शामली में कांवड़ यात्रा की बैरिकेडिंग बनी जानलेवा, रस्सी में स्कूटी उलझने से युवक की मौत
शामली। उत्तर प्रदेश के शामली जिले में कांवड़ यात्रा के मद्देनजर की गई बैरिकेडिंग एक दर्दनाक हादसे का कारण बन गई। पानीपत-खटीमा नेशनल हाईवे पर बैरिकेडिंग में बांधी गई रस्सी से स्कूटी के उलझ जाने के कारण 33 वर्षीय युवक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।
मृतक की पहचान बाबरी थाना क्षेत्र के गांव तलवा माजरा निवासी कमल उर्फ विश्वास (33) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह कमल अपनी स्कूटी से किसी काम के सिलसिले में जा रहा था। इसी दौरान पानीपत-खटीमा नेशनल हाईवे पर कांवड़ यात्रा की सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए लगाए गए बैरिकेड के पास उसकी स्कूटी अचानक रस्सी में उलझ गई। बताया जा रहा है कि स्कूटी की रफ्तार होने के कारण संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर गिर पड़ा। हादसा इतना गंभीर था कि युवक को गंभीर चोटें आईं और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा कुछ ही सेकंड में हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत युवक की मदद करने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी। घटना की सूचना पुलिस और स्थानीय प्रशासन को दी गई। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कांवड़ यात्रा के दौरान यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के लिए हाईवे पर बैरिकेडिंग की गई थी। बैरिकेडों को जोड़ने के लिए रस्सी का भी उपयोग किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि स्कूटी चालक को रस्सी दिखाई नहीं दी, जिसके कारण वाहन उसमें उलझ गया और यह हादसा हो गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बैरिकेडिंग निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार लगाई गई थी या नहीं तथा वहां पर्याप्त चेतावनी संकेत और रिफ्लेक्टर मौजूद थे या नहीं।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन ऐसी बैरिकेडिंग नहीं होनी चाहिए जिससे आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ जाए। उनका कहना है कि यदि बैरिकेडिंग के साथ पर्याप्त संकेतक, रिफ्लेक्टिव टेप, फ्लैश लाइट या अन्य सुरक्षा उपाय लगाए जाते, तो संभव है कि यह दुर्घटना टल सकती थी।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसे की हर पहलू से जांच की जा रही है। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए जाते हैं। लाखों शिवभक्तों की आवाजाही को देखते हुए कई स्थानों पर यातायात डायवर्जन, बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा बनाया जाता है। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, लेकिन इस तरह की घटनाएं व्यवस्थाओं की समीक्षा की आवश्यकता की ओर भी संकेत करती हैं।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अस्थायी बैरिकेडिंग को इस प्रकार लगाया जाना चाहिए कि वह दूर से स्पष्ट दिखाई दे। विशेषकर राष्ट्रीय राजमार्गों और व्यस्त मार्गों पर रिफ्लेक्टिव सामग्री, चेतावनी बोर्ड, बैरिकेड लाइट और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य रूप से होनी चाहिए, ताकि वाहन चालकों को समय रहते स्थिति का अंदाजा लग सके और दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
मृतक कमल उर्फ विश्वास की असमय मौत से परिवार में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी घटना के बाद मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हाईवे पर की जाने वाली बैरिकेडिंग और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित बनाया जाए।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा कांवड़ यात्रा जैसी बड़ी धार्मिक व्यवस्थाओं के दौरान सुरक्षा उपायों के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती को भी सामने लाता है।