उत्तर प्रदेश :  चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जमानत की शर्तों में और ढील देने तथा पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अपने पैतृक स्थान पर जाने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जमानत की मौजूदा शर्तों में बदलाव का कोई आधार नहीं बनता।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत के समक्ष ऐसा कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसके आधार पर जमानत की शर्तों में अतिरिक्त राहत दी जा सके। पीठ ने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आवेदन खारिज किया जाता है।
सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि वर्तमान जमानत शर्तों के कारण वह अपने परिवार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, जैसे बेटियों के जन्मदिन, में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने अदालत से मानवीय आधार पर राहत देने की अपील की। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी अतिरिक्त छूट की आवश्यकता नहीं है।
इसी सुनवाई के दौरान पीड़ित किसान पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मुकदमे की कार्यवाही को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि निचली अदालत में मुकदमे की सुनवाई अत्यधिक तेजी से कराई जा रही है, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण गवाहों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप था कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों सहित कई लोगों को केवल इसलिए गवाहों की सूची से हटा दिया गया क्योंकि वे अगले ही दिन अदालत में उपस्थित नहीं हो सके।
प्रशांत भूषण ने कहा कि कई गवाहों को बेहद कम समय का नोटिस दिया जा रहा है। यदि वे निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हो पाते हैं तो उन्हें सूची से बाहर कर दिया जाता है, जिससे मुकदमे की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आवेदन दायर करने की अनुमति भी मांगी।
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की शिकायतों पर सबसे पहले संबंधित अधीनस्थ अदालत के समक्ष ही सुनवाई होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि कौन-से गवाह महत्वपूर्ण हैं और किनका बयान आवश्यक है, इसका निर्णय ट्रायल कोर्ट ही बेहतर तरीके से कर सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पहले निचली अदालत के समक्ष यह बताया जाए कि संबंधित गवाह मामले के लिए क्यों आवश्यक हैं।
सुनवाई के दौरान एक अन्य मुद्दा भी सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति पर कथित रूप से गवाह को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया था। प्रशांत भूषण ने कहा कि जिस गवाह को कथित तौर पर धमकाया गया, उसे बाद में गवाहों की सूची से भी हटा दिया गया। उन्होंने बताया कि वह व्यक्ति अब मुकदमे की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति मांग रहा है। इस पर अदालत ने कहा कि संबंधित आवेदन पर उचित समय पर विचार किया जाएगा, लेकिन पहले इस विषय पर भी निचली अदालत का रुख किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि तीन अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों पर एक एसयूवी चढ़ा दी गई थी, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई थी। इसके बाद हिंसा में वाहन चालक और भारतीय जनता पार्टी के दो कार्यकर्ताओं की भी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना में एक पत्रकार की भी जान चली गई थी। इस प्रकार कुल आठ लोगों की मौत हुई थी।
इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं। लंबी जांच और सुनवाई के बाद दिसंबर 2023 में निचली अदालत ने आशीष मिश्रा सहित 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इसके बाद से मुकदमे की नियमित सुनवाई जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल आशीष मिश्रा को जमानत की शर्तों में किसी प्रकार की अतिरिक्त राहत नहीं मिलेगी। वहीं, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मुकदमे से जुड़े गवाहों और सुनवाई प्रक्रिया से संबंधित सभी आपत्तियों पर पहले ट्रायल कोर्ट में ही विचार किया जाना चाहिए। ऐसे में अब इस बहुचर्चित मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया निचली अदालत में ही केंद्रित रहेगी।
Tags: