चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। नदी का पानी खतरे के निशान से करीब 2.05 मीटर ऊपर बहने की सूचना है। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों को नदी के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर का असर नदी किनारे के क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। पानी बढ़ने के कारण घाटों और निचले हिस्सों में स्थिति गंभीर हो सकती है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। तेज बहाव के कारण नदी में उतरना या किनारे के बेहद करीब जाना खतरनाक साबित हो सकता है।

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। रामघाट सहित नदी के किनारे कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जहां सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में घाटों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने की आवश्यकता बढ़ गई है।
खतरे के निशान से 2.05 मीटर ऊपर पानी बहना आसपास के निचले इलाकों के लिए चिंता का विषय है। अगर नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो निचले क्षेत्रों में पानी प्रवेश करने का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीण इलाकों में खेतों और संपर्क मार्गों पर भी बाढ़ का असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। नदी में पानी बढ़ने के साथ तेज बहाव भी बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे समय में पुल-पुलियों और नदी किनारे बने रास्तों से गुजरते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। बच्चों और मवेशियों को नदी के पास जाने से रोकने की सलाह दी जाती है।
प्रशासन के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण काम जलस्तर की लगातार निगरानी करना और संवेदनशील इलाकों में समय रहते जरूरी कदम उठाना है। जरूरत पड़ने पर निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत व्यवस्था तैयार रखने की आवश्यकता हो सकती है।
बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी की मात्रा नदी के जलस्तर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए अगले कुछ समय तक मंदाकिनी के स्तर में होने वाले बदलाव पर विशेष नजर रहेगी। फिलहाल नदी खतरे के निशान से 2.05 मीटर ऊपर बह रही है। स्थानीय लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी के तेज बहाव से दूर रहें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। जलस्तर में आगे बढ़ोतरी होने पर नदी किनारे बसे इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत पड़ सकती है।
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