लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने वाली आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर सरकार ने बड़ा शिकंजा कसा है। योजना के तहत इलाज के नाम पर गड़बड़ी करने वाले 866 अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जांच में कई अस्पतालों पर नियमों की अनदेखी, फर्जी क्लेम और गलत तरीके से भुगतान लेने जैसे मामले सामने आए हैं।सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन कुछ अस्पतालों द्वारा योजना का गलत फायदा उठाने की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद अधिकारियों ने जांच अभियान चलाया और संदिग्ध गतिविधियों वाले अस्पतालों की जांच की गई।जांच के दौरान कई अस्पतालों में ऐसे मामले सामने आए, जहां मरीजों के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई गई। कुछ अस्पतालों पर आरोप है कि उन्होंने बिना जरूरत के इलाज दिखाकर क्लेम किया, जबकि कुछ मामलों में मरीजों के नाम पर फर्जी उपचार दिखाकर भुगतान लेने की कोशिश की गई।
866 अस्पतालों पर हुई कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारियों ने जांच के बाद 866 अस्पतालों को कार्रवाई के दायरे में लिया है। इन अस्पतालों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की गई है। इसमें अस्पतालों को योजना से बाहर करना, भुगतान रोकना, जुर्माना लगाना और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई शामिल है।अधिकारियों का कहना है कि योजना में किसी भी तरह की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी अस्पताल गरीब मरीजों के लिए बनी इस योजना का गलत इस्तेमाल करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
फर्जी क्लेम और गलत इलाज के मामले आए सामने
आयुष्मान योजना में अस्पतालों को मरीजों के इलाज के बाद सरकार की ओर से भुगतान किया जाता है। इसी प्रक्रिया में कुछ अस्पतालों द्वारा कथित रूप से गलत जानकारी देकर भुगतान लेने की कोशिश की गई।जांच में कुछ अस्पतालों में मरीजों की संख्या, इलाज की प्रक्रिया और मेडिकल रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। कई जगह ऐसे मामलों की शिकायत मिली जहां मरीजों को योजना का लाभ देने के बजाय कागजों में ही इलाज दिखा दिया गया।अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल निगरानी और डेटा जांच के माध्यम से ऐसे मामलों को पकड़ने में मदद मिली है।
मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
सरकार का कहना है कि आयुष्मान योजना का लाभ केवल पात्र मरीजों तक पहुंचना चाहिए। किसी भी अस्पताल को गरीब मरीजों के इलाज के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।स्वास्थ्य विभाग ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि वे योजना के नियमों का पालन करें। मरीजों की जानकारी, इलाज का रिकॉर्ड और क्लेम प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतनी होगी।
अस्पतालों की लगातार हो रही निगरानी
आयुष्मान भारत योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। अस्पतालों के क्लेम, मरीजों के रिकॉर्ड और इलाज की प्रक्रिया की जांच की जा रही है।अधिकारियों का कहना है कि तकनीक की मदद से संदिग्ध मामलों की पहचान की जा रही है। डेटा एनालिसिस के जरिए ऐसे अस्पतालों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां असामान्य तरीके से ज्यादा क्लेम किए जा रहे हैं।
योजना से जुड़े लोगों को राहत देने की कोशिश
आयुष्मान भारत योजना देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इसके तहत पात्र परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि योजना में किसी तरह की अनियमितता न हो और वास्तविक जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
दोषी अस्पतालों पर आगे भी होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि जांच प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। अगर किसी अन्य अस्पताल में भी गड़बड़ी सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।अधिकारियों का कहना है कि आयुष्मान योजना में शामिल अस्पतालों को मरीजों की सेवा को प्राथमिकता देनी होगी। केवल आर्थिक लाभ के लिए योजना का गलत इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।फिलहाल 866 अस्पतालों पर हुई कार्रवाई को सरकार की ओर से स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में भी आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों की निगरानी और जांच जारी रहने की संभावना है।
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