वाराणसी। पूर्वांचल के कई जिलों में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आजमगढ़, वाराणसी और मीरजापुर मंडल में सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 18 तक पहुंच गई है। संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि मंडलीय चिकित्सालय में रविवार को भी रियल टाइम आरटी-पीसीआर जांच सुविधा उपलब्ध नहीं रही।
जांच के लिए पहुंचने वाले मरीजों को घंटों इंतजार के बाद भी राहत नहीं मिल पा रही है। कई लोग बिना जांच कराए ही वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
जांच के लिए भटक रहे मरीज
स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर मरीज जांच के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन आरटी-पीसीआर जांच सुविधा बंद होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि संक्रमण की पुष्टि के लिए समय पर जांच जरूरी है, लेकिन सुविधा नहीं मिलने से इलाज शुरू होने में देरी हो रही है।
अस्पताल में आने वाले कई लोग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन अंत में उन्हें बिना जांच के ही लौटना पड़ता है।
आरटी-पीसीआर किट नहीं होने से लैब बंद
मंडलीय चिकित्सालय के पैथोलॉजिस्ट इंचार्ज डा. इकबाल ने बताया कि आरटी-पीसीआर किट अभी रास्ते में है, जिसके कारण लैब बंद है।
उन्होंने कहा कि किट उपलब्ध होने के बाद जांच प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी जाएगी।
हालांकि, संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच जांच सुविधा बंद होने से मरीजों की चिंता बढ़ गई है।
बुजुर्गों और बच्चों पर ज्यादा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एच1एन1 संक्रमण का खतरा सभी उम्र के लोगों को हो सकता है, लेकिन बुजुर्ग, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं।
संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या संपर्क में आने से यह वायरस फैल सकता है।
ऐसे में समय पर जांच और उपचार बेहद जरूरी हो जाता है।
गंभीर मरीजों में निमोनिया और सांस की समस्या
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुछ गंभीर मामलों में मरीजों को सांस लेने में परेशानी और निमोनिया जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
अगर संक्रमण की पहचान समय पर न हो तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और बुखार, खांसी, गले में दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
लोगों में बढ़ रहा डर
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के कारण लोगों में डर का माहौल है।
अस्पतालों में आने वाले मरीज संक्रमण की जांच और इलाज को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि जब संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं तो जांच व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल
एच1एन1 के बढ़ते मामलों के बीच जांच सुविधा का प्रभावित होना स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए केवल इलाज ही नहीं, बल्कि समय पर पहचान भी जरूरी है।
आरटी-पीसीआर जांच सुविधा बंद रहने से संक्रमित मरीजों की पहचान में देरी हो सकती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
सावधानी बरतने की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
डॉक्टरों के अनुसार, भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना, मास्क का इस्तेमाल करना, हाथों की सफाई रखना और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है।
इसके अलावा लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से बचने की भी सलाह दी गई है।
जल्द शुरू होगी जांच सुविधा
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आरटी-पीसीआर किट उपलब्ध होते ही जांच शुरू कर दी जाएगी।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संक्रमित मरीजों के उपचार की व्यवस्था की जा रही है।
पूर्वांचल में बढ़ते एच1एन1 मामलों के बीच जांच सुविधा को जल्द बहाल करना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। समय पर जांच और इलाज ही संक्रमण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।