लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बजट पारित हुए करीब पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन विभिन्न विभागों द्वारा विकास योजनाओं और परियोजनाओं के लिए आवंटित धनराशि खर्च करने की रफ्तार अब भी बेहद धीमी बनी हुई है। वित्तीय वर्ष का महत्वपूर्ण समय निकलने के बावजूद बजट के इस्तेमाल में अपेक्षित तेजी नहीं आने से सरकार की चिंता बढ़ गई है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब अगले वर्ष प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले सरकार अधिक से अधिक परियोजनाओं को जमीन पर उतारना चाहती है।

सरकार की कोशिश है कि बजट में घोषित योजनाओं का लाभ समय रहते आम लोगों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए विभागों को आवंटित धनराशि का तेजी से और नियमानुसार इस्तेमाल करना जरूरी है। हालांकि पांच महीने बीतने के बाद भी कई विभाग खर्च के निर्धारित लक्ष्य से पीछे बताए जा रहे हैं। इससे नई परियोजनाओं की शुरुआत और पहले से चल रहे विकास कार्यों की गति प्रभावित होने की आशंका है।

विधानसभा चुनाव को देखते हुए आने वाले कुछ महीने सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। चुनाव की अधिसूचना लागू होने के बाद आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी। इसके बाद सरकार के लिए नई योजनाओं की घोषणा करना या मतदाताओं को प्रभावित करने वाले बड़े नीतिगत फैसले लेना संभव नहीं होगा। यही कारण है कि सरकार अधिसूचना जारी होने से पहले बजट में शामिल अधिकतम योजनाओं को शुरू करने और लंबित परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में तेजी लाना चाहती है।

अगले वर्ष जनवरी के आसपास विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में विभागों के पास बजट का प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए सीमित समय बचा है। यदि खर्च की मौजूदा रफ्तार जारी रही तो कई महत्वपूर्ण योजनाएं निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो पाएंगी। इसके साथ ही परियोजनाओं का लाभ चुनाव से पहले जनता तक पहुंचाने की सरकार की योजना भी प्रभावित हो सकती है।

बजट पारित होने के बाद विभागों को योजनाओं के लिए धनराशि आवंटित की जाती है। इसके बाद विभागीय स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति लेने, निविदा जारी करने और काम शुरू कराने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। कई बार इन प्रक्रियाओं में देरी होने के कारण धनराशि खर्च नहीं हो पाती। परियोजनाओं की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और अलग-अलग स्तर से अनुमति प्राप्त करने में लगने वाला समय भी बजट खर्च की गति को प्रभावित करता है।

सरकार चाहती है कि विभाग केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करने तक सीमित न रहें, बल्कि परियोजनाओं का वास्तविक काम भी जल्द शुरू कराएं। बजट में की गई घोषणा तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब उसका असर जमीन पर दिखाई देगा। सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़ी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने से जनता को सीधा लाभ मिल सकता है। इसलिए बजट खर्च की सुस्त गति को चुनावी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विभागों के सामने अब निर्धारित समय के भीतर धनराशि का इस्तेमाल करने की चुनौती है। जल्दबाजी में बजट खर्च करने के बजाय पारदर्शिता और वित्तीय नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा। यदि केवल खर्च का लक्ष्य पूरा करने के लिए बिना पर्याप्त तैयारी के कार्य स्वीकृत किए जाते हैं तो निर्माण की गुणवत्ता और योजनाओं के प्रभाव पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए विभागों को गति और गुणवत्ता के बीच संतुलन बनाते हुए काम करना होगा।

विकास परियोजनाओं की धीमी गति का असर सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर भी पड़ता है। किसी परियोजना के लिए धन उपलब्ध होने के बावजूद काम शुरू नहीं होना प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी को दर्शाता है। कई मामलों में विभागीय प्रस्ताव समय से तैयार नहीं होते तो कहीं तकनीकी स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया में देरी हो जाती है। जमीन की उपलब्धता और स्थानीय स्तर की औपचारिकताएं भी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में बाधा बन सकती हैं।

आने वाले समय में सरकार विभागवार बजट खर्च और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा तेज कर सकती है। जिन विभागों का खर्च कम है, उनसे देरी के कारणों की जानकारी मांगी जा सकती है। इसके साथ ही अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर परियोजनाओं को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए जाने की संभावना है। सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि बजट की धनराशि निर्धारित उद्देश्यों पर खर्च हो और योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे।

विधानसभा चुनाव से पहले विकास कार्यों को पूरा कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में अगले कुछ महीने विभागों के लिए परीक्षा की तरह होंगे। उन्हें लंबित स्वीकृतियां पूरी करने, निविदा प्रक्रिया में तेजी लाने और निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करनी होगी। बजट खर्च की रफ्तार बढ़ने पर ही सरकार अपनी प्रमुख परियोजनाओं को निर्धारित समय के भीतर जमीन पर उतार पाएगी।

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