मुरादाबाद: बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ने वाले सात हजार से अधिक छात्र-छात्राएं अब तक आधार कार्ड से वंचित हैं। इसके चलते शैक्षिक रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो पा रहा और बच्चे सरकारी योजनाओं जैसे फ्री ड्रेस, किताबें, छात्रवृत्ति और अन्य जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं। बीएसए का कहना है कि बीईओ को दो महीने पहले ही आधार कार्ड बनाने की मशीनें उपलब्ध करा दी गई थीं, बावजूद इसके कार्य में प्रगति नहीं हो सकी।

ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की स्थिति ज्यादा खराब

अधिकारियों के मुताबिक, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पास न तो आधार कार्ड हैं और न ही जन्म प्रमाण पत्र। नतीजतन, उनका डाटा ऑनलाइन फीड नहीं हो पा रहा है, जिससे ड्रेस, जूते-मोजे, स्टेशनरी और अन्य सुविधाएं मिलने में बाधा आ रही है। आधार लिंक बैंक खाता न होने से डीबीटी के तहत फंड ट्रांसफर भी प्रभावित हो रहा है। कई बच्चों का नाम मिड-डे मील पोर्टल पर भी अपडेट नहीं किया जा सका है।

एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

इस स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी अब एक-दूसरे पर लापरवाही का आरोप मढ़ रहे हैं।

बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) विमलेश कुमार का कहना है कि प्रत्येक विकास खंड में बीईओ को दो-दो आधार कार्ड बनाने की मशीनें दी गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस देरी के लिए एडी बेसिक जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने अब तक नोडल अधिकारी की नियुक्ति नहीं की।

एडी बेसिक ने किया पलटवार

वहीं, एडी बेसिक बुद्धप्रिय सिंह ने बीएसए के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नोडल अधिकारी का काम केवल निगरानी करना होता है, आधार कार्ड बनवाने की जिम्मेदारी बीईओ और बीएसए की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नोडल अधिकारी की नियुक्ति में देरी को आधार कार्ड न बनने से जोड़ना सिर्फ जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है।

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