वोटर आईडी विवाद में सबा मसूद को हाईकोर्ट से बेल, कोर्ट ने कही यह बड़ी बात
मेरठ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेज और वोटर आईडी से जुड़े मामले में गिरफ्तार पाकिस्तानी नागरिक सबा मसूद को जमानत प्रदान कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और अब तक की जांच के आधार पर प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने भारत में रहने के लिए धोखाधड़ी, जालसाजी या फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। न्यायालय ने यह भी माना कि वह पिछले लगभग 35 वर्षों से वैध रूप से भारत में रह रही हैं, उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही हैं।
परिजनों के अनुसार, जमानत आदेश के बाद शुक्रवार को जेल से उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। वहीं, मामले में कानूनी कार्रवाई अभी जारी रहेगी और जांच पूरी होने के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी।
सबा मसूद के खिलाफ मेरठ के देहली गेट थाने में 14 फरवरी 2026 को एक शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वह पाकिस्तान की नागरिक हैं और भारत में रहने के दौरान उन्होंने कथित रूप से फर्जी तरीके से वोटर आईडी कार्ड बनवाया। शिकायतकर्ता ने उनकी और उनके परिवार की गतिविधियों पर भी संदेह जताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए थे। एफआईआर दर्ज होने के दो दिन बाद, 16 फरवरी 2026 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सबा मसूद की ओर से अदालत को बताया गया कि विवाह से पहले उनका नाम शबा हनीफ था। वर्ष 1986 में उन्होंने पाकिस्तान के लाहौर में भारतीय नागरिक फरहत मसूद से निकाह किया था। विवाह के बाद वह वैध पाकिस्तानी पासपोर्ट और भारत सरकार द्वारा जारी दीर्घकालिक वीजा (लॉन्ग टर्म वीजा) के आधार पर भारत आईं। तब से वह मेरठ के जलीकोठी क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रही हैं।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को यह भी बताया कि सबा मसूद के पास मार्च 2027 तक वैध रेजिडेंशियल परमिट और वर्ष 2037 तक का वैध दीर्घकालिक वीजा है। उन्होंने वर्ष 2010 और 2011 में भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए नियमानुसार आवेदन भी किया था, जो अभी संबंधित अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन है। बचाव पक्ष का तर्क था कि उन्होंने भारत में रहने के लिए किसी प्रकार की जालसाजी या फर्जी दस्तावेजों का सहारा नहीं लिया है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि वीजा नियमों के उल्लंघन के पहलुओं की जांच की जा रही है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों, लंबे समय से वैध निवास, किसी भी आपराधिक इतिहास के अभाव और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने के आधार पर सबा मसूद को जमानत देने का निर्णय लिया।
सबा मसूद के बेटे फराज मसूद, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, ने बताया कि हाईकोर्ट से जमानत आदेश मिलने के बाद आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार तक रिहाई आदेश जेल प्रशासन के पास पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद उनकी मां को रिहा कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार इस मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त कराने के लिए भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।
एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता रुखसाना खान ने आरोप लगाया था कि भारतीय नागरिक फरहत मसूद ने पाकिस्तान के लाहौर में सबा मसूद से विवाह किया था। विवाह के बाद वह भारत आईं और परिवार के साथ रहने लगीं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि दंपती की तीन संतान हैं, जिनमें दो बेटों का जन्म भारत में हुआ, जबकि एक बेटी का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और बाद में उसे पाकिस्तानी पासपोर्ट के आधार पर भारत लाया गया। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश केवल जमानत से संबंधित है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। मुकदमे की सुनवाई और पुलिस जांच आगे भी जारी रहेगी। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही यह तय होगा कि लगाए गए आरोप कितने सही हैं और इस मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष क्या होगा।