डॉक्टरों को घर के पास तैनाती, 40% प्रोत्साहन की तैयारी

Update: 2026-07-25 04:20 GMT

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए प्रदेश सरकार नई पहल करने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी सेवा में बनाए रखने और अधिक संख्या में चिकित्सकों को आकर्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार कर रहा है। इसके तहत विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सा अधिकारियों को उनकी पसंद के स्थान या घर के नजदीक तैनाती देने के साथ ही दांपत्य नीति का लाभ देने की तैयारी है। इसके अलावा उन्हें 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासतौर पर जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए चिकित्सकों को सरकारी सेवा में आकर्षित करने के लिए सुविधाएं और प्रोत्साहन बढ़ाने की योजना तैयार की जा रही है।

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने इस संबंध में महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को विस्तृत प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव में विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति, तैनाती, प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाओं से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल करने को कहा गया है। प्रस्ताव मिलने के बाद सरकार इस पर आगे निर्णय लेगी।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने से सरकारी अस्पतालों में उनकी उपलब्धता बढ़ेगी। वर्तमान में कई विशेषज्ञ चिकित्सक सरकारी सेवा में आने से हिचकते हैं, जिसका मुख्य कारण सीमित सुविधाएं, स्थानांतरण संबंधी समस्याएं और निजी क्षेत्र में बेहतर अवसरों को माना जाता है। सरकार अब इन चुनौतियों को दूर करने के लिए आकर्षक नीतियां बनाने पर काम कर रही है।

नई पहल के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों को दांपत्य नीति का लाभ देने पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन चिकित्सकों को राहत देना है, जिनके जीवनसाथी भी सरकारी सेवा में हैं और अलग-अलग स्थानों पर तैनाती के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो ऐसे डॉक्टरों को एक ही स्थान या आसपास के क्षेत्र में तैनाती देने में प्राथमिकता दी जा सकती है।

इसके साथ ही विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने से विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को मजबूत किया जा सकेगा।

प्रदेश सरकार पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर दे रही है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या और गंभीर बीमारियों के इलाज की जरूरत को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग लगातार बढ़ रही है। हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, कैंसर, किडनी रोग, स्त्री रोग, बाल रोग और अन्य सुपर स्पेशलिटी क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

इसी क्रम में सरकार लेवल-1 चिकित्सकों के 10 हजार से अधिक पद बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है। इसका उद्देश्य प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करना है। नए पदों के सृजन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी और मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केवल पद बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि योग्य डॉक्टरों की नियुक्ति और उन्हें लंबे समय तक सेवा में बनाए रखना भी जरूरी है। इसलिए सरकार भर्ती प्रक्रिया के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए बेहतर कार्य वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार प्रस्तावित योजनाओं को लागू करती है तो इसका सीधा लाभ सरकारी अस्पतालों और मरीजों को मिलेगा। विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से जिला स्तर पर ही गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो सकेगा और मरीजों को बड़े शहरों या निजी अस्पतालों की ओर जाने की जरूरत कम होगी।

हालांकि, प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्ताव में डॉक्टरों की जरूरत, अस्पतालों की स्थिति और वित्तीय पहलुओं का भी आकलन किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि ऐसी नीति बनाई जाए जिससे डॉक्टरों को बेहतर अवसर मिलें और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती मिले।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की इस पहल को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों को घर के पास तैनाती, दांपत्य नीति का लाभ और प्रोत्साहन राशि जैसी सुविधाएं मिलने से सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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