Mathura: सुबह 7:45 बजे खुलेंगे ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के कपाट, जानें नए समय और प्रसाद में बदलाव की पूरी जानकारी

Update: 2025-03-17 05:25 GMT
Mathura मथुरा: गर्मी का मौसम शुरू होते ही ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन और भोग-सेवा में कई अहम बदलाव किए गए हैं। होली के बाद लगाए जाने वाले भोग में भारी पदार्थों की मात्रा कम कर दी गई है, जबकि तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ा दी गई है। वहीं, शरद ऋतु में पंचमेवा का भोग अधिक मात्रा में लगाया जाता था, अब गर्मी में इसकी जगह कुछ बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मंदिर में दर्शन के समय में बदलाव प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के दर्शन के समय में भी बदलाव किया गया है। रविवार को ठाकुरजी को एक घंटा पहले जागना पड़ा।
मंदिर के पट सुबह 7:45 बजे खुलते हैं और दोपहर 12 बजे राजभोग लगाने के बाद पट बंद कर दिए जाते हैं। शाम को मंदिर के पट 5:30 बजे खुलते हैं और रात 9:30 बजे बंद हो जाते हैं। ठाकुर बांकेबिहारी का मंदिर जहां सुबह मंगला आरती नहीं होती तीर्थनगरी में ठाकुर बांकेबिहारी का मंदिर ऐसा है जहां सुबह मंगला आरती नहीं होती। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान बांकेबिहारी बाल रूप में होते हैं और रात में निधिवन में रास रचाते हैं। इसलिए वे देर से सोते हैं और सुबह जल्दी नहीं उठते, इसलिए मंगला आरती की परंपरा नहीं है।
शरद ऋतु से ग्रीष्म ऋतु तक ठाकुरजी के दर्शन का समय शरद ऋतु में ठाकुरजी सुबह 8:45 बजे दर्शन देते थे, लेकिन ग्रीष्म ऋतु में एक घंटा पहले उठकर अब वे सुबह 7:45 बजे भक्तों को दर्शन देने लगे हैं। सुबह 11 बजे राजभोग लगाया जाता है और फिर 11:55 बजे राजभोग आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। शाम को मंदिर के पट 5:30 बजे खुलते हैं और रात करीब 8:30 बजे ठाकुरजी को भोग लगाया जाता है। इसके बाद 9:25 बजे शयन भोग आरती होती है और मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं।
गर्मियों में एक घंटा पहले उठते हैं ठाकुरजी
गर्मियों में ठाकुरजी अब सुबह एक घंटा पहले उठते हैं और रात को एक घंटा देर से सोते हैं। हालांकि दोपहर में राजभोग के बाद अब उन्हें दो घंटे का विश्राम समय मिल रहा है। यह बदलाव दिवाली तक लागू रहेगा।
ठाकुरजी की पोशाक में बदलाव
गर्मियों में ठाकुरजी को गर्मी का सामना न करना पड़े, इसके लिए मंदिर के सेवायतों ने उनकी पोशाक में भी बदलाव किया है। अब ठाकुरजी को हल्के रंग के रेशमी और सूती कपड़े पहनाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके।
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