लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बदलते मौसम के बीच मौसमी फ्लू के साथ-साथ स्वाइन फ्लू और कोरोना संक्रमण ने भी दस्तक देनी शुरू कर दी है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों में इन संक्रमणों की पुष्टि हो रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी तक मिले अधिकांश मरीजों में संक्रमण के हल्के लक्षण हैं और स्थिति नियंत्रण में है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।

लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में हुई जांच में बीते 30 दिनों के दौरान स्वाइन फ्लू और कोरोना के कुल 19 मरीज सामने आए हैं। इनमें 11 मरीज स्वाइन फ्लू से संक्रमित पाए गए हैं, जबकि आठ मरीजों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। इन सभी मरीजों की रिपोर्ट संबंधित संस्थानों ने स्वास्थ्य विभाग को भेज दी है।

पीजीआई समेत तीन बड़े संस्थानों में मिले मरीज

राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, बलरामपुर अस्पताल और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में जांच के दौरान स्वाइन फ्लू और कोरोना के मरीज मिले हैं।

चिकित्सा संस्थानों के अधिकारियों के अनुसार, सभी मरीजों में संक्रमण के शुरुआती और हल्के लक्षण पाए गए हैं। इनमें ज्यादातर मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। चिकित्सकों ने बताया कि वर्तमान में गंभीर स्थिति वाले मरीजों की संख्या कम है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं। ऐसे समय में सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट

स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशभर में अलर्ट जारी किया है। सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने संदिग्ध मरीजों की जांच कराने और संक्रमित मरीजों की निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वाइन फ्लू और कोरोना दोनों ही संक्रमण श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं। इसलिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना, हाथों की सफाई रखना और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

हापुड़ में स्वाइन फ्लू से किसान की मौत

इसी बीच हापुड़ जिले से स्वाइन फ्लू से मौत का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में पुष्टि हुई है कि गांव धनौरा निवासी 63 वर्षीय किसान की मौत स्वाइन फ्लू संक्रमण के कारण हुई।

किसान की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार को गांव का दौरा किया। टीम ने मृतक के परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और संक्रमण की स्थिति की जानकारी ली।

स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लोगों को जागरूक करते हुए सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने बताया कि मृतक के संपर्क में आए लोगों पर भी नजर रखी जा रही है।

हापुड़ में तीन अन्य मरीज भी मिले संक्रमित

हापुड़ जिले में किसान की मौत के अलावा तीन अन्य मरीजों में भी स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, हापुड़ के मोहल्ला केशवनगर, धौलाना और गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में एक-एक मरीज स्वाइन फ्लू से संक्रमित मिला है।

इन मरीजों का उपचार किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग लगातार उनकी निगरानी कर रहा है। अधिकारियों ने बताया कि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

चिकित्सकों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

चिकित्सकों का कहना है कि मौसमी बीमारियों के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में खानपान और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। बुखार लंबे समय तक रहने या सांस संबंधी परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल जाएं।

उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू और कोरोना दोनों का समय पर इलाज मिलने पर मरीज जल्दी ठीक हो सकते हैं। इसलिए लक्षणों को छिपाने के बजाय समय रहते जांच कराना जरूरी है।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी

प्रदेश में स्वाइन फ्लू और कोरोना के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। अस्पतालों में जांच और उपचार की व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि साफ-सफाई रखें, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतें और संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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