मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में केसरगंज मंडी स्थित मस्जिद में निर्माण को लेकर चल रहा विवाद रविवार को एक बार फिर गरमा गया। आरोप है कि मस्जिद पहुंचे हिंदू सुरक्षा संगठन के पदाधिकारियों और स्थानीय व्यापारियों के साथ मौलवी मोहम्मद कमर और उनके बेटे साद ने बदसलूकी की। दोनों पर गोली मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया। सूचना मिलने पर रेलवे रोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पिता-पुत्र को हिरासत में ले लिया। बाद में दोनों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की गई और न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई।
रिपोर्ट के मुताबिक केसरगंज मंडी स्थित मस्जिद में निर्माण को लेकर तीन दिन पहले भी विवाद हुआ था। उस समय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया था। रविवार को कुछ मीडियाकर्मी इस मामले की कवरेज के लिए मस्जिद पहुंचे थे। इसी दौरान अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही और कुछ स्थानीय व्यापारी भी वहां पहुंच गए। आरोप है कि इसी दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। सचिन सिरोही और व्यापारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि मौलवी मोहम्मद कमर ने उनके साथ बदसलूकी की जबकि उनके बेटे साद ने ईंट मारने की कोशिश की। पिता-पुत्र पर गोली मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया। स्थानीय व्यापारी ईश्वर चंद कंसल ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत दी।
दूसरे पक्ष ने भी लगाए आरोप
मामले में दूसरे पक्ष की ओर से भी आरोप लगाए गए हैं। एआईएमआईएम के महानगर अध्यक्ष इमरान अंसारी आसपा नेता बदर अली और सपा नेता जीतू नागपाल समेत मुस्लिम समाज के कई लोग रेलवे रोड थाने पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि सचिन सिरोही और अनुराग जूते पहनकर मस्जिद के अंदर गए थे। उनका दावा है कि मौलवी ने उन्हें जूते पहनकर अंदर जाने से रोका जिसके बाद विवाद और बदसलूकी हुई। इस तरह घटना को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए गोली मारने की धमकी और बदसलूकी जैसी बातों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पिता-पुत्र को मिली जमानत
रेलवे रोड थाना प्रभारी विजय कुमार के मुताबिक मौलवी मोहम्मद कमर और उनके बेटे साद के खिलाफ शांतिभंग में मामला दर्ज किया गया। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें जमानत मिल गई। केसरगंज मस्जिद में निर्माण को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। ताजा घटनाक्रम के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तारी के बाद दोनों को जमानत मिलने की पुष्टि हुई है जबकि दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए आरोपों को लेकर विवाद बना हुआ है।
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