तुलसीपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। परीक्षा को निष्पक्ष, अनुशासित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से गायत्री शक्ति पीठ तुलसीपुर के साधना हाल में पर्यवेक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में तुलसीपुर क्षेत्र के 73 विद्यालयों में परीक्षा कराने के लिए नियुक्त पर्यवेक्षकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्हें परीक्षा की प्रक्रिया, जिम्मेदारियों और आवश्यक व्यवस्थाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला प्रभारी गुलाब चंद्र भारती ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने पर्यवेक्षकों को परीक्षा के उद्देश्य और आयोजन की रूपरेखा से अवगत कराया। जिला प्रभारी ने बताया कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 19 सितंबर, शनिवार को पूरे प्रदेश में एक साथ आयोजित की जाएगी। इसके लिए निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर पहले से सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
गुलाब चंद्र भारती ने कहा कि परीक्षा को सफल बनाने में विद्यालयों के शिक्षकों के साथ नियुक्त पर्यवेक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगी। पर्यवेक्षक परीक्षा से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों को गंभीरता से समझें और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं। किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो, इसके लिए परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्र पर उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं का अवलोकन करना आवश्यक होगा।
कार्यशाला के दौरान सभी पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया गया कि वे परीक्षा सामग्री के साथ निर्धारित समय पर अपने-अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुंचें। पर्यवेक्षकों को मिशनरी गणवेश में उपस्थित रहने के लिए भी कहा गया है। परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य आवश्यक सामग्री को व्यवस्थित करने तथा परीक्षार्थियों को निर्धारित स्थान पर बैठाने में विद्यालय प्रबंधन का सहयोग करने की जिम्मेदारी भी पर्यवेक्षकों की होगी।
प्रशिक्षण में बताया गया कि परीक्षा केंद्र पर अनुशासन बनाए रखना आयोजन की प्राथमिक आवश्यकता है। पर्यवेक्षकों को परीक्षा शुरू होने से पहले विद्यार्थियों को आवश्यक निर्देश देने होंगे। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक विद्यार्थी को सही प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका मिले। परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार एकत्र कर सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई है।
कार्यशाला में परीक्षा के दौरान उत्पन्न होने वाली संभावित परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई। पर्यवेक्षकों को बताया गया कि किसी प्रकार की समस्या सामने आने पर विद्यालय के प्रधानाचार्य, केंद्र प्रभारी और संबंधित पदाधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जाए। परीक्षा के संचालन में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रत्येक निर्देश का पालन जरूरी बताया गया।
जिला प्रभारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा विद्यार्थियों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का माध्यम है। इस परीक्षा के जरिए विद्यार्थियों को भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कारों से परिचित कराने का प्रयास किया जाता है। परीक्षा केवल विद्यार्थियों के ज्ञान का मूल्यांकन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उनके भीतर अच्छे विचार, अनुशासन और सामाजिक चेतना को प्रोत्साहित करना भी है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय शिक्षा का प्रमुख केंद्र होते हैं और यहां मिलने वाले संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों की जानकारी मिलने से विद्यार्थी अपने इतिहास, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। परीक्षा के आयोजन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को इसे एक जिम्मेदारी के रूप में लेकर पूरी निष्ठा से काम करना चाहिए।
