सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में नकली मुद्रा से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। तीतरों थाना क्षेत्र में कथित रूप से संचालित नकली सिक्का बनाने की फैक्ट्री का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह पर 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार कर अलग-अलग राज्यों के बाजारों में खपाने का आरोप है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस अवैध कारोबार का कुल लेनदेन 70 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि इसकी वास्तविक रकम का पता विस्तृत वित्तीय जांच के बाद ही चल सकेगा।

बताया जा रहा है कि आरोपी बेहद कम लागत में नकली सिक्का तैयार करते थे। एक 20 रुपये के सिक्के को बनाने में करीब छह रुपये खर्च होते थे। इसके बाद गिरोह के सदस्य इन सिक्कों को अपने संपर्कों और एजेंटों के माध्यम से 12 से 15 रुपये प्रति सिक्के की दर से बेच देते थे। अलग-अलग स्तरों से गुजरने के बाद यही सिक्का बाजार में अपने वास्तविक अंकित मूल्य यानी 20 रुपये में चला दिया जाता था। इस तरह नकली सिक्के बनाने वाले से लेकर बाजार में खपाने वाले तक सभी को लाभ मिलता था।

गिरोह के सदस्य नकली सिक्कों को सीधे बड़ी संख्या में बाजार में उतारने के बजाय छोटे-छोटे हिस्सों में सप्लाई करते थे। आशंका है कि सिक्कों को ऐसी जगहों पर इस्तेमाल किया जाता था जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में नकद लेनदेन होता है और सिक्कों की बारीकी से जांच नहीं की जाती। फुटकर दुकानों, बाजारों, मेलों, बस अड्डों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों के माध्यम से नकली सिक्कों को चलाना अपेक्षाकृत आसान होता है। पुलिस अब गिरोह के वितरण नेटवर्क और उससे जुड़े एजेंटों की पहचान करने में जुटी है।

मामले का खुलासा होने के बाद तीतरों क्षेत्र में चल रही कथित फैक्ट्री से सिक्के बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उपकरण बरामद किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फैक्ट्री कितने समय से संचालित हो रही थी और यहां प्रतिदिन कितने सिक्के तैयार किए जाते थे। बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच भी कराई जा सकती है, जिससे सिक्के तैयार करने की पूरी प्रक्रिया और उत्पादन क्षमता का पता लगाया जा सके।

प्रारंभिक जांच में गिरफ्तार आरोपियों का संपर्क दूसरे राज्यों में सक्रिय लोगों से होने की बात कही जा रही है। इसी आधार पर इसे अंतरराज्यीय गिरोह माना गया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि गिरोह ने किन-किन राज्यों और शहरों में नकली सिक्कों की आपूर्ति की। इसके लिए गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और यात्रा से संबंधित विवरण खंगाले जा रहे हैं। कॉल डिटेल और संपर्क सूची के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू नकली सिक्कों को बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने वालों की पहचान करना भी है। सिक्के तैयार करने के लिए इस्तेमाल धातु कहां से खरीदी गई और मशीनें किसने उपलब्ध कराईं, इसका पता लगाया जा रहा है। यदि उपकरण विशेष रूप से नकली सिक्के बनाने के लिए तैयार किए गए थे तो उनके निर्माता और आपूर्तिकर्ता की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

नकली सिक्कों को असली जैसा दिखाने के लिए आरोपियों द्वारा उनके आकार, वजन, रंग और डिजाइन की नकल किए जाने की आशंका है। पुलिस और संबंधित विशेषज्ञ बरामद सिक्कों की तुलना वास्तविक सिक्कों से कर सकते हैं। इससे यह स्पष्ट होगा कि नकली सिक्के कितनी सफाई से बनाए गए थे और सामान्य व्यक्ति के लिए उनकी पहचान करना कितना मुश्किल था। बरामद सिक्कों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों में भी चिंता बढ़ गई है। प्रतिदिन नकद लेनदेन करने वाले दुकानदारों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। संदिग्ध सिक्का मिलने पर उसे आगे चलाने के बजाय संबंधित बैंक या अधिकारियों को जानकारी देना चाहिए। जानबूझकर नकली मुद्रा या सिक्का चलाना कानूनी अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

सहारनपुर पहले भी कथित नकली करेंसी से जुड़े 17.29 करोड़ रुपये के मामले को लेकर चर्चा में रहा है। अब 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्कों के कारोबार का दावा सामने आने से मुद्रा से जुड़े अपराधों की जांच और निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि दोनों मामलों के बीच किसी प्रकार का संबंध है या वे पूरी तरह अलग नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

पुलिस गिरफ्तार पांचों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के सरगना और अन्य सहयोगियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा कि गिरोह ने वास्तव में कितने नकली सिक्के बनाए और बाजार में उतारे। फिलहाल 70 करोड़ रुपये का आंकड़ा जांच का विषय है और इसे अंतिम रूप से प्रमाणित राशि नहीं माना जा सकता।

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