टांडा से चित्रकूट तक चार अस्पतालों में मिलेंगी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं
चार सरकारी अस्पतालों के पीपीपी संचालन को मंजूरी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने अंबेडकरनगर, बांदा, बरेली और चित्रकूट के चार सरकारी अस्पतालों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर संचालित करने की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में चिकित्सा विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। योजना के तहत हर अस्पताल में 12 विशेषज्ञ और कम से कम तीन सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें हृदय रोग, तंत्रिका रोग और मूत्र रोग या गुर्दा रोग से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य मरीजों को अपने जिले में विशेषज्ञ इलाज के विकल्प देना है।
पहले चरण में अंबेडकरनगर के टांडा स्थित 200 बेड वाले मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग, बांदा के 200 बेड वाले मंडलीय चिकित्सालय, बरेली के 300 बेड वाले संयुक्त चिकित्सालय और चित्रकूट के खोह, कर्वी स्थित 200 बेड वाले मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग को शामिल किया गया है। चारों संस्थानों की कुल क्षमता 900 बेड है। कैबिनेट का फैसला इन सरकारी अस्पतालों के संचालन में निजी भागीदारी से जुड़ा है। अस्पतालों में दी जाने वाली सेवाओं और ओपीडी व जांच की दरों के लिए प्रस्ताव में शर्तें तय की गई हैं।
योजना के तहत इन अस्पतालों में सामान्य चिकित्सा और सामान्य सर्जरी के साथ प्रसूति एवं स्त्री रोग, बाल रोग, अस्थि रोग और नेत्र रोग की सेवाएं मिलेंगी। कान, नाक व गला, त्वचा रोग, दंत शल्य चिकित्सा और मनोरोग का इलाज भी सेवा सूची में है। इसके अलावा आपातकालीन एवं ट्रॉमा सेवा और गंभीर मरीजों की देखभाल के साथ एनेस्थीसियोलॉजी की व्यवस्था होगी। इस तरह एक ही अस्पताल में बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और दुर्घटना में घायल मरीजों की अलग-अलग जरूरतों के लिए विभाग उपलब्ध कराने की योजना है।
सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और यूरोलॉजी या नेफ्रोलॉजी को शामिल किया गया है। कार्डियोलॉजी हृदय रोगों से जुड़ी है, जबकि न्यूरोलॉजी में मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं देखी जाती हैं। यूरोलॉजी मूत्र तंत्र और नेफ्रोलॉजी गुर्दे से जुड़ी बीमारियों की विशेषज्ञ शाखा है। इन सेवाओं के स्थानीय स्तर पर शुरू होने से मरीजों को शुरुआती विशेषज्ञ परामर्श और आगे के इलाज की जरूरत का आकलन कराने के लिए दूसरे शहर जाने की जरूरत कम पड़ सकती है। अस्पतालवार उपलब्ध प्रक्रियाओं का विवरण सामने आने पर पता चलेगा कि कौन-से उपचार जिले में ही किए जा सकेंगे। मरीजों की जेब पर सीधे असर डालने वाला प्रावधान ओपीडी और जांच की दरों से जुड़ा है। चारों अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग और डायग्नोस्टिक सेवाओं के लिए लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की निर्धारित दरें लागू होंगी। आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के पात्र लाभार्थियों को योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी संचालित करने का भी प्रावधान है। ब्रांडेड जेनेरिक दवाएं अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी पर कम से कम 25 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध कराई जाएंगी।
ओपीडी के साथ भर्ती मरीजों के इलाज, सर्जरी, पैथोलॉजी, एक्स-रे और अन्य इमेजिंग सेवाओं की व्यवस्था भी प्रस्ताव में शामिल है। आपातकालीन और ट्रॉमा सेवाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध कराने की शर्त रखी गई है। एक ही परिसर में विशेषज्ञ डॉक्टर, जांच और भर्ती की सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों और उनके परिजनों को अलग-अलग केंद्रों पर जाने की जरूरत कम हो सकती है। अस्पतालों को 24 महीने के भीतर अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) की पूर्ण मान्यता हासिल करनी होगी। प्रदेश के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट दस्तावेज में भी पीपीपी मोड पर चार सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के संचालन के लिए 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था दर्ज है। अक्टूबर में मिली कैबिनेट मंजूरी से पहले चरण के अस्पतालों, वहां दी जाने वाली सेवाओं और मरीजों के लिए लागू होने वाली ओपीडी व जांच दरों की तस्वीर स्पष्ट हुई है। उपलब्ध जानकारी में अस्पतालवार संचालन शुरू होने की तारीख नहीं दी गई है। मरीजों के लिए अगली अहम जानकारी यह होगी कि किस अस्पताल में विशेषज्ञ ओपीडी, जांच और भर्ती की नई सुविधाएं कब से उपलब्ध होंगी।