तुलसीपुर क्षेत्र के 73 विद्यालयों में एक साथ परीक्षा आयोजित होना एक बड़ा दायित्व है। इसी को देखते हुए पर्यवेक्षकों को पहले से प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि सभी केंद्रों पर समान व्यवस्था लागू की जा सके। परीक्षा केंद्रों पर समयबद्धता, अनुशासन और सामग्री की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। पर्यवेक्षकों को विद्यालय प्रबंधन के साथ तालमेल बनाकर परीक्षा संपन्न कराने के निर्देश दिए गए।
प्रशिक्षण कार्यशाला में परीक्षा सामग्री के वितरण और उसे सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के संबंध में भी जानकारी दी गई। पर्यवेक्षकों से कहा गया कि परीक्षा सामग्री प्राप्त करते समय उसकी जांच कर लें। परीक्षा से पहले गोपनीयता बनाए रखना और निर्धारित समय पर ही सामग्री का उपयोग करना आवश्यक होगा। परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी उत्तर पुस्तिकाओं का सही मिलान कर उन्हें तय व्यवस्था के अनुसार जमा कराया जाएगा।
आयोजकों ने कहा कि बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली परीक्षा की सफलता सामूहिक सहयोग पर निर्भर करती है। शिक्षकों, पर्यवेक्षकों और गायत्री परिवार से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय से ही आयोजन सुचारु रूप से पूरा किया जा सकेगा। प्रत्येक परीक्षा केंद्र की व्यवस्था पर नजर रखने और जरूरी जानकारी समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
कार्यशाला में शामिल पर्यवेक्षकों ने परीक्षा संचालन से जुड़े दिशा-निर्देशों को समझा और अपनी जिम्मेदारियों की जानकारी ली। आयोजकों ने विश्वास जताया कि प्रशिक्षण के बाद पर्यवेक्षक निर्धारित नियमों के अनुसार परीक्षा संपन्न कराएंगे। परीक्षा के आयोजन को लेकर 73 विद्यालयों में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। अब 19 सितंबर को निर्धारित समय के अनुसार सभी केंद्रों पर भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा कराई जाएगी।
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73 विद्यालयों में होगी भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा
पर्यवेक्षकों को मिला निष्पक्ष परीक्षा कराने का प्रशिक्षण
गायत्री शक्ति पीठ में पर्यवेक्षक कार्यशाला आयोजित
संस्कृति ज्ञान परीक्षा की तैयारियां अंतिम चरण में
19 सितंबर को एक साथ परीक्षा देंगे विद्यार्थी
73 विद्यालयों में होगी भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, पर्यवेक्षकों को दिए गए आवश्यक निर्देश
तुलसीपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। परीक्षा को निष्पक्ष, अनुशासित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से गायत्री शक्ति पीठ तुलसीपुर के साधना हाल में पर्यवेक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें तुलसीपुर क्षेत्र के 73 विद्यालयों में परीक्षा कराने के लिए नियुक्त पर्यवेक्षकों को उनके दायित्वों, परीक्षा सामग्री के उपयोग और केंद्र की व्यवस्थाओं से संबंधित आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला प्रभारी गुलाब चंद्र भारती ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने उपस्थित पर्यवेक्षकों को परीक्षा के उद्देश्य, आयोजन की रूपरेखा और निर्धारित नियमों की जानकारी दी। जिला प्रभारी ने बताया कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 19 सितंबर, शनिवार को पूरे प्रदेश में एक साथ आयोजित की जाएगी। सभी केंद्रों पर परीक्षा का संचालन तय कार्यक्रम और दिशा-निर्देशों के अनुसार कराया जाएगा।
गुलाब चंद्र भारती ने कहा कि बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली इस परीक्षा की सफलता में पर्यवेक्षकों की अहम भूमिका रहेगी। उन्हें परीक्षा से जुड़ी प्रत्येक व्यवस्था को गंभीरता से समझना होगा। पर्यवेक्षक परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचें और विद्यालय के शिक्षकों तथा केंद्र प्रबंधन के साथ समन्वय बनाकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं। परीक्षा के दौरान अनुशासन, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
प्रशिक्षण कार्यशाला में निर्देश दिया गया कि सभी पर्यवेक्षक परीक्षा सामग्री लेकर निर्धारित केंद्रों पर समय से मिशनरी गणवेश में उपस्थित होंगे। केंद्र पर पहुंचने के बाद उन्हें परीक्षा कक्षों की व्यवस्था का निरीक्षण करना होगा। प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिकाएं और अन्य जरूरी सामग्री का मिलान करने के बाद ही उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वितरित किया जाएगा। पर्यवेक्षकों से कहा गया कि परीक्षा सामग्री की सुरक्षा और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाए।
