मीरजापुर। चलती रेलगाड़ी में एक अजनबी यात्री पर भरोसा करना महिला और उसके परिवार के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया। संतनगर इलाके से दिल्ली जाने के लिए निकली महिला की नौ वर्षीय बेटी का कथित रूप से सहयात्री ने अपहरण कर लिया। आरोपित ने पहले टिकट लेने में मदद करने और सफर के दौरान हमदर्दी दिखाने के बहाने महिला का विश्वास हासिल किया। इसके बाद प्रयागराज जंक्शन पर भ्रम की स्थिति पैदा कर वह बच्ची को अपने साथ लेकर फरार हो गया। राजकीय रेलवे पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने सक्रियता दिखाते हुए बच्ची को मध्य प्रदेश के सतना से सकुशल बरामद कर लिया।
घटना का खुलासा रविवार को राजकीय रेलवे पुलिस के क्षेत्राधिकारी अरुण पाठक ने किया। उन्होंने बताया कि बच्ची की बरामदगी के लिए रेलवे पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम गठित की गई थी। उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर आरोपित की तलाश शुरू की गई और संभावित स्थानों पर टीमों को भेजा गया। लगातार की गई कार्रवाई के बाद बच्ची को सतना से सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला अपनी नौ साल की बेटी के साथ संतनगर क्षेत्र से दिल्ली जाने के लिए निकली थी। यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात एक अजनबी व्यक्ति से हुई। बताया जा रहा है कि आरोपित ने शुरुआत से ही खुद को मददगार यात्री के रूप में प्रस्तुत किया। उसने टिकट खिड़की पर महिला की सहायता की और बाद में ट्रेन की बोगी में भी उसके साथ बातचीत करता रहा। व्यवहार और मीठी बातों के कारण महिला को उस पर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।
ट्रेन में सफर के दौरान आरोपित ने महिला और बच्ची से परिचय बढ़ाया। उसने कथित रूप से परिवार की यात्रा और गंतव्य से संबंधित जानकारी भी हासिल कर ली। पूरे रास्ते वह सामान्य सहयात्री की तरह व्यवहार करता रहा। इससे महिला को लगा कि वह आवश्यकता पड़ने पर मदद करने वाला व्यक्ति है। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपित ने प्रयागराज जंक्शन पर अपनी साजिश को अंजाम दिया।
बताया गया कि ट्रेन के प्रयागराज जंक्शन पहुंचने पर आरोपित ने महिला को भ्रमित किया। स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ और आवागमन के बीच उसने ऐसी परिस्थिति पैदा की कि कुछ समय के लिए बच्ची मां से अलग हो गई। महिला को जब बेटी दिखाई नहीं दी तो उसने आसपास तलाश शुरू की, लेकिन बच्ची और वह सहयात्री दोनों नहीं मिले। इसके बाद महिला को अपने साथ अनहोनी होने का एहसास हुआ।
बच्ची के गायब होने से महिला घबरा गई और उसने रेलवे अधिकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों से मदद मांगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी सक्रिय हुई और बच्ची की तलाश के लिए अभियान शुरू किया गया। नौ वर्ष की बच्ची से जुड़ा मामला होने के कारण अधिकारियों ने अलग-अलग रेलवे स्टेशनों और संबंधित सुरक्षा इकाइयों को सूचना भेजी। संदिग्ध के संभावित यात्रा मार्ग का पता लगाने का भी प्रयास किया गया।
रेलवे पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने स्टेशन तथा आसपास उपलब्ध जानकारियों के आधार पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाई। बच्ची को किस दिशा में ले जाया गया है, इसका पता लगाने के लिए संभावित रेल मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई। तलाश के दौरान टीम को आरोपित और बच्ची के मध्य प्रदेश की ओर जाने की सूचना मिली। इसके बाद सतना और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया गया।
संयुक्त प्रयासों के बाद टीम ने सतना से बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया। मासूम के सुरक्षित मिलने की खबर के बाद उसके परिवार ने राहत की सांस ली। अपहरण के कुछ घंटों के भीतर बच्ची का पता लग जाना इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। घटना से जुड़े व्यक्ति की भूमिका और उसके इरादों के संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जीआरपी क्षेत्राधिकारी अरुण पाठक ने रविवार को पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बच्ची को सुरक्षित बचा लिया गया है। मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और महिला द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी गईं। यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपित ने पहले भी इस तरह की किसी घटना को अंजाम दिया है या नहीं। संबंधित व्यक्ति की पृष्ठभूमि और यात्रा से जुड़ी जानकारी की जांच की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर रेल यात्रा के दौरान अजनबी यात्रियों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने के खतरे को उजागर किया है। लंबी दूरी की यात्रा में कई बार सहयात्री सामान्य बातचीत के दौरान परिवार और गंतव्य से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर लेते हैं। कुछ लोग मदद के बहाने टिकट, सामान या बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी लेने की कोशिश भी करते हैं। ऐसे में यात्रियों को सतर्क रहना और बच्चों को किसी अपरिचित व्यक्ति के साथ अकेला नहीं छोड़ना जरूरी है।
रेलवे स्टेशन पर भीड़ अधिक होने के कारण बच्चों के बिछड़ने या उन्हें बहला-फुसलाकर ले जाने का खतरा बना रहता है। परिवार के सदस्यों को स्टेशन पर उतरते समय बच्चों का हाथ पकड़कर रखना चाहिए। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति लगातार पीछा करता दिखाई दे या आवश्यकता से अधिक नजदीकी बढ़ाने का प्रयास करे तो इसकी सूचना तत्काल रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी या स्टेशन पर मौजूद अधिकारियों को देनी चाहिए।
इस मामले में आरोपित ने कथित रूप से हमदर्दी और मदद को विश्वास हासिल करने का माध्यम बनाया। इसी कारण महिला उसके वास्तविक इरादों को समय रहते नहीं समझ सकी। घटना से यह संदेश भी मिलता है कि यात्रा के दौरान किसी अपरिचित व्यक्ति को मोबाइल नंबर, पता, गंतव्य या परिवार से संबंधित निजी जानकारी देने से बचना चाहिए। बच्चों को भी समझाना चाहिए कि वे माता-पिता की अनुमति के बिना किसी अजनबी के साथ कहीं न जाएं।
नौ वर्षीय बच्ची की सकुशल बरामदगी से परिवार को बड़ी राहत मिली है, लेकिन कुछ घंटों की इस घटना ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। जीआरपी और सुरक्षा बलों की तत्परता से मासूम को बचा लिया गया। अब अधिकारियों की कार्रवाई इस बात पर केंद्रित है कि घटना की पूरी साजिश सामने लाई जाए और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कदम उठाए जाएं।