फर्जी प्रमाणपत्र विवाद में शिक्षक को राहत हाईकोर्ट ने पलटा आदेश
हाईकोर्ट ने रद्द किया बर्खास्तगी का आदेश
प्रयागराज: फर्जी प्रमाणपत्र के आरोप में नौकरी से बर्खास्त किए गए एक शिक्षक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने शिक्षक की नियुक्ति रद्द करने से संबंधित आदेश को खारिज कर दिया। कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षक की सेवा से जुड़े मामले में नया मोड़ आ गया है। अदालत ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद संबंधित आदेश में हस्तक्षेप किया।
मामला एक शिक्षक की नियुक्ति और उसके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों से जुड़ा है। शिक्षक पर आरोप लगाया गया था कि नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी है। इसी आधार पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई और उनकी नियुक्ति निरस्त करते हुए सेवा समाप्त कर दी गई। इसके खिलाफ शिक्षक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता शिक्षक की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई। नियुक्ति रद्द करने से पहले तथ्यों और प्रमाणपत्रों से संबंधित पक्ष को पर्याप्त तरीके से नहीं देखा गया। याचिकाकर्ता ने विभाग की कार्रवाई को चुनौती देते हुए नियुक्ति रद्द करने वाले आदेश को निरस्त करने की मांग की।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभाग की कार्रवाई और उससे संबंधित रिकॉर्ड पर विचार किया। अदालत के सामने यह सवाल भी था कि क्या शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोप के आधार पर सीधे नियुक्ति समाप्त करने की कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप थी।
अदालत ने सुनवाई के बाद शिक्षक की नियुक्ति रद्द करने वाले आदेश को खारिज कर दिया। इस फैसले से याचिकाकर्ता को राहत मिली है। हालांकि आदेश खारिज होने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि फर्जी प्रमाणपत्र से संबंधित आरोप पूरी तरह गलत साबित हो गए हैं। इस संबंध में हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश और उसमें दर्ज निष्कर्षों को देखना जरूरी होगा।
ऐसे मामलों में प्रमाणपत्र की वास्तविकता का निर्धारण संबंधित शैक्षणिक संस्थान या सक्षम प्राधिकारी के रिकॉर्ड के आधार पर किया जाता है। यदि किसी सरकारी कर्मचारी की नियुक्ति में फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने का आरोप लगता है तो विभाग नियमानुसार जांच और कार्रवाई कर सकता है। लेकिन कार्रवाई के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना भी महत्वपूर्ण होता है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब संबंधित विभाग को अदालत के आदेश के अनुरूप आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। शिक्षक को सेवा में वापस लिया जाएगा या विभाग को नए सिरे से कोई कार्रवाई करने की अनुमति दी गई है, यह विस्तृत न्यायिक आदेश की शर्तों पर निर्भर करेगा। फिलहाल अदालत द्वारा नियुक्ति रद्द करने का आदेश खारिज किए जाने से शिक्षक को तत्काल कानूनी राहत मिली है। मामले में आगे विभाग क्या कदम उठाता है, इस पर नजर रहेगी।