उत्तर प्रदेश : राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षक-शिक्षिकाओं का प्रवक्ता पद पर प्रमोशन लंबे समय से अधर में लटका हुआ है। प्रदेश के करीब चार हजार से अधिक एलटी ग्रेड शिक्षक और शिक्षिकाएं पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। नियमानुसार जिन शिक्षक-शिक्षिकाओं की सेवा अवधि पांच वर्ष पूरी हो चुकी है, उन्हें हर साल उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर प्रवक्ता पद पर पदोन्नति दी जानी चाहिए, लेकिन विभागीय प्रक्रिया में देरी और तकनीकी आपत्तियों के चलते यह मामला कई वर्षों से लंबित है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार, राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियां मौजूद हैं। वर्तमान समय में महिला शाखा में 1800 से अधिक और पुरुष शाखा में दो हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इसके बावजूद पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है और विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
इससे पहले महिला शाखा के दो विषयों में कार्यरत 59 शिक्षिकाओं को दिसंबर 2022 में प्रवक्ता पद पर पदोन्नति दी गई थी। लेकिन पुरुष वर्ग के शिक्षकों की पदोन्नति कई वर्षों से नहीं हो सकी है। पुरुष शाखा में वरिष्ठता सूची और अन्य तकनीकी विवादों के कारण प्रक्रिया लगातार अटकती रही है।
जानकारी के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने करीब दो साल पहले ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी की बैठक आयोजित करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। डीपीसी की बैठक के बाद ही पदोन्नति की अंतिम प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक के रिक्त पदों के आधार पर भेजे गए प्रस्ताव में आयोग ने कई आपत्तियां दर्ज कर दीं। इन आपत्तियों के समाधान में देरी के कारण मामला अभी तक आगे नहीं बढ़ पाया है।
लोक सेवा आयोग ने विभाग से रिक्त पदों के खाली होने का कारण और उनकी तिथि से संबंधित पूरा विवरण मांगा था। इसके अलावा वरिष्ठता सूची को निर्विवादित होने का प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि शिक्षिकाओं की वरिष्ठता सूची में क्रमांक सही तरीके से दर्ज नहीं हैं। वहीं चयन वर्ष के अनुसार अधियाचित पदों में दिव्यांग आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने पर भी आपत्ति जताई गई।
वहीं एलटी ग्रेड पुरुष वर्ग के शिक्षकों की पदोन्नति में सबसे बड़ी बाधा वरिष्ठता विवाद बनी हुई है। वरिष्ठता सूची को लेकर विवाद के चलते कई वर्षों से प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि विभाग को जल्द से जल्द सभी आपत्तियों का समाधान कर डीपीसी की बैठक करानी चाहिए, जिससे योग्य शिक्षकों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिल सके।
शिक्षकों की पदोन्नति रुकने का असर नई भर्तियों पर भी पड़ रहा है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड के सभी पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जाता है। यदि एलटी ग्रेड शिक्षकों को समय पर प्रवक्ता पद पर पदोन्नति मिल जाती है तो खाली होने वाले पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा। विभागीय अधिकारियों की देरी के कारण नई नियुक्तियों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
इसी बीच समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में प्रधानाचार्य पद पर हुई पदोन्नति का मामला भी विवादों में आ गया है। प्रदेश के 101 सर्वोदय विद्यालयों में प्रवक्ता पद से सीधे प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नत किए गए शिक्षकों को पदनाम तो दे दिया गया, लेकिन उन्हें निर्धारित ग्रेड पे यानी वेतनमान का लाभ नहीं मिल सका।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में करीब 100 प्रवक्ताओं को डीपीसी के बाद प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नत किया गया था। बाद में शासन के संज्ञान में मामला आने पर डीपीसी में लिए गए निर्णयों को निरस्त कर दिया गया। शासन और प्रभावित शिक्षक दोनों ही इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं।
नियमों के अनुसार प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के लिए प्रवक्ता पद पर 10 वर्ष की सेवा पूरी होना जरूरी है। इसके साथ ही समय-समय पर मिलने वाले वेतनमान और अन्य सेवा शर्तों का पालन भी आवश्यक है। अब शिक्षक और विभाग दोनों की नजर न्यायालय के फैसले पर टिकी हुई है।
कुल मिलाकर प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया लंबे समय से प्रशासनिक अड़चनों में फंसी हुई है। हजारों शिक्षक वर्षों से अपने प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। यदि विभाग जल्द ही आयोग की आपत्तियों का समाधान कर डीपीसी प्रक्रिया पूरी करता है तो न केवल शिक्षकों को राहत मिलेगी बल्कि विद्यालयों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी।