उत्तर प्रदेश : राजनीति से बुधवार को दुखद खबर सामने आई। बुलंदशहर की शिकारपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व राज्यमंत्री **अनिल शर्मा** का निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे और दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
अनिल शर्मा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर से की और बाद में विधायक से लेकर मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाली। वह चार बार विधानसभा के सदस्य रहे। उनके निधन को भाजपा के साथ-साथ बुलंदशहर की राजनीति के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है।
लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे
परिजनों के अनुसार अनिल शर्मा वर्ष 2023 से कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। बीमारी के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी सक्रियता बनाए रखने की कोशिश की। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ने के बाद उनका दिल्ली के निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। बुधवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
अनिल शर्मा के निधन की सूचना मिलते ही उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। शिकारपुर क्षेत्र में लोग उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद कर रहे हैं। लंबे समय तक क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहने के कारण स्थानीय लोगों से उनका गहरा संपर्क माना जाता था।
ग्राम प्रधान से शुरू किया था राजनीतिक सफर
अनिल शर्मा ने राजनीति की शुरुआत बेहद जमीनी स्तर से की थी। वह बुलंदशहर जिले के शिकारपुर क्षेत्र के सुरजावली गांव के रहने वाले थे। कम उम्र में ही उन्हें गांव का निर्विरोध ग्राम प्रधान चुना गया था। ग्राम स्तर की राजनीति से आगे बढ़ते हुए उन्होंने विधानसभा चुनावों में अपनी पहचान बनाई।
उनका राजनीतिक सफर कई पड़ावों से होकर गुजरा। शुरुआती दौर में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के साथ राजनीति की और विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। बाद में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया।
2002 में पहली बार बने विधायक
अनिल शर्मा पहली बार वर्ष 2002 में खुर्जा विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद वर्ष 2007 में उन्होंने इसी सीट से दोबारा जीत हासिल की। लगातार दो बार विधानसभा पहुंचने के बाद उन्होंने वर्ष 2012 में शिकारपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
भाजपा में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव शिकारपुर क्षेत्र में मजबूत होता गया। वर्ष 2017 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर शिकारपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी तो उन्हें मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी मिली।
योगी सरकार में संभाली मंत्री की जिम्मेदारी
2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद अनिल शर्मा को **वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री** की जिम्मेदारी दी गई थी। मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रदेश सरकार में अपनी भूमिका निभाई। इसके बाद वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर उन्हें शिकारपुर सीट से मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज की। इस तरह वह चार बार विधानसभा के सदस्य बने।
उनका राजनीतिक जीवन करीब दो दशक से ज्यादा लंबा रहा। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों का सामना किया और क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखी।
भाजपा में शामिल होने के बाद मजबूत हुई पकड़
अनिल शर्मा के राजनीतिक जीवन में भाजपा में शामिल होना एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। बसपा के टिकट पर दो बार विधायक बनने के बाद उन्होंने भाजपा का रुख किया। 2017 में भाजपा के टिकट पर शिकारपुर से जीत दर्ज करने के बाद वह राज्य सरकार में मंत्री बने।
2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। लगातार दो विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर जीतने के कारण पार्टी में उनका राजनीतिक कद मजबूत हुआ। उनके समर्थक उन्हें क्षेत्र की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने वाले नेता के रूप में देखते थे।
क्षेत्र में शोक का माहौल
अनिल शर्मा के निधन की खबर सामने आने के बाद शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र में शोक का माहौल है। भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनके निधन पर दुख जताया। पार्टी से जुड़े लोगों के लिए यह खबर इसलिए भी भावुक करने वाली है क्योंकि लंबे समय से बीमारी से जूझने के बावजूद अनिल शर्मा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहने का प्रयास करते रहे।
उनके निधन के बाद क्षेत्र में उनके पुराने राजनीतिक सफर की भी चर्चा शुरू हो गई है। ग्राम प्रधान के रूप में शुरुआत करने वाले अनिल शर्मा ने धीरे-धीरे विधानसभा और फिर राज्य सरकार में मंत्री पद तक का सफर तय किया।
बुलंदशहर की राजनीति में बड़ा बदलाव
अनिल शर्मा के निधन से बुलंदशहर की शिकारपुर विधानसभा सीट अब रिक्त हो गई है। उनके निधन के साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा में खाली सीटों की संख्या भी बढ़ गई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब छह विधानसभा सीटें रिक्त हो गई हैं। इनमें तीन सीटें समाजवादी पार्टी, दो भाजपा और एक बहुजन समाज पार्टी के खाते की थीं। इससे पहले 5 अगस्त को बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हुआ था।
ऐसे में आने वाले समय में शिकारपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। भाजपा के सामने अब इस सीट पर अपना राजनीतिक आधार बनाए रखने की चुनौती होगी।
समर्थकों में गहरा दुख
अनिल शर्मा के निधन से उनके समर्थकों और परिचितों में गहरा दुख है। स्थानीय राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण उनके क्षेत्र में व्यापक संपर्क थे। उनके निधन से भाजपा ने एक अनुभवी नेता खो दिया है, जिन्होंने ग्राम स्तर से शुरुआत करके विधायक और मंत्री तक का सफर तय किया।
उनका जीवन राजनीतिक संघर्ष और लगातार सक्रियता से जुड़ा रहा। दो अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ काम करने के बावजूद उन्होंने अपने क्षेत्र में अपनी पहचान कायम रखी। बीमारी के लंबे दौर के बाद उनका निधन उनके परिवार, समर्थकों और पार्टी के लिए बड़ी क्षति है।
अनिल शर्मा के निधन से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक और अनुभवी जनप्रतिनिधि का अध्याय समाप्त हो गया। अब उनके राजनीतिक योगदान और क्षेत्र के लिए किए गए कार्यों को याद किया जा रहा है। उनके निधन से खाली हुई शिकारपुर सीट पर आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।