हरदोई : उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी पाए गए आरोपी को उम्रकैद की सजा दी है। अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला साल 2022 का है, जब आरोपी ने मासूम बच्ची को पैसे का लालच देकर अपने पास बुलाया और फिर सुनसान जगह ले जाकर घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था।
मामला हरदोई जिले के पचदेवरा थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, करीब 9 साल की बच्ची गांव के पश्चिमी छोर पर खेतों के पास लकड़ी बीनने गई थी। इसी दौरान आरोपी वीरेश ने बच्ची को देखा और उसे बहाने से अपने पास बुलाया। आरोपी ने बच्ची को 30 रुपये देने का लालच दिया, जिसके बाद वह उसके पास चली गई।
आरोप है कि आरोपी बच्ची को बहला-फुसलाकर झाड़ियों के पीछे ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट भी की गई। घटना के बाद किसी तरह बच्ची आरोपी के चंगुल से निकलकर घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी।
बच्ची की आपबीती सुनकर परिवार के लोग हैरान रह गए। इसके बाद पीड़िता की मां की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने जांच शुरू कर आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले को अदालत में पेश किया।
कोर्ट में पेश किए गए अहम सबूत
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता समेत सात गवाहों को अदालत के सामने पेश किया। सरकारी वकील ने मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की।
अदालत ने सभी गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को दोषी माना। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मन मोहन सिंह ने आरोपी वीरेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
जुर्माना राशि पीड़िता को देने का आदेश
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को दी जाए। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिया गया कि पीड़िता को शासन की उचित योजना के तहत आर्थिक सहायता दिलाने के लिए जरूरी कार्रवाई की जाए।
पॉक्सो कानून के तहत हुई कार्रवाई
नाबालिग बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए पॉक्सो एक्ट बनाया गया है। इस कानून के तहत बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है और दोष साबित होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चे की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए न्याय प्रक्रिया पूरी की जाती है।
समाज के लिए बड़ा संदेश
इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को किसी भी अनजान व्यक्ति से सावधान रहने की सीख देनी चाहिए और माता-पिता को भी बच्चों के साथ लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए।
छोटी उम्र के बच्चों को बहला-फुसलाकर अपराध करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि समाज में ऐसा अपराध करने वालों को कड़ा संदेश दिया जा सके।
अदालत के फैसले से पीड़ित परिवार को राहत
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद मिली है। अदालत ने अपने फैसले के जरिए साफ संदेश दिया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई और मजबूत जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। पुलिस और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
यह मामला समाज को यह सीख देता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देनी चाहिए ताकि अपराधों को रोका जा सके।
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