Muzaffarnagar: स्ट्रीट लाइट विवाद के बीच स्वास्थ्य अधिकारी के पर कटे
स्ट्रीट लाइट विवाद भी गर्माया
मुजफ्फरनगर: नगरपालिका परिषद में स्वास्थ्य सेवाओं की बिगड़ती हालत और सफाई व्यवस्था की अव्यवस्था को लेकर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने बड़ा कदम उठाते हुए नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल कुमार से सभी दायित्व तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए हैं। उनकी जगह अब सीएसएफआई योगेश कुमार गोलियान को नगर स्वास्थ्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
बताया गया कि बीते दिनों नगर में सफाई की स्थिति बेहद खराब हो गई थी, जिसको लेकर पालिका अध्यक्ष लगातार डॉ. अतुल को निर्देश दे रही थीं। बावजूद इसके, वे बिना सूचना के चार दिन तक ड्यूटी से गायब रहे। इससे न केवल नगरवासियों को असुविधा हुई बल्कि ईओ समेत अन्य अधिकारियों को कार्य संचालन में भी कठिनाई हुई। अध्यक्ष मीनाक्षी
स्वरूप ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पहले ही डॉ. अतुल को हटाने की सिफारिश कर दी थी। अब पालिका प्रशासन ने अधिकारों से वंचित करते हुए आदेश जारी कर दिए हैं। नए आदेश के तहत, जब तक कोई स्थायी नियुक्ति नहीं होती, तब तक योगेश गोलियान स्वच्छता प्रबंधन समेत अन्य नगर स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों को समयबद्ध ढंग से संपन्न कराएंगे।
स्ट्रीट लाइट गायब होने की शिकायतों पर भी सख्ती: पालिका क्षेत्र में विद्युत पोल से स्ट्रीट लाइटों के गायब होने की लगातार मिल रही शिकायतों को भी अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता पवन कुमार अग्रवाल को पत्र भेजकर इस प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
पालिका अध्यक्ष के अनुसार, एबीसी केबिल परिवर्तन कार्य के दौरान विभागीय कर्मियों और एलएनटी कंपनी की टीम द्वारा पोलों से स्ट्रीट लाइटें हटाई जा रही हैं, लेकिन उन्हें दोबारा नहीं लगाया जा रहा, बल्कि साथ ले जाया जा रहा है। विशेष रूप से वार्ड 43 में यह मामला सामने आया है, जहां सभासदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई है।
अध्यक्ष ने इसे पालिका की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का गंभीर मामला करार देते हुए कहा कि लाइटों और तारों को काटकर हटाया जा रहा है, जिससे रात में राहगीरों को अंधेरे की समस्या झेलनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जहां से लाइटें हटाई गई हैं, वहां कार्य पूर्ण होने के बाद उन्हें पुनः स्थापित किया जाए। अगर ऐसा संभव नहीं हो, तो वे लाइटें पालिका कार्यालय में जमा कराई जाएं। पालिका प्रशासन अब खुद इन कार्यों की निगरानी करेगा ताकि शहर की मूलभूत सुविधाएं संरक्षित रह सकें और किसी भी तरह की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई हो सके।