परीक्षा शुरू होने से पहले विद्यार्थियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने, उन्हें निर्धारित स्थान पर बैठाने और समय की जानकारी देने की जिम्मेदारी भी पर्यवेक्षकों की होगी। परीक्षा अवधि के दौरान केंद्र पर शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण बनाए रखना आवश्यक बताया गया। पर्यवेक्षकों से कहा गया कि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, लेकिन परीक्षा की निष्पक्षता से किसी तरह का समझौता भी नहीं किया जाए।
कार्यशाला में बताया गया कि परीक्षा संपन्न होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को सावधानी से एकत्र किया जाएगा। परीक्षार्थियों की संख्या और प्राप्त उत्तर पुस्तिकाओं का मिलान करने के बाद उन्हें निर्धारित व्यवस्था के अनुसार सुरक्षित जमा कराया जाएगा। यदि परीक्षा संचालन के दौरान कोई समस्या आती है तो पर्यवेक्षक तत्काल केंद्र प्रभारी और परीक्षा से जुड़े पदाधिकारियों से संपर्क करेंगे। किसी भी निर्णय में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
जिला प्रभारी गुलाब चंद्र भारती ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक विरासत, जीवन मूल्यों और नैतिक परंपराओं से परिचित कराना है। शिक्षा केवल पाठ्यक्रम और पुस्तकों तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण तथा उनमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सांस्कृतिक ज्ञान की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जानने और समझने का अवसर मिलता है। इससे बच्चों में अपने देश, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के प्रति रुचि विकसित होती है। परीक्षा आयोजन से जुड़े शिक्षकों और पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराएं।
तुलसीपुर क्षेत्र के 73 विद्यालयों में परीक्षा का आयोजन होने के कारण व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। अलग-अलग विद्यालयों के लिए नियुक्त पर्यवेक्षकों को समय, परीक्षा केंद्र और सामग्री से संबंधित जानकारी दी गई। सभी पर्यवेक्षकों से कहा गया कि वे परीक्षा के दिन अंतिम समय का इंतजार न करें और निर्धारित अवधि से पहले केंद्र पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं।
विद्यालयों के शिक्षकों को भी पर्यवेक्षकों का पूरा सहयोग करना होगा। परीक्षा कक्षों में बैठने की उचित व्यवस्था, स्वच्छता और जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। आयोजकों के अनुसार, विद्यालय प्रबंधन और पर्यवेक्षकों के बीच बेहतर तालमेल से परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकेगा। केंद्र पर विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार आवश्यक व्यवस्था पहले से तैयार रखने के लिए भी कहा गया।
कार्यशाला के दौरान पर्यवेक्षकों को परीक्षा के प्रत्येक चरण की जानकारी दी गई। परीक्षा सामग्री प्राप्त करने से लेकर उसके वितरण, निगरानी और उत्तर पुस्तिकाएं जमा कराने तक की प्रक्रिया समझाई गई। इसका उद्देश्य सभी 73 विद्यालयों में समान व्यवस्था लागू करना और परीक्षा संचालन के दौरान भ्रम की स्थिति से बचना है।
आयोजकों ने पर्यवेक्षकों से अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और सजगता के साथ निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रत्येक केंद्र पर नियमों का पालन जरूरी है। किसी भी स्तर पर लापरवाही से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए पर्यवेक्षक विद्यालय पहुंचने के बाद केंद्र प्रभारी से समन्वय स्थापित करते हुए सभी तैयारियों को समय रहते पूरा कराएं।
कार्यशाला के समापन पर परीक्षा आयोजन से जुड़े प्रमुख निर्देशों को दोबारा स्पष्ट किया गया। पर्यवेक्षकों ने भी अपनी जिम्मेदारियों और परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित जानकारियां प्राप्त कीं। गायत्री परिवार ने विश्वास जताया कि शिक्षकों और पर्यवेक्षकों के सहयोग से 19 सितंबर को सभी निर्धारित केंद्रों पर भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा निष्पक्ष तथा व्यवस्थित तरीके से संपन्न होगी।