द, हृदय की धड़कन में अनियमितता और सांस फूलने जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीज भी शामिल रहते हैं।
ऐसे मरीजों के लिए समय पर विशेषज्ञ परामर्श बेहद आवश्यक होता है। विशेष रूप से गंभीर हृदय रोगियों के मामले में जांच और उपचार में देरी परेशानी बढ़ा सकती है।
डॉ. स्वाती शर्मा की संविदा सेवा समाप्त होने के बाद विशेषज्ञ सेवाओं की निरंतरता को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, उनकी सेवा समाप्त होने का प्रशासनिक कारण और संबंधित आदेश की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकी है।
दीपोत्सव के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था संभालना चुनौती
अयोध्या में आयोजित होने वाले दीपोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और विशिष्ट अतिथियों के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन की ओर से कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारियां चल रही हैं।
ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। भीड़भाड़, लंबे समय तक पैदल चलने, थकान और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण कुछ लोगों को अचानक चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।
विशेष रूप से बुजुर्गों और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता प्रशासन के सामने अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकती है।
हालांकि, दीपोत्सव के लिए स्वास्थ्य विभाग की अलग से क्या चिकित्सा व्यवस्था होगी और अन्य अस्पतालों से कितने विशेषज्ञ उपलब्ध कराए जाएंगे, इसका विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है।
ओपीडी में आने वाले हृदय रोगियों को हो सकती है परेशानी
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सरकारी चिकित्सा संस्थान है। निजी अस्पतालों में महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ कई मरीज सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञ की अनुपलब्धता का सबसे अधिक असर नियमित जांच कराने वाले मरीजों पर पड़ सकता है। जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें दवाओं में बदलाव, जांच रिपोर्ट की समीक्षा और आगे के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने पर मरीजों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है। इससे उनके समय और खर्च दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है।
हालांकि, मेडिसिन विभाग के अन्य चिकित्सक सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं और कुछ हृदय संबंधी स्थितियों का प्रारंभिक प्रबंधन कर सकते हैं, लेकिन जटिल मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
कैथ लैब की कमी से पहले ही परेशान हैं मरीज
अयोध्या में हृदय रोगियों के लिए उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता पहले भी सामने आ चुकी है। फरवरी 2026 की एक प्रकाशित रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेज की कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्वाती शर्मा ने जिले में कैथ लैब की जरूरत बताई थी।
उस समय उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में सप्ताह के निर्धारित दिनों में कार्डियोलॉजी ओपीडी और टू-डी इको जैसी जांच सुविधाएं उपलब्ध थीं। हालांकि, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर जैसी उन्नत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ मरीजों को दूसरे बड़े चिकित्सा संस्थानों में भेजना पड़ता था।
अब विशेषज्ञ चिकित्सक की सेवा समाप्त होने से पहले से मौजूद समस्याएं और गंभीर होने की आशंका है। ऐसे में नए विशेषज्ञ की नियुक्ति के साथ आवश्यक जांच और उपचार सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति की तैयारी
जानकारी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की ओर से समस्या के समाधान के लिए एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
नए विशेषज्ञ की नियुक्ति होने पर हृदय रोगियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह प्रक्रिया कब तक पूरी होगी और नियुक्त चिकित्सक कब से सेवाएं देना शुरू करेंगे, इसकी निश्चित समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
मेडिकल कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट पर संविदा शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन भी उपलब्ध हैं। इससे संस्थान में रिक्त शैक्षणिक और चिकित्सकीय पदों को भरने की प्रक्रिया जारी रहने की जानकारी मिलती है।
वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस मुद्दे में सबसे जरूरी सवाल यह है कि स्थायी या संविदा विशेषज्ञ की नई नियुक्ति होने तक मरीजों को किस प्रकार इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
दीपोत्सव जैसे बड़े आयोजन के दौरान आसपास के अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के बीच समन्वय बनाकर विशेषज्ञ सेवाओं की वैकल्पिक व्यवस्था करना महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसके अलावा गंभीर हृदय रोगियों के लिए समय पर रेफरल, एंबुलेंस और आपातकालीन उपचार सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
अयोध्या में चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के प्रयासों के बीच इकलौती कार्डियोलॉजिस्ट की सेवा समाप्त होने की सूचना ने व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब निगाहें मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर टिकी हैं कि वह नए विशेषज्ञ की नियुक्ति और मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कितनी जल्दी सुनिश्चित करता है।
दीपोत्सव की तैयारियों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी, ताकि स्थानीय मरीजों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और अतिथियों को भी जरूरत पड़ने पर समय से उपचार मिल सके।