एमएचए अधिकारियों ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

Update: 2026-07-24 15:45 GMT

गाजियाबाद। जिले में स्थित शत्रु संपत्तियों के संरक्षण, प्रबंधन और निस्तारण को लेकर भारत सरकार के गृह मंत्रालय की टीम ने महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। कलक्ट्रेट में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में लंबित मामलों के जल्द निस्तारण और शत्रु संपत्तियों के व्यवस्थित प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के दौरान जिले में मौजूद करोड़ों-अरबों रुपये मूल्य की शत्रु संपत्तियों की वर्तमान स्थिति और उनके भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

गृह मंत्रालय के अधीन शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय की टीम ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ संपत्तियों से जुड़े मामलों की प्रगति की जानकारी ली। अधिकारियों ने यह भी समीक्षा की कि किन मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और किन मामलों में अभी कार्रवाई लंबित है।

बैठक में गृह मंत्रालय के निदेशक विनीत नायर, उप सचिव राजेंद्र कुमार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के पर्यवेक्षक प्रशांत सिंह सैनी शामिल रहे। उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों से शत्रु संपत्तियों की मौजूदा स्थिति, उनके संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की।

अधिकारियों ने निर्देश दिए कि शत्रु संपत्तियों से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए। इसके साथ ही जिन संपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है, उन पर भी तेजी से काम करने को कहा गया। बैठक में संपत्तियों के विक्रय की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई।

गाजियाबाद जिले में करीब 600 बीघा शत्रु संपत्ति होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई संपत्तियां बेहद महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित हैं और इनका बाजार मूल्य काफी अधिक बताया जा रहा है। गृह मंत्रालय की टीम ने इन संपत्तियों की वर्तमान स्थिति, रिकॉर्ड और प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा की।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक में बताया कि शत्रु संपत्तियों से जुड़े मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और कानूनी पहलुओं की जांच की जा रही है। किसी भी संपत्ति के निस्तारण से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

शत्रु संपत्ति वह संपत्ति होती है जो ऐसे लोगों की होती है जो भारत छोड़कर किसी शत्रु देश की नागरिकता ले चुके हैं। इन संपत्तियों की देखरेख और प्रबंधन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के पास होती है।

बैठक के बाद माना जा रहा है कि गाजियाबाद में शत्रु संपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। प्रशासन और गृह मंत्रालय के बीच बेहतर समन्वय के जरिए इन संपत्तियों से जुड़े पुराने मामलों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि शत्रु संपत्तियों का सही प्रबंधन और नियमानुसार निस्तारण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। आने वाले समय में इन संपत्तियों को लेकर और भी प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।

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