पुराने गंगा पुल की मरम्मत का रास्ता साफ 13 सितंबर से दो दिन होगा डायवर्जन ट्रायल
कानपुर। जाजमऊ स्थित पुराने गंगा पुल की मरम्मत के लिए लंबे समय से अटका यातायात डायवर्जन अब लागू होने जा रहा है। उन्नाव प्रशासन 13 सितंबर से दो दिनों तक प्रस्तावित डायवर्जन व्यवस्था का ट्रायल करेगा। परीक्षण के दौरान वाहनों के दबाव, वैकल्पिक मार्गों की स्थिति और यातायात संचालन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का आकलन किया जाएगा। ट्रायल सफल रहने पर पुल की मरम्मत के दौरान करीब तीन महीने तक यही डायवर्जन प्लान लागू रहेगा।
पुराने गंगा पुल की मरम्मत का कार्य उन्नाव की तरफ से शुरू किया जाएगा। कार्य के दौरान लखनऊ से कानपुर की ओर आने वाले भारी वाहनों को पुराने पुल से प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इन वाहनों को प्रशासन द्वारा निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। वहीं कानपुर से लखनऊ की दिशा में जाने वाले वाहनों के लिए नया गंगा पुल खुला रहेगा। इससे एक दिशा के यातायात को सुचारु रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पुराने गंगा पुल पर लंबे समय से मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, लेकिन भारी यातायात और उचित डायवर्जन व्यवस्था तय नहीं होने के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा था। यह पुल कानपुर और उन्नाव के साथ लखनऊ की ओर जाने वाले वाहनों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में निजी, व्यावसायिक और भारी वाहन यहां से गुजरते हैं। ऐसी स्थिति में मरम्मत शुरू करने से पहले वैकल्पिक यातायात व्यवस्था तैयार करना आवश्यक था।
उन्नाव प्रशासन ने अब दो दिवसीय ट्रायल के जरिए यह पता लगाने का निर्णय लिया है कि प्रस्तावित डायवर्जन वास्तविक यातायात दबाव को संभाल पाएगा या नहीं। 13 और 14 सितंबर को होने वाले परीक्षण के दौरान प्रमुख चौराहों, संपर्क मार्गों और पुल के आसपास वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी। यदि किसी स्थान पर जाम या अव्यवस्था की स्थिति बनती है तो उसके अनुसार डायवर्जन प्लान में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।
ट्रायल के दौरान सबसे अधिक ध्यान भारी वाहनों की आवाजाही पर रहेगा। लखनऊ की ओर से कानपुर आने वाले ट्रक, ट्रेलर और अन्य बड़े व्यावसायिक वाहन पुराने गंगा पुल से नहीं गुजर सकेंगे। ऐसे वाहनों को पहले से चिह्नित स्थानों से दूसरे मार्गों पर मोड़ा जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि भारी वाहन पुल के नजदीक पहुंचने से पहले ही वैकल्पिक रास्ते पर चले जाएं, ताकि जाजमऊ और आसपास के क्षेत्रों में अनावश्यक जाम न लगे।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की ओर से वाहन चालकों को डायवर्जन की जानकारी देने के लिए अलग-अलग स्थानों पर संकेतक बोर्ड लगाए जाएंगे। ये बोर्ड ऐसे प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे, जहां से वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग चुनने में आसानी हो। साइन बोर्ड पर बंद मार्ग, प्रतिबंधित वाहन और आगे उपलब्ध वैकल्पिक रास्ते से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित किए जाने की व्यवस्था होगी।
डायवर्जन को प्रभावी बनाने के लिए प्रमुख स्थानों पर वालंटियर्स की तैनाती भी की जाएगी। ये वालंटियर्स वाहन चालकों को सही दिशा बताने और भ्रम की स्थिति दूर करने में मदद करेंगे। शुरुआत के दिनों में नई व्यवस्था से अनजान चालक पुराने मार्ग की ओर आ सकते हैं। ऐसे में मौके पर मौजूद वालंटियर्स उन्हें निर्धारित रास्ते की जानकारी देकर यातायात संभालने में सहयोग करेंगे।
