रामपुर : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर आयकर विभाग ने अब जांच का दायरा बढ़ा दिया है। विभाग ने मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े बैंक खातों, लेनदेन और निवेश के स्रोतों का पूरा ब्योरा मांगा है।
आयकर विभाग की नजर अब उस रकम पर है, जो जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण और अन्य संपत्तियों में निवेश की गई। विभाग के अनुसार यूनिवर्सिटी परिसर में बने 59 भवनों की अनुमानित निर्माण लागत करीब **494.46 करोड़ रुपये** बताई गई है। अब इस बड़ी रकम के स्रोत और खर्च का हिसाब मांगा गया है।
जौहर ट्रस्ट से मांगे गए दस्तावेज
आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट को नोटिस जारी कर वर्ष 2015-16 से 2020-21 तक के वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। इसमें बैंक खातों की जानकारी, लेनदेन का विवरण, आय-व्यय का ब्योरा और निवेश से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण और अन्य संपत्तियों में लगी इतनी बड़ी रकम का स्रोत क्या था और इसे किस तरह खर्च किया गया।
494 करोड़ के निवेश पर उठे सवाल
आयकर विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में कई भवनों का निर्माण हुआ है। इनकी लागत का आकलन करीब 494.46 करोड़ रुपये किया गया है। विभाग ने ट्रस्ट से पूछा है कि इतनी बड़ी राशि कहां से आई और इसके लिए कौन-कौन से वित्तीय स्रोत इस्तेमाल किए गए।
इसके अलावा जमीन, फर्नीचर और अन्य संपत्तियों पर हुए खर्च का भी रिकॉर्ड मांगा गया है।
11 कंपनियों से मिले चंदे की भी जांच
आयकर विभाग ने ट्रस्ट को मिले बड़े चंदे की भी जांच शुरू की है। विभाग ने करीब 11 कॉरपोरेट संस्थाओं से मिले दान से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं।
इनमें दान की राशि, रसीद, बहीखाते, आयकर रिटर्न और बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज शामिल हैं। विभाग यह जांच कर रहा है कि ट्रस्ट को मिले धन का इस्तेमाल नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।
बैंक जमा और आय में अंतर का मामला
आयकर विभाग ने ट्रस्ट के आयकर रिटर्न और बैंक खातों में जमा राशि के बीच अंतर का भी मुद्दा उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 से 2023-24 के बीच बैंक जमा और घोषित आय में करीब 59.25 करोड़ रुपये का अंतर बताया गया है। 
विभाग ने इस अंतर का स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।
पहले भी जांच के घेरे में रहा ट्रस्ट
मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। इससे पहले भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है।
जांच एजेंसियां ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और निर्माण कार्यों की जानकारी जुटाती रही हैं।
आजम खान की राजनीतिक मुश्किलें
आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति के बड़े चेहरों में रहे हैं। वह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय तक मंत्री भी रहे हैं।
हालांकि पिछले कुछ समय से वह कई कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में हैं। जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में जांच बढ़ने के बाद उनकी राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
ट्रस्ट की भूमिका पर भी सवाल
आयकर विभाग की जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह भी है कि ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियां कितनी पारदर्शी थीं। विभाग ट्रस्ट के खातों, दान और खर्चों का मिलान कर रहा है।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि ट्रस्ट को मिलने वाले धन का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया गया।
आगे क्या होगा?
अब आयकर विभाग द्वारा मांगे गए दस्तावेजों और जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच में कोई वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो विभाग कानूनी प्रक्रिया के तहत कदम उठा सकता है।
फिलहाल पूरा मामला जौहर यूनिवर्सिटी के वित्तीय रिकॉर्ड और 494.46 करोड़ रुपये के निवेश के स्रोत की जांच के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
Tags: