उत्तर प्रदेश

मायावती का बड़ा बयान, उमाशंकर सिंह के बेटे ने चाहा तो राजनीति में मिलेगा पूरा समर्थन

Ratna Netam
6 Aug 2026 3:56 PM IST
मायावती का बड़ा बयान, उमाशंकर सिंह के बेटे ने चाहा तो राजनीति में मिलेगा पूरा समर्थन
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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार देर रात निधन हो गया। वह 55 वर्ष के थे और पिछले करीब दो वर्षों से ब्रेन कैंसर से जूझ रहे थे। उनकी तबीयत अधिक बिगड़ने के बाद उन्हें हरियाणा के गुरुग्राम स्थित फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत कई नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया।
गुरुवार को लखनऊ स्थित उनके आवास पर बसपा सुप्रीमो मायावती पहुंचीं और पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर अंतिम श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वह भावुक नजर आईं। उन्होंने उमाशंकर सिंह को पार्टी का बेहद निष्ठावान और समर्पित नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा ईमानदारी और पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि बसपा से जुड़ने के बाद उमाशंकर सिंह ने कभी पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं किया और जीवनभर संगठन तथा अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रहे।
मायावती ने कहा कि उमाशंकर सिंह उन्हें अपनी सगी बहन की तरह मानते थे। चाहे वह लखनऊ में रहती हों या दिल्ली में, हर वर्ष रक्षाबंधन पर वह उनसे राखी बंधवाने अवश्य आते थे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि राजनीति में कई लोग आए और चले गए, लेकिन उमाशंकर सिंह ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा। उनके निधन की खबर ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा आघात पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में पूरी बसपा परिवार उमाशंकर सिंह के परिवार के साथ खड़ा है।
बसपा प्रमुख ने उनके परिवार को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा भी दिया। उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह के परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। यदि उनका बेटा राजनीति में आने की इच्छा जताता है तो पार्टी उसे पूरा समर्थन देगी। उन्होंने कहा कि रसड़ा विधानसभा क्षेत्र की जनता ने लगातार तीन बार उमाशंकर सिंह को अपना प्रतिनिधि चुना और उनसे गहरा लगाव रखा। ऐसे में यदि परिवार चाहे तो पार्टी उनके बेटे को आगे बढ़ाने में पूरी मदद करेगी ताकि वह अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा सके।
उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। वह बलिया के एससी कॉलेज में छात्रसंघ के महामंत्री रहे और बाद में जिला पंचायत सदस्य के रूप में भी सक्रिय रहे। इसके बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा और धीरे-धीरे पूर्वांचल में पार्टी का मजबूत चेहरा बन गए। वर्ष 2012 में उन्होंने पहली बार बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी लगातार जीत हासिल कर उन्होंने क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाए रखी। लगातार तीन बार विधायक चुने जाने के कारण वह बसपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे।
पिछले दो वर्षों से वह ब्रेन कैंसर का इलाज करा रहे थे। उनका उपचार विदेश, विशेषकर अमेरिका में भी कराया गया था। हालांकि स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने के बाद कुछ दिन पहले उन्हें गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बुधवार रात उनका निधन हो गया। उनके निधन से बसपा को पूर्वांचल में बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
उमाशंकर सिंह के निधन के साथ ही उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। वह वर्तमान विधानसभा में पार्टी के एकमात्र विधायक थे। ऐसे में अब विधानसभा में बसपा का कोई भी निर्वाचित सदस्य नहीं बचा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह बसपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है, क्योंकि पार्टी पूर्वांचल में उमाशंकर सिंह के नेतृत्व के सहारे संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही थी।
उनके निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त करते हुए उनके योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे सार्वजनिक जीवन की बड़ी क्षति बताया, जबकि अखिलेश यादव ने उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी नेताओं ने उमाशंकर सिंह के सरल स्वभाव, जनसेवा के प्रति समर्पण और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता को याद किया। उनके निधन से न केवल बसपा बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति ने भी एक अनुभवी और जनप्रिय नेता को खो दिया है।
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