लखनऊ। समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव के रोजगार के आंकड़ों को लेकर लगाए गए आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में राज्य में 9.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं और ये नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी एवं योग्यता आधारित प्रक्रिया के माध्यम से की गई हैं।ANI से बातचीत करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नियुक्तियों में किसी तरह का भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद या जातिगत पक्षपात नहीं हुआ है।
सुरेश खन्ना ने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह सरकार की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पारदर्शी व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर पा रहा है, क्योंकि भर्ती बोर्डों में पहले जैसी अनियमितताओं की गुंजाइश खत्म हो चुकी है।उन्होंने कहा, "विपक्ष के पास कोई असली मुद्दा नहीं है। उनके कार्यकाल के दौरान नियुक्तियां अक्सर शक और विवादों से घिरी रहती थीं। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासन में नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए की जाती हैं, जो सिफारिशों, जाति आधारित पक्षपात या भेदभाव से मुक्त होती हैं।"
मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए लगातार कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी विभागों में खाली पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया को तेज किया गया और चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।सुरेश खन्ना ने कहा कि सरकार की नीति रही है कि योग्य उम्मीदवारों को बिना किसी दबाव या भेदभाव के अवसर मिले। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल, परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के कारण युवाओं का विश्वास बढ़ा है।
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने रोजगार के आंकड़ों को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सरकार के रोजगार संबंधी दावों को लेकर आलोचना की थी और आंकड़ों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाए थे।इसके जवाब में सुरेश खन्ना ने कहा कि सरकार ने अपने कार्यकाल में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मंत्री ने कहा कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और विवादों की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन वर्तमान सरकार ने समयबद्ध तरीके से नियुक्तियां पूरी करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को निष्पक्ष तरीके से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ रोजगार के क्षेत्र में भी बदलाव किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले।
सुरेश खन्ना ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष को अपने कार्यकाल की भर्ती प्रक्रियाओं को भी देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने भर्ती व्यवस्था को मजबूत और विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया है।राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में रोजगार और सरकारी भर्तियां हमेशा से प्रमुख राजनीतिक मुद्दे रहे हैं। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियों को रोजगार और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था से जोड़ता है, वहीं विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठाता रहा है।
इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में रोजगार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों ही इस मुद्दे पर अपने-अपने पक्ष रख रहे हैं।सुरेश खन्ना ने दोहराया कि योगी सरकार की भर्ती नीति पूरी तरह निष्पक्ष है और इसमें किसी भी प्रकार के पक्षपात की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के हित में आगे भी रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए काम करती रहेगी।