गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सोमवार को जमकर हंगामा देखने को मिला। अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर को घेर लिया और उनके साथ नोकझोंक हुई। इसके बाद परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। अनशन स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। इसी दौरान प्रॉक्टर के पहुंचने पर छात्रों और प्रशासन के बीच बहस शुरू हो गई। मामला बढ़ने पर सुरक्षाकर्मियों और विश्वविद्यालय कर्मचारियों को बीच-बचाव करना पड़ा।
मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे छात्र
जानकारी के अनुसार, गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुछ छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनशन कर रहे थे। छात्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
छात्रों की प्रमुख मांगों में शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे, सुविधाओं में सुधार और छात्र हितों से जुड़े विषय शामिल बताए जा रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा था।
प्रॉक्टर के पहुंचते ही बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि जब विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर अनशन स्थल पर छात्रों से बातचीत करने पहुंचे तो माहौल अचानक गर्म हो गया। छात्रों और प्रॉक्टर के बीच बहस शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ छात्रों ने प्रॉक्टर का विरोध करते हुए उन्हें घेर लिया। इस दौरान प्रॉक्टर को वहां से हटना पड़ा। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है।
हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पूरे मामले को लेकर आधिकारिक बयान का इंतजार है।
कैंपस में मची अफरा-तफरी
हंगामे के बाद विश्वविद्यालय परिसर में काफी देर तक तनाव का माहौल रहा। बड़ी संख्या में छात्र और कर्मचारी मौके पर जमा हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।
छात्रों का आरोप है कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है, जबकि प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
प्रशासन और छात्रों के बीच बढ़ी दूरी
विश्वविद्यालयों में छात्र आंदोलन नई बात नहीं है, लेकिन जब विरोध प्रदर्शन व्यक्तिगत टकराव में बदल जाता है तो स्थिति बिगड़ सकती है। गोरखपुर विश्वविद्यालय की घटना ने एक बार फिर छात्र-प्रशासन संवाद की जरूरत को सामने ला दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों की समस्याओं को समय रहते सुनना और समाधान निकालना जरूरी है, ताकि आंदोलन उग्र रूप न ले।
छात्रों ने जारी रखने की दी चेतावनी
अनशन कर रहे छात्रों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे थे, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण स्थिति बिगड़ी।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहा है।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं। घटना की वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध वीडियो के आधार पर स्पष्ट हो सकेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि वह छात्रों की नाराजगी को शांत करे और शैक्षणिक माहौल को सामान्य बनाए रखे।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में हुई इस घटना के बाद छात्र राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाल पाते हैं या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।
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