Lucknow: राष्ट्रीय सम्मेलन के चलते शहर में ट्रैफिक रूट बदले
"21 जनवरी तक लखनऊ में बड़े सरकारी कार्यक्रम का असर"
लखनऊ: राजधानी आज से 21 जनवरी तक अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का केंद्र बनेगा। तीन दिन तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण आयोजन में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के अध्यक्ष, विधान परिषदों के सभापति तथा संसद के वरिष्ठ पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। सम्मेलन की मेजबानी उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना द्वारा की जा रही है।
विधान भवन में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन 19 जनवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओमप्रकाश बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश की विशेष उपस्थिति रहेगी। वहीं, 21 जनवरी को समापन सत्र को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संबोधित करेंगे।
विधायी परंपरा के अनुसार यह सम्मेलन हर वर्ष किसी न किसी राज्य में आयोजित किया जाता है। इससे पहले इसका आयोजन कर्नाटक में हुआ था। उत्तर प्रदेश को यह अवसर चौथी बार मिला है, जबकि इससे पूर्व वर्ष 2015 में प्रदेश ने इसकी मेजबानी की थी। सम्मेलन के साथ-साथ 19 जनवरी को विधानसभा एवं विधान परिषद सचिवों का अलग सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।
20 जनवरी को होने वाले मुख्य सत्र में विधायी संस्थाओं की भूमिका, संसदीय मर्यादा, कार्य संचालन की दक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने जैसे विषयों पर गहन मंथन किया जाएगा। इस अवसर पर अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का 86वां और विधायी निकायों के सचिवों का 62वां सम्मेलन भी आयोजित होगा।
ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा व्यवस्था: सम्मेलन के दौरान शहर में भारी वीआईपी आवागमन को देखते हुए 19 से 21 जनवरी तक लखनऊ के प्रमुख इलाकों में यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया है। विधान भवन और उसके आसपास सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक डायवर्जन लागू रहेगा। इमरजेंसी स्थिति में पुलिस द्वारा आवागमन की सुविधा दी जाएगी, जिसके लिए कंट्रोल नंबर 9454405155 जारी किया गया है।
कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए विधान भवन क्षेत्र की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था को पांच जोन और 13 सेक्टरों में बांटा गया है। अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी, बम निरोधक दस्ता और एटीएस कमांडो तैनात किए गए हैं। 18 जनवरी से ही देशभर से आने वाले अतिथियों के आगमन को देखते हुए शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जिलाधिकारी द्वारा भी बड़ी संख्या में मजिस्ट्रेटों की ड्यूटी लगाई गई है।