बरेली। सीतापुर से गाजियाबाद तक तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। बरेली शहर के भीतर से नई लाइन ले जाने के बजाय इसे बाइपास रूट से निकालने की योजना बनाई गई है। इसके लिए संभावित मार्ग लगभग तय कर लिया गया है और अब नए बरेली जंक्शन के लिए स्थान चयन की प्रक्रिया चल रही है।

योजना के अनुसार नई रेल लाइनें बरेली शहर के मौजूदा व्यस्त रेल रूट को बाइपास करेंगी। इससे बरेली जंक्शन सहित तीन स्टेशन सीधे नए मार्ग से बाहर हो जाएंगे। रामगंगा के आसपास नया बरेली जंक्शन विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए रेलवे की टीम संभावित जमीन और स्थानों का निरीक्षण कर रही है।

सर्वे पूरा होने के बाद पूरी रिपोर्ट मंडल मुख्यालय मुरादाबाद भेजी जाएगी। वहां तकनीकी, परिचालन और भूमि से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तय होगी।

सीतापुर से गाजियाबाद तक तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण होने से मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम होने की उम्मीद है। अभी इस रूट पर बड़ी संख्या में यात्री और मालगाड़ियां चलती हैं, जिसके कारण कई हिस्सों में ट्रेनों को रास्ता देने के लिए रोकना पड़ता है।

नई लाइनें बनने के बाद एक ही दिशा में अधिक ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा। इससे यात्रियों के लिए नई ट्रेनें चलाने की संभावना भी बढ़ेगी और मौजूदा ट्रेनों के संचालन में भी सुधार हो सकता है।

बरेली शहर में प्रस्तावित बाइपास इस पूरी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। वर्तमान में बरेली जंक्शन से होकर गुजरने वाले रूट पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी भारी दबाव रहता है। इसके कारण स्टेशन और आसपास के रेलखंडों पर परिचालन क्षमता सीमित हो जाती है।

नई लाइन को शहर से बाहर निकालने का उद्देश्य इसी दबाव को कम करना है। रेलवे की योजना है कि लंबी दूरी और कुछ मालगाड़ियों को नए बाइपास रूट से चलाया जा सके, जबकि मौजूदा बरेली जंक्शन पर स्थानीय और अन्य निर्धारित सेवाएं जारी रह सकें।

रामगंगा के पास नया बरेली जंक्शन बनने से रेलवे को नए रूट पर एक बड़ा परिचालन केंद्र भी मिल जाएगा। यह स्टेशन भविष्य में तीसरी और चौथी लाइन से गुजरने वाली ट्रेनों के लिए महत्वपूर्ण ठहराव बन सकता है।

नए जंक्शन के स्थान का चयन करते समय रेल कनेक्टिविटी, सड़क संपर्क, जमीन की उपलब्धता और भविष्य में विस्तार की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाएगा। रेलवे की टीम इन सभी बिंदुओं पर सर्वे कर रही है।

रिपोर्ट में यह भी शामिल किया जाएगा कि नए स्टेशन तक यात्रियों की पहुंच किस तरह आसान बनाई जा सकती है। यदि नया जंक्शन शहर से बाहर बनाया जाता है तो उसके लिए सड़क संपर्क और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी जरूरी होगी।

रेलवे का लक्ष्य सिर्फ नई लाइन बिछाना नहीं, बल्कि पूरे रूट की परिचालन क्षमता बढ़ाना है। तीसरी और चौथी लाइन बनने से एक ही समय में अधिक ट्रेनों को चलाने की सुविधा मिलेगी।

इसके अलावा मालगाड़ियों को अलग ट्रैक पर चलाने की संभावना भी बढ़ सकती है, जिससे यात्री ट्रेनों की गति और समयपालन में सुधार हो सकता है।

बरेली के मौजूदा रूट पर कई महत्वपूर्ण रेल सेवाएं गुजरती हैं। इसके कारण ट्रैक व्यस्त रहते हैं और कई बार ट्रेनों को आउटर या बीच के स्टेशनों पर रोकना पड़ता है। अतिरिक्त लाइनें इस समस्या को कम करने में मदद कर सकती हैं।

बाइपास रूट बनने के बाद शहर के भीतर रेल यातायात का दबाव कम हो सकता है। इससे रेलवे क्रॉसिंग, स्टेशन यार्ड और आसपास के इलाकों में भी संचालन आसान होगा।

प्रस्तावित नए बरेली जंक्शन के साथ रेलवे भविष्य में नए प्लेटफॉर्म, यार्ड और अन्य परिचालन सुविधाएं भी विकसित कर सकता है। फिलहाल इसका अंतिम स्वरूप सर्वे रिपोर्ट के बाद तय होगा।

तीसरी और चौथी लाइन की योजना लंबी अवधि की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। सीतापुर से गाजियाबाद तक का यह रेलखंड उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ता है।

नई लाइनें बनने से सिर्फ बरेली ही नहीं, बल्कि पूरे रूट पर यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। अधिक क्षमता होने से नई ट्रेनें शुरू करने और मौजूदा ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की संभावना बन सकती है।

माल परिवहन के लिहाज से भी यह परियोजना अहम हो सकती है। अतिरिक्त ट्रैक होने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के साथ एक ही लाइन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

रेलवे अधिकारी फिलहाल सर्वे के दौरान संभावित मार्ग, जमीन की स्थिति और निर्माण में आने वाली बाधाओं का आकलन कर रहे हैं। इसके बाद लागत और अन्य तकनीकी पहलुओं पर भी काम किया जाएगा।

बरेली शहर में बाइपास लाइन का रूट लगभग तय कर लिया गया है, लेकिन अंतिम मंजूरी सर्वे और उच्च स्तर की समीक्षा के बाद ही मिलेगी।

नए जंक्शन का स्थान भी अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। रामगंगा के पास संभावित स्थानों का चयन कर उनका परीक्षण किया जा रहा है।

सर्वे रिपोर्ट मंडल मुख्यालय मुरादाबाद भेजे जाने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें तकनीकी मंजूरी, बजट और जमीन से जुड़ी औपचारिकताएं शामिल होंगी।

यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है तो बरेली के रेल नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। एक ओर पुराना बरेली जंक्शन पहले की तरह काम करता रहेगा, वहीं दूसरी ओर नया जंक्शन लंबी दूरी और बाइपास रूट की ट्रेनों का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

नई लाइनें बनने से बरेली के पुराने रूट पर दबाव कम होगा और यात्रियों को अधिक ट्रेनों तथा बेहतर परिचालन का लाभ मिल सकता है।

फिलहाल रेलवे का फोकस सर्वे और नए जंक्शन के स्थान चयन पर है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद परियोजना की वास्तविक लागत, रूट और निर्माण की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट होगी।

सीतापुर से गाजियाबाद तक तीसरी और चौथी लाइन की यह योजना आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के रेल नेटवर्क को अधिक क्षमता और बेहतर कनेक्टिविटी देने वाली बड़ी परियोजनाओं में शामिल हो सकती है।

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