चोरी के बाद बदला कारोबार फिर खड़ा किया नकली सिक्कों का जाल पांच गिरफ्तार
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में नकली सिक्के बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस की संयुक्त टीम ने तीतरों क्षेत्र में संचालित फैक्ट्री पर छापा मारकर गिरोह के कथित सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से 20 रुपये के 6400 नकली सिक्के, अधबने सिक्के, छह मशीनें और बड़ी संख्या में डाई तथा अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। गिरोह पर अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में खपाने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में मोहाली निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह के अलावा हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्धन और अनुराग पाल उर्फ लंकेश शामिल हैं। इस गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के कई जिलों के साथ पंजाब और बिहार तक फैला बताया जा रहा है। पुलिस अब आरोपियों के संपर्कों और नकली सिक्के खरीदने वाले एजेंटों की पहचान कर रही है।
जांच में सामने आई उपकार लूथरा की कहानी भी चौंकाने वाली है। वह केवल दसवीं कक्षा तक पढ़ा है। आरोप है कि अपराध की दुनिया में उसकी शुरुआत दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में एक ज्वैलरी शॉप में चोरी करने के बाद हुई थी। चोरी की घटना के बाद उसने अवैध गतिविधियों से दूरी बनाकर सामान्य जीवन शुरू करने का प्रयास किया। इसके लिए उसने कपड़ों की दुकान खोली लेकिन उसका कारोबार सफल नहीं हुआ।
कपड़ों की दुकान में नुकसान होने के बाद लूथरा की मुलाकात देहरादून निवासी गुलशन गंभीर से हुई। पुलिस के मुताबिक इसी मुलाकात के बाद उसकी जिंदगी की दिशा बदल गई और वह नकली सिक्के बनाने के धंधे से जुड़ गया। गिरोह के संपर्क में आने के बाद उसने सिक्के तैयार करने की तकनीक समझी और धीरे-धीरे अपना नेटवर्क तैयार कर लिया। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर फैक्ट्रियां बनाकर नकली सिक्कों का उत्पादन शुरू किया गया।
पुलिस का दावा है कि उपकार लूथरा वर्ष 2001 से नकली सिक्कों के अवैध कारोबार में सक्रिय था। इससे पहले भी उसका नाम इस तरह के मामलों में सामने आ चुका है। वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस ने उसे एक लाख रुपये के इनामी आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया था। जेल से बाहर आने के बाद भी उसने कथित रूप से अपना अवैध नेटवर्क फिर खड़ा कर लिया और नकली सिक्के बनाने तथा उन्हें बाजार में चलाने का काम जारी रखा।
गिरोह ने सहारनपुर के तीतरों क्षेत्र को अपने नए उत्पादन केंद्र के रूप में चुना था। यहां छह मशीनों की मदद से प्रतिदिन 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार किए जाते थे। एक सिक्का बनाने में करीब पांच से छह रुपये की लागत आती थी। तैयार सिक्का एजेंटों को 12 से 15 रुपये में दिया जाता था। इसके बाद एजेंट उसे बाजार में वास्तविक मूल्य यानी 20 रुपये में चला देते थे।
नकली सिक्कों को खपाने के लिए ऐसे स्थानों को चुना जाता था जहां बड़ी संख्या में नकद लेनदेन होता है और सिक्कों की बारीकी से जांच नहीं की जाती। शराब की दुकानों को गिरोह ने अपना प्रमुख बाजार बना रखा था। इसके अलावा टोल प्लाजा और किराना दुकानों पर भी नकली सिक्के चलाए जाते थे। छोटे भुगतान के कारण आमतौर पर दुकानदार सिक्कों की जांच नहीं करते थे और वे आसानी से बाजार में फैल जाते थे।
छापे के दौरान पुलिस ने 1.28 लाख रुपये मूल्य के 6400 तैयार नकली सिक्के बरामद किए। इसके साथ करीब पांच लाख रुपये मूल्य के अधबने सिक्के मिलने की बात कही गई है। बरामद सामान में छह मशीनें, 59 डाई, डाई पॉलिश करने वाली मशीन, घिसाई के पत्थर, आठ मोबाइल फोन और दो कारें शामिल हैं। सात हिसाब रजिस्टर, एक चेकबुक और अन्य दस्तावेज भी मिले हैं।
हिसाब रजिस्टर और मोबाइल फोन गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। पुलिस इनके माध्यम से नकली सिक्के खरीदने वाले एजेंटों, कच्चा माल उपलब्ध कराने वालों और बाजार में सिक्के खपाने वाले लोगों की पहचान कर रही है। बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच किए जाने की तैयारी है। अपराध से अर्जित संपत्ति मिलने पर उसे जब्त करने की कार्रवाई हो सकती है।
सहारनपुर हाल में पंजाब नेशनल बैंक के करेंसी चेस्ट से जुड़े 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोटों के मामले को लेकर सुर्खियों में रहा है। इसके बाद नकली सिक्कों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। हालांकि दोनों मामले अलग हैं। 17.29 करोड़ रुपये का मामला नकली नोटों से जुड़ा है जबकि इस फैक्ट्री पर 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में खपाने का आरोप है।
गिरोह द्वारा 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के चलाने का आंकड़ा पूछताछ में सामने आया दावा है। इसकी पुष्टि बरामद रजिस्टरों, वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद होगी। फिलहाल बरामद तैयार सिक्कों का वास्तविक मूल्य 1.28 लाख रुपये बताया गया है। पुलिस फरार सदस्यों और एजेंटों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने किन राज्यों और शहरों में नकली सिक्कों की आपूर्ति की थी।