गोरखपुर : भारतीय रेलवे ने लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों (ALP) के काम को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब उन्हें अनावश्यक कागजी कार्यों से राहत मिलेगी, जिससे वे अपना पूरा ध्यान ट्रेन के सुरक्षित संचालन पर केंद्रित कर सकेंगे। रेलवे ने लोको पायलटों की जिम्मेदारियों से जुड़े कुछ गैरजरूरी दस्तावेजी कामों को कम करने का फैसला लिया है। रेलवे का मानना है कि ट्रेन चलाते समय लोको पायलट का ध्यान पूरी तरह सिग्नल, ट्रैक और परिचालन सुरक्षा पर होना चाहिए। अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया में समय और ध्यान लगाने से बचाकर उनकी कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकेगी।

स्टेशन समय दर्ज करने की प्रक्रिया में बदलाव
नई व्यवस्था के तहत सहायक लोको पायलटों को अब हर स्टेशन का समय अपनी क्रू डायरी या लॉग बुक में दर्ज करने की जरूरत नहीं होगी। केवल उन स्टेशनों की जानकारी दर्ज करनी होगी जहां ट्रेन का ठहराव निर्धारित है। इस बदलाव से लोको पायलटों पर मौजूद अतिरिक्त कार्यभार कम होगा और वे ट्रेन संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों पर बेहतर ध्यान दे पाएंगे।
सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगा फायदा
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि लोको पायलटों का मुख्य काम ट्रेन को सुरक्षित और समय पर चलाना है। ऐसे में गैरजरूरी प्रक्रियाओं को कम करने से दुर्घटना रोकने और बेहतर परिचालन में मदद मिल सकती है। ट्रेन संचालन के दौरान छोटी सी चूक भी बड़ी घटना का कारण बन सकती है, इसलिए ड्राइवर का सतर्क रहना बेहद जरूरी होता है।
लंबे समय से उठ रही थी मांग
लोको पायलट संगठन लंबे समय से मांग कर रहे थे कि ट्रेन संचालन के दौरान अतिरिक्त कागजी काम को कम किया जाए। उनका कहना था कि कई बार जरूरी परिचालन कार्यों के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया में समय देना पड़ता है। रेलवे ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए समिति बनाई थी और उसकी कई सिफारिशों को स्वीकार किया गया है।
डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा
रेलवे लगातार परिचालन व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इससे रिकॉर्ड रखने, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। तकनीक के इस्तेमाल से कर्मचारियों का बोझ कम करने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने पर रेलवे का फोकस है।
यात्रियों की सुरक्षा होगी प्राथमिकता
लोको पायलटों को कागजी काम से राहत मिलने के बाद उनका अधिक ध्यान ट्रेन की गति, सिग्नल, ट्रैक की स्थिति और अन्य सुरक्षा मानकों पर रहेगा। रेलवे का यह कदम सुरक्षित और बेहतर ट्रेन संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में ऐसी और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की संभावना है, जिससे कर्मचारियों और यात्रियों दोनों को फायदा मिलेगा।

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