दो दिवसीय ट्रायल के दौरान प्रशासन और यातायात से जुड़े अधिकारी अलग-अलग स्थानों पर स्थिति का निरीक्षण कर सकते हैं। किसी मार्ग पर वाहनों का दबाव अधिक होने, मोड़ पर बड़े वाहनों के फंसने या स्थानीय यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याओं को चिह्नित किया जाएगा। परीक्षण से मिलने वाले अनुभव के आधार पर करीब तीन महीने के लिए अंतिम व्यवस्था तैयार की जाएगी।
पुल की मरम्मत शुरू होने के बाद कानपुर और लखनऊ के बीच यात्रा करने वाले वाहन चालकों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की जरूरत पड़ सकती है। भारी वाहनों के दूसरे मार्गों पर जाने से कुछ वैकल्पिक सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना है। ट्रायल का उद्देश्य ऐसी संभावित समस्याओं का पहले ही पता लगाना है, ताकि लंबे समय तक व्यवस्था लागू करने से पहले उन्हें दूर किया जा सके।
नया गंगा पुल कानपुर से लखनऊ की दिशा में जाने वाले वाहनों के लिए खुला रहने से इस ओर यातायात संचालन जारी रहेगा। इसके बावजूद पुल और उससे जुड़े मार्गों पर वाहनों की संख्या बढ़ सकती है। वाहन चालकों को संकेतकों और मौके पर तैनात कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाएगी। गलत दिशा में प्रवेश करने या अचानक वाहन मोड़ने से जाम और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
पुराने पुल की मरम्मत चरणबद्ध तरीके से किए जाने की संभावना है। कार्य की शुरुआत उन्नाव वाले हिस्से से होगी। इस दौरान मरम्मत करने वाली एजेंसी को यातायात सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा। निर्माण क्षेत्र को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने, रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था रखने और आवश्यक अवरोधक लगाने की जरूरत होगी, ताकि किसी वाहन का प्रवेश कार्यस्थल तक न हो।
करीब तीन महीने तक चलने वाली प्रस्तावित डायवर्जन व्यवस्था का असर स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और नियमित यात्रियों पर भी पड़ सकता है। जाजमऊ औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों वाला क्षेत्र है। यहां प्रतिदिन मालवाहक वाहनों की बड़ी संख्या आती-जाती है। भारी वाहनों के मार्ग में बदलाव होने से माल परिवहन की समय-सारणी पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि मरम्मत कार्य के साथ-साथ यातायात को भी व्यवस्थित बनाए रखा जाए। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक होगा। किसी मार्ग पर अचानक वाहनों का दबाव बढ़ने पर तत्काल व्यवस्था बदलनी पड़ सकती है। ट्रायल के दौरान यातायात से जुड़े आंकड़े और मौके की परिस्थितियां अंतिम योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
वाहन चालकों से अपील की जाएगी कि वे यात्रा शुरू करने से पहले डायवर्जन की जानकारी प्राप्त कर लें। भारी वाहन चालक निर्धारित मार्गों का ही इस्तेमाल करें और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश का प्रयास न करें। स्थानीय तथा निजी वाहन चालक भी ट्रायल के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें और प्रमुख मार्गों पर संभावित देरी को ध्यान में रखकर घर से निकलें।
पुराने गंगा पुल की मरम्मत पूरी होने से पुल की संरचनात्मक स्थिति बेहतर होने और यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सभी की निगाह 13 सितंबर से शुरू होने वाले दो दिवसीय ट्रायल पर है। परीक्षण सफल रहा तो करीब तीन महीने तक डायवर्जन लागू रखते हुए उन्नाव की ओर से पुल की मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।