बलिया। सरयू नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण बांसडीह क्षेत्र के भोजपुरवा गांव में रविवार रात अचानक जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई। नदी के उफान से गांव के कई हिस्सों में पानी भर गया और करीब 100 लोग जलभराव के बीच फंस गए। रात के समय अंधेरा और नदी का तेज बहाव होने के कारण तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करना मुश्किल रहा। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी रात स्थिति पर नजर बनाए रखी।
सोमवार सुबह मौसम और परिस्थितियों में कुछ सुधार के बाद एनडीआरएफ की टीम मोटरबोट लेकर गांव पहुंची। इसके बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। टीम ने घरों में फंसे लोगों को प्राथमिकता के आधार पर बाहर निकाला। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को पहले सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। बाद में अन्य ग्रामीणों को भी मोटरबोट की मदद से गांव से बाहर निकाला गया।
रात में बढ़ा खतरा
बताया गया कि रविवार रात सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ भोजपुरवा गांव में पानी तेजी से फैलने लगा। देखते ही देखते कई घरों और आसपास के रास्तों में पानी भर गया। ग्रामीणों को जब स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ तो बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की कोशिश करने लगे।
हालांकि, रात के समय चारों तरफ अंधेरा होने और पानी के तेज बहाव के कारण लोगों को बाहर निकालना जोखिम भरा था। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए तत्काल मौके पर निगरानी बढ़ा दी। अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की टीम ने रातभर ग्रामीणों की स्थिति पर नजर रखी और सुबह बचाव अभियान शुरू करने की तैयारी की।
प्रशासन ने रातभर संभाला मोर्चा
स्थिति की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। एसडीएम डा. पुष्कर मिश्रा और सीओ जयशंकर मिश्र के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला रात से ही मौके पर मौजूद रहा।
अधिकारियों ने ग्रामीणों से संयम बनाए रखने की अपील की। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि पानी के बढ़ते स्तर के बीच कोई व्यक्ति जोखिम उठाकर गांव से बाहर निकलने की कोशिश न करे।
रातभर प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा रही। अधिकारियों ने मौके की स्थिति का लगातार जायजा लिया और राहत एवं बचाव टीम के पहुंचने तक ग्रामीणों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए।
सुबह पहुंची NDRF की टीम
सुबह होते ही राहत एवं बचाव अभियान को गति दी गई। एनडीआरएफ की टीम मोटरबोट के साथ भोजपुरवा गांव पहुंची। टीम के सदस्यों ने जलभराव वाले इलाकों का जायजा लेने के बाद घर-घर जाकर लोगों को सुरक्षित निकालना शुरू किया।
मोटरबोट के जरिए लोगों को गांव से बाहर लाया गया। बचाव अभियान में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि कमजोर और अधिक जोखिम वाले लोगों को पहले निकाला जाए। इसी क्रम में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता दी गई।
एक-एक घर से लोगों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। बचाव दल ने ग्रामीणों को आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह भी दी।
तटबंध और राहत शिविरों में पहुंचाए गए लोग
गांव से सुरक्षित निकाले गए लोगों को तटबंध और राहत शिविरों में पहुंचाया गया। वहां उनके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों की जरूरतों का जायजा लिया गया और राहत सामग्री समेत अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।
जलभराव के कारण जिन परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े, उनके लिए राहत शिविर फिलहाल सुरक्षित ठिकाने के रूप में तैयार किए गए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि जब तक पानी का खतरा कम नहीं हो जाता, वे सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर
बाढ़ और जलभराव की स्थिति में बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। भोजपुरवा में भी प्रशासन ने इसी को ध्यान में रखते हुए बचाव अभियान की प्राथमिकता तय की।
एनडीआरएफ के जवानों ने घरों तक पहुंचकर लोगों को मोटरबोट में बैठाया। जहां पानी का बहाव अधिक था, वहां विशेष सावधानी बरती गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर रहकर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की।
सरयू के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
सरयू नदी के उफान से बांसडीह क्षेत्र के नदी किनारे बसे गांवों में चिंता बढ़ गई है। जलस्तर बढ़ने के साथ ग्रामीण इलाकों में पानी पहुंचने का खतरा बना हुआ है। भोजपुरवा में रविवार रात की घटना ने एक बार फिर नदी के आसपास बसे गांवों की संवेदनशीलता सामने ला दी है।
ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि जलस्तर और बढ़ता है तो आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
लगातार निगरानी में प्रशासन
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलस्तर में होने वाले बदलाव की निगरानी की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राहत एवं बचाव दलों को लगाया जा सकता है।
प्रशासन की कोशिश है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। साथ ही राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
बड़ा हादसा टला
रविवार रात अंधेरे और तेज बहाव के कारण बचाव अभियान शुरू न हो पाने के बावजूद प्रशासनिक टीम ने मौके पर रहकर हालात संभाले। सुबह एनडीआरएफ की टीम के पहुंचने के बाद करीब 100 फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता देकर चलाया गया यह अभियान किसी बड़े हादसे की आशंका को टालने में महत्वपूर्ण रहा। फिलहाल सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है और प्रशासन की निगरानी जारी है।
सरयू के बढ़ते जलस्तर के बीच भोजपुरवा में हुई यह घटना नदी किनारे बसे गांवों के लिए एक चेतावनी भी है। प्रशासन ने राहत और बचाव व्यवस्था को सक्रिय रखा है, जबकि ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी के तेज बहाव से दूर रहने की सलाह दी गई है।