बिहार : गुठनी थाना क्षेत्र के श्रीकलपुर चेक पोस्ट पर वाहन जांच के दौरान पुलिस ने एक ट्रक से भारी मात्रा में कफ सिरप बरामद किया। सिरप की पेटियां चोकर के बीच छिपाकर रखी गई थीं। संदेह होने पर पुलिस ने ट्रक को रोककर जांच शुरू की, लेकिन इसी दौरान चालक और खलासी वाहन छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ट्रक को थाने ले आई, जहां दो ड्रग इंस्पेक्टरों की मौजूदगी में उसे खाली कराया गया। बरामद खेप की कुल मात्रा और कीमत को लेकर सामने आए विवरण में संख्यात्मक अंतर है, जिसके स्पष्ट होने का इंतजार है।

जानकारी के अनुसार, श्रीकलपुर चेक पोस्ट पर पुलिस वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक ट्रक को संदेह के आधार पर रुकवाया गया। पुलिसकर्मियों ने वाहन की जांच-पड़ताल शुरू की तो चालक और खलासी वहां से निकल गए। दोनों के ट्रक छोड़कर फरार होने के बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई। ट्रक में लदे चोकर के बीच कफ सिरप की पेटियां मिलने से बड़ी खेप के परिवहन का मामला सामने आया। इसके बाद वाहन को थाने पहुंचाया गया।

थाने में ट्रक को खाली कराने के लिए औषधि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई। ड्रग इंस्पेक्टर दयानंद प्रसाद सिंह और रविशंकर सिंह की उपस्थिति में वाहन से सामान उतारा गया। चोकर के बीच रखी गई सिरप की पेटियां अलग की गईं। उपलब्ध विवरण में बरामद दवा में कोडीन फॉस्फेट और एक अन्य घटक का उल्लेख किया गया है। दूसरे घटक का नाम स्पष्ट रूप से लिखा नहीं होने के कारण उसकी सही पहचान औषधि विभाग की पुष्टि से ही तय हो सकेगी।

थानाध्यक्ष सुनील कुमार के हवाले से बताया गया है कि ट्रक से कुल 190 पेटी कफ सिरप बरामद हुआ। प्रत्येक पेटी में 100 एमएल की 100 बोतलें होने की जानकारी दी गई है। प्रति बोतल 224 रुपये मूल्य अंकित बताया गया है। वहीं, इसी विवरण में कुल बोतलों की संख्या 28,500 और मात्रा 2,850 लीटर बताई गई है। खेप की कुल कीमत 63 लाख 84 हजार रुपये बताई गई है। पेटियों की संख्या और कुल बोतलों के आंकड़े आपस में मेल नहीं खाते।

यदि बरामद पेटियों की संख्या 190 है और प्रत्येक में 100 बोतलें हैं, तो कुल संख्या 19,000 बोतलें होती है। प्रत्येक बोतल 100 एमएल की होने पर कुल मात्रा 1,900 लीटर बनेगी। इसी संख्या पर प्रति बोतल 224 रुपये के हिसाब से अंकित मूल्य 42 लाख 56 हजार रुपये होता है। इसलिए 190 पेटियों के आंकड़े के आधार पर 28,500 बोतलें और 63 लाख 84 हजार रुपये की कीमत की पुष्टि नहीं की जा सकती।

दूसरी ओर, यदि कुल बरामद बोतलें वास्तव में 28,500 हैं, तो प्रत्येक पेटी में 100 बोतलों के हिसाब से पेटियों की संख्या 285 होनी चाहिए। इस स्थिति में 2,850 लीटर की मात्रा और 63 लाख 84 हजार रुपये का अंकित मूल्य गणना के अनुसार सही बैठता है। इससे यह स्पष्ट है कि पेटियों की संख्या या कुल बोतलों की संख्या में से किसी एक आंकड़े में सुधार आवश्यक है। अंतिम गिनती अथवा आधिकारिक बरामदगी सूची से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मामले में चालक और खलासी का फरार होना एक महत्वपूर्ण तथ्य है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनकी पहचान, ट्रक के मालिक, खेप भेजने वाले या उसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति का विवरण नहीं दिया गया है। वाहन कहां से आया था और उसे कहां जाना था, यह भी स्पष्ट नहीं है। इसलिए किसी विशेष स्थान, कारोबारी या गिरोह को इस खेप से जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा। सामने आए तथ्य वाहन रोके जाने, दोनों व्यक्तियों के भागने और सिरप मिलने तक सीमित हैं।

चोकर के बीच पेटियां छिपाकर रखे जाने से खेप के परिवहन के तरीके पर सवाल उठे हैं। दवा के संबंध में बिल, परिवहन दस्तावेज, आपूर्ति का उद्देश्य और संबंधित अनुमतियों की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। लेकिन उपलब्ध विवरण में इन दस्तावेजों के मिलने या नहीं मिलने की जानकारी शामिल नहीं है। ड्रग इंस्पेक्टरों की मौजूदगी में वाहन खाली कराया गया है, पर औषधि विभाग का विस्तृत निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में सिरप की पूरी खेप की कानूनी स्थिति का अंतिम निर्धारण अभी शेष है।

पुलिस की वाहन जांच में सामने आया यह मामला बरामदगी की मात्रा के कारण महत्वपूर्ण है। चेक पोस्ट पर रोके गए ट्रक में चोकर के बीच सिरप की पेटियां मिलने और चालक-खलासी के फरार होने से कई प्रश्न खड़े हुए हैं। अब आधिकारिक विवरण में बोतलों तथा पेटियों की सही संख्या, दवा की पहचान और परिवहन से जुड़े तथ्य स्पष्ट होना आवश्यक है। इन्हीं जानकारियों के आधार पर बरामद खेप की वास्तविक मात्रा, अंकित कीमत और मामले की आगे की स्थिति का सही आकलन किया जा सकेगा